गोपाष्टमी के दिन गौ माता का पूजन करने से कई जन्मों के बंधन से मुक्ति मिलती है : विकास जैन

दैनिक समाज जागरण

आज का दिन हिंदू सनातन संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते है। क्योंकि आज के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण का गौ माता चारण लीला प्रारम्भ हुआ था। आज के दिन गौ माता के पूजन करने से जन्मों के बंधन से मुक्ति मिलती है। हमारे पूजा पद्धति में पंचगव्य का अपना एक विशिष्ट महत्व है।

नोएडा में आज गोपाष्टमी पर्व बड़े धुम धाम से मनाया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के द्वारा गौ-माता की पूजन किया गया। उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष विकास जैन ने गौ-माता की पूजन किया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि इस दिन का बहुत ही महत्व है, क्योंकि आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण नें चारण लीला की शुरुआत की।

उन्होने कहा कि गोपाष्टमी के दिन गौ-माता के पूजन करने से कई जन्मों के बंधन से मुक्ति मिलती है। आज नोएडा के विभिन्न सेक्टरों तथा गौ-शाला में गौ-माता की पूजा की जा रही है और यह हमारे लिए बड़ा ही गर्व का दिन है। उन्होने गौ-माता को तिलक लगाकर गर्म वस्त्र प्रदान किए और गुड़ खिलाकर आशीर्वाद लिया। उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के चेयरमैन नवनीत गुप्ता नें कहा कि आज के दिन हिंदू समाज के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, इस दिन गौ-माता को सेवा करके आशीर्वाद लिया जाता है।

पवित्र हिन्दू धर्म के अनुसार गौ माता के शरीर में ३३ (कोटि) प्रकार के देवता निवास करते है |जिनमे 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्‍विन कुमार। ये मिलकर कुल 33 होते हैं। ऋग्वेद ने गौ माता (गाय) को अघन्या कहा है। यजुर्वेद कहता है कि गौ अनुपमेय है। अथर्ववेद में गाय को संपतियों का घर कहा गया है। पौराणिक मान्यताओं व श्रुतियों के अनुसार, गौएं साक्षात विष्णु रूप है, गौएं सर्व वेदमयी और वेद गौमय है | भगवान श्रीकृष्ण को सारा ज्ञानकोष गोचरण से ही प्राप्त हुआ | जैन आदि तीर्थकर भगवान ऋषभदेव का चिह्न बैल था |गरुढ़ पुराण अनुसार वैतरणी पार करने के लिए गोदान का महत्व बताया गया है

शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार कुछ पशु-पक्षी ऐसे हैं, जो आत्मा की विकास यात्रा के अंतिम पड़ाव पर होते हैं | उनमें से गाय भी एक है। इसके बाद उस आत्मा को मनुष्य योनि में आना ही होता है |
कत्लखाने जा रही गाय को छुड़ाकर उसके पालन-पोषण की व्यवस्था करने पर मनुष्य को गौयज्ञ का फल मिलता है |

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