चुप क्यों है ? भारत के मोमबती गैंग रसिया युक्रेन युद्ध के मामले में

समाज जागरण

रसिया और युक्रेन के बीच हो रहे भीषण युद्ध ने पूरे दुनिया की ध्यान अपनी तरफ खीचा है। लेकिन एक हैरानी की बात यह है कि भारत के मोमबती गैंग अभी तक सक्रिय नही है। जबकि सैकड़ों के संख्या में युक्रेन के सैनिक और नागरिक मारे जा चुके है। मानव को अपना साम्राज्य जमाने की होड़ में हो रहे मानवता की हत्या निंदनीय है। इसके बावजूद भारत के लिबरल मोमबती गैंग का सक्रिय नही होना बताता है कि भारत में सारे प्रदर्शन और मोमबती जलाकर श्रद्धांजलि देने का काम चीना के कहने पर होता है। भारत के वामपंथ रसिया के मिसाइल से ज्यादा खतरनाक है। जो धीरे-धीरे हमारे देश मे जहर घोल दिया है।

आपको ध्यान दिलाना जरूरी है कि कुछ दिन पहले ही इजराइल ने गाजा पट्टी पर आतंकियों के खिलाफ हमला बोला था। उस समय मे भले ही इजरायली और फिलिस्तिनियों को भले ही न पता चला हो लेकिन भारत के लिबरल गैंग सड़कों पर मोमबती जलाकर प्रदर्शन करते नजर आये थे। आज युक्रेन को पूरी दुनिया ने अकेला छोड़ दिया है उसके हजारों नागरिक मारे गए है, देश में अनाज की संकट उत्पन्न होने लगे है तो भारत के लिबरल गैंग बिल्कुल शांत है जैसे कि उसे सांप सूंघ गया हो।

आइये जानते है कारण क्या है :

अगर हम कारण की बात करे तो एक बात साफ है कि भारत में जो लिबरल गैंग है उनका फंडिंग चाइना से है। उनके ही कहने पर भारत में अराजकता फैलाने की काम किया जाता है। लेकिन इस बार उनके पालनहारा रसिया के पक्ष में खड़ा है। अब समस्या यह है कि अपने पालनहारा के विरोध में मोमबती कैसे जलाये। यहाँ तक कि अगर युक्रेन के सहानुभूति में भी मोमबती जला दिया गया तो सांपो को दुग्घ पिलाना बंद कर देगा ड्रेगन। अब भईया कौन चाहता है कि उसके रोजी रोटी छिन जाय। जिसके कारण उसे बैठे बिठाये अच्छे खासे नोट मिलते है। पैसे के आगे मानवता क्या चीज है।

जब तक स्वयं में दम न हो न लड़े
युक्रेन और रसिया के बीच हो रहे जंग लगभग खत्म होने ही वाली है। उसका कारण है युक्रेन भले ही समृद्ध हो उसके पास में बड़े बड़े बिल्डिंग हो लेकिन वहाँ पर इजरायल की तरह राष्ट्रवाद नही है। एक तरफ जहाँ सेना नें रण छोड़ना शुरू कर दिया है वही दूसरी तरफ सरकार के आह्वान के बावजूद वहाँ के नागरिक हथियार उठाने को तैयार नही है। वहाँ के समृद्धशाली नागरिक अपने जान बचाकर भागने में लगे है। सूरत भले ही सुन्दर हो लेकिन युक्रेन में देश के प्रति वह वफादारी नही है जो इजराइल में देखने को मिलता है। हालांकि भारत में भी हालत कुछ बेहतर नही है। हर तरफ सांप ही सांप है।

युक्रेन नाटों के बहकावे मे

कहते है न जब तक अपने बुते में दम न हो लड़ना नही चाहिए। आज युक्रेन दुनिया के सामने एक मिशाल बन गया है। जहाँ एक तरफ रसिया उस पर कब्जा करने नही वाला है वही दूसरी तरफ उसके सहयोगी निंदा और प्रतिबंध से ही काम चला रहे है। युक्रेन के जोकर राष्ट्रपति पाकिस्तान के क्रिकेटर राष्ट्रपति से भी ज्यादा योग्य निकला। जिसका कारण है वहाँ के राष्ट्रपति का फिल्मी कामेडी वाला बैकग्राउण्ड होना। जीवन में हर चीज को कामेडी नही समझनी चाहिए। अगर आप हर चीज को कामेडी समझते है तो आपको वही खामियाजा भुगतना पड़ेगा जो आज युक्रेन भुगत रहा है। रसिया के सामने युक्रेन ऐसे भी कोई हेसियत नही रखता है। लेकिन कहते है न निकम्मों को ज्यादा चर्बी चढती है, वह न सिर्फ स्वयं का नुकसान करता है बल्कि अपने परिवार नागरिक और देश का भी नुकसान करता है।

भारत के राजनीतिक लाभ हानि

भारत के राजनीतिक क्या सोचता है यह तो राजनेता और उनका तंत्र जाने लेकिन अगर युद्ध से जान माल की हानि होता है तो हमे उसका निंदा अवश्य ही करना चाहिए, और निंदा से ज्यादा तो हम कुछ कर भी नही सकते है। आज भले ही युक्रेन भारत से मदद की गुहार लगा रहा हो लेकिन उसका पिछला इतिहास क्या रहा है, हमे इस पर भी बड़ी गहराई से बात करनी चाहिए। आज भले ही पाकिस्तान चीन के कहने पर रसिया के गोद में जाकर जबरदस्ती बैठ गया हो लेकिन सत्य तो यह है कि युक्रेन हर मामले में पाकिस्तान का साथ दिया है। लेकिन हमेशा की तरफ धोखेबाज पाकिस्तान एक बार फिर से साबित कर दिया है कि वह विश्वास करने लायक नही है। युक्रेन हमेशा ही पाकिस्तान को लेकर भारत का विरोध किया है। चाहे वह परमाणु परीक्षण के बाद हो या फिर कश्मीर मे धारा 370 हटाने को लेकर युक्रेन का स्टैण्ट साफ रहा है।

इस युद्ध में नाटों का निश्क्रिय भूमिका को देखकर एक बात और समझ में आने लगा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाईडेन रूस सर्मथक रहा है। राष्ट्रपति चुनाव के समय में भी रूस ने जो बाईडेन का भरपूर समर्थन किया था। अब जबकि नाटो को एक्शन लेना है तो उसका सारा का सारा दारोमदार जो बाइडन पर है। इससे एक बात तो साफ हो चला है कि नाटों के द्वारा रूस के खिलाफ छोटी मोटी प्रतिबंध लगाकर ही दुनिया को दिखाने की कोशिश की जा रही है कि हम युक्रेन का समर्थन करते है जबकि सच तो यह है कि अमेरिकी राष्टपति भी रसिया समर्थक है।

खैर जो हो रहा है ठीक नही हो रहा है भारत के मोमबती गैग को चाहिए कि जल्दी से जल्दी कैंडल मार्च निकालकर रसिया को सख्त सजा देने की मांग करे। एक बात और भारत के प्रधानमंत्री और वर्तमान बीजेपी के खिलाफ भी नारेबाजी करें ताकि यह आवाज चाइना तक पहुँचे।

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