जो जग कहता था,वही आपने कहा मी लॉर्ड

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-राजेश बैरागी-
नोएडा प्राधिकरण को कभी ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ घोषित नहीं किया गया। ऐसा किया जाना शायद संभव भी नहीं है। सेक्टर 93 में सुपरटेक के जुड़वां टॉवर एमराल्ड प्रोजेक्ट पर कल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई कठोर टिप्पणी कि ‘आपके चेहरे ही नहीं, मुंह,आंख,नाक से भी भ्रष्टाचार टपकता है’ को लेकर आज दिनभर सोशल मीडिया व निजी बातचीत में खूब चर्चा रही। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के क्या मायने हैं? यदि यह केवल टिप्पणी है तो निश्चित ही आने वाले कल में इसे भुला दिया जाएगा।
और यदि इस टिप्पणी को अदालत ने अपने आदेश का आधार बनाया तो प्राधिकरण के भ्रष्टाचार में पारंगत अधिकारी उस आदेश को अपने अनुकूल बना लेंगे। हालांकि अपराध और भ्रष्टाचार किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास पर आधारित होते हैं।1976 में स्थापित नोएडा प्राधिकरण को लगभग एक दशक बाद तरजीह मिलनी शुरू हुई थी।1993 में अध्यक्ष बने आईएएस रवि माथुर ने प्राधिकरण के दरवाजे सभी के लिए खोल दिए थे। उनके बाद अध्यक्ष बनीं नीरा यादव ने अभूतपूर्व और मनमाने तरीके से प्राधिकरण की संपत्तियों को आवंटित करने तथा हर कार्य के लिए पैसे का खुला खेल किया। उनके विरुद्ध आंदोलन हुए, न्यायिक और सीबीआई की जांच हुई और अंततः उन्हें जेल जाना पड़ा।
जो लोग उस आंदोलन या उनका विरोध करने में शामिल थे, क्या वो प्राधिकरण में व्याप्त भ्रष्टाचार पर जरा भी अंकुश लगा सके? मैं समझता हूं कि उन्होंने अपने साथ कुछ रसीली कहानियां जोड़ लीं और नीरा यादव के बाद की और भ्रष्ट, और जन उत्पीड़क व्यवस्था को स्वीकार कर लिया। वर्तमान नोएडा प्राधिकरण भ्रष्टाचार का श्रेष्ठ उदाहरण है। यहां अधिकारी ही नहीं, अदना सा संविदा कर्मी भी करोड़ों की संपत्ति और विलासी जीवन का आनंद लेता है। एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि नोएडा प्राधिकरण में एक-आध हजार करोड़ रुपए तो अब तक फर्जी बिलों के जरिए निकाल लिये गये होंगे।सुपरटेक के एमराल्ड प्रोजेक्ट का नोएडा प्राधिकरण के भ्रष्टाचार के समुद्र में मामूली सा वजूद है।
परंतु प्राधिकरण, बिल्डर, प्रोपर्टी ब्रोकर और ठेकेदारों का नेक्सस बहुत बड़ा है। प्राधिकरण अपने नेक्सस के मामूली सदस्य को भी एकांकी नहीं छोड़ता, सुप्रीम कोर्ट में भी। वैसे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को उन लोगों को अवश्य सुनना चाहिए जो यह कहते नहीं थकते कि उन्होंने भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया है। अब यह मत कहना कि नोएडा प्राधिकरण की स्थापना कांग्रेस के शासनकाल में हुई थी और इसलिए उसमें आज भी हो रहे भ्रष्टाचार के लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)

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