सम्राट के जाति पर संग्राम से दुविधा में पड़े योगी

आगामी 22 सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 9वीं सदी के हिन्दू सम्राट मिहिर भोज का प्रतिमा का अनावरण करेंगे। क्षत्रिय महासभा और गुर्जर समाज लेकिन जिस प्रकार से नाम और जाति सुचक को लेकर आपस में भीड़ गए है निश्चित ही योगी इससे परेशान और दुविधा में पड़ गए होंगे। हालांकि दादरी में एक प्रेस कांफ्रेस करने गुर्जर समाज के लोग और क्षत्रिय समाज के लोगों नें कहा है कि हम दोनों ही मिलकर योगी जी का स्वागत करेंगे। लेकिन करनी सेना नें फिर से एक बार कहा है कि हम योगी के द्वारा किये जा रहे प्रतिमा का अनावरण का विरोध करेंगे। दोनों ही पक्ष इतिहास और शास्त्रार्थ करने को तैयार है और यह अच्छा भी होता अगर इस पर शास्त्रार्थ कर लिया जाता।

अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए बड़ी दुविधा है कि वह किसके पक्ष में जायें। क्षत्रिय समाज का दावा है कि हम लोग बीजेपी का कोर वोटर है और 11% प्रतिशत की हमारी आबादी है। इसलिए आने वाले चुनाव में योगी जी को 11% वोट को नाराज नही करनी चाहिए। वही गुर्जर समाज इस बात को लेकर अड़े है कि गुर्जर सम्राट मिहिर भोज को उनके नाम लिखा जाना चाहिए। बता दे कि उत्तर प्रदेश में खासकर पश्चिम उत्तर प्रदेश में गुर्जर समाज का दबदबा है। किसान आंदोलन के बाद बीजेपी के लिए यह वोट बहुत ही महत्वपूर्ण है।

विवाद बस इतने पर है कि सम्राट के आगे गुर्जर लगना चाहिए या नही। अगर क्षत्रिय समाज के तर्कों से समझे तो गुर्जर का मतलब गुर्जर प्रदेश से होता है जहाँ पर ज्यादा गुर्जर थे। आप खुद समझिये अगर सम्राट मिहिर भोज गुर्जराधिपति थे तो भी गुर्जर लिखने में किसी को क्या आपत्ति हो सकती है।
दूसरी तरफ अगर हम बात करे गुर्जर समाज जो तर्क दे रहे है। उनका कहना है कि सम्राट के साथ उनके वंशज या कुल का नाम लिखा होना चाहिए। लेकिन अगर यहाँ पर यह कहे कि सम्राट के साथ जाति सुचक नाम जोड़कर कर क्या हम सम्राट मिहिर भोज को कम नही कर रहे है। क्या सम्राट को सिर्फ गुर्जर समाज तक सीमित करना ठीक होगा।

इनसे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह भी है कि क्या हमे आपस में लड़ना चाहिए ? क्या सम्राट के वंशज सिर्फ नाम के लिए लड़ेंगे ? सम्राट के आगे क्यों नही गुर्जराधिपति लिख दिया जाय। हमे सहज होकर एक बार अवश्य इन बातों को सोचना होगा कि आखिर जिस मुगलों को अरबों को सम्राट के समय में भारत भूमि पर पैर रखने से पहले सौ बार सोचना पड़ा था । आज फिर से वह ताक लगायें बैठा है कि कब हम आपस में लड़े और दुश्मन हम पर हमला करें। क्या यह अच्छा नही होगा कि हम मिल बैठकर बात कर लेते। इस सनातन धरा को बचाने के लिए सम्राट मिहिर के गौरव को बचाने के लिए क्या हमें एक होना चाहिए या फिर आपस में लड़ना चाहिए।

वोट से बड़ा देश है और देश से बड़ा राष्ट है। देश की रक्षा सरकार करेगी लेकिन राष्ट्र की रक्षा स्वयं आपको करना होगा। हम नही चाहेंगे कि जिसका अतित इतना समृद्धशाली रहा हो उस पर वो लोग राज करें जिनके पूर्वज तलवार के डर से सलवार पहन लिया और आज अफगान और पाकिस्तान बना लिया है। हमें आगे तक सोचना चाहिए कि क्षत्रिय एक वर्ण व्यवस्था है। जो अपने स्वर्णिम इतिहास को जीवित रखने के लिए बनी है। आप आपस मे लड़कर क्या इसको नुकसान नही पहुँचा रहे है। लौट रहा है अपना स्वर्णिम युग और कुछ लुटेरे फिर से घात लगाए बैठा है। अभी संभल जायेंगे तो अच्छा होगा अन्यता अफगान की हालत हमारे सामने है। हम हिंदू सनातनी है हमारे लिए जाति बाद में धर्म पहले होनी चाहिए।

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