कौन सुनेगा किसको सुनाए, घर खरीदारों की व्यथा ? राजनीतिक चरखे में उलझते घर खरीदारों के सपने

दैनिक समाज जागरण

कौन सुनेगा किसको सुनाये
कौन सुनेगा किसको सुनाये
इस लिए चुप रहते हैं
हमसे अपने रूठ न जाएँ
हमसे अपने रूठ न जाएँ
इस लिए चुप रहते हैं

फिल्म सौतन की बेटी, गाने का बोल है कौन सुनेगा किसको सुनाये, इसलिए चुप रहते है। किशोर कुमार नें इस गाने को बड़ी संजीदगी से गाया है। शब्द के बोल जितने उस समय मे प्रासंगिक थे उतने ही आज भी है। आज कोई कोई सुनने वाला नही है। कोई सुन भी ले तो बोलने वाला नही है, कोई बोले भी तो कुछ होने वाला नही है। कुछ भी करने से पहले मेरे इन सवालो को जरा ध्यान से पढिये और जबाब दीजिये।

नोएडा में लाखों घर खरीदारों के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। कोई क्यों सुनेगा इनका ? आखिर ये लोग है कौन ? कहां से आये है ये लोग ? इस नोएडा शहर में क्यो घर लिया है? आखिर उनको क्या हक है कि स्मार्ट सिटी के चरित्र पर भ्रष्टाचार के लिए आवाज उठाए ? जब यहाँ सरकार भी अपना, बिल्डर भी अपना। सरकार को सत्ता चाहिए और घर खरीदारों को उसका घर। आज के राजनीति में सत्ता पाने के लिए धन और बाहुबल की आवश्यकता कौन नही जानता है। ये चंदा कौन देता है, आपने कभी दिया है ? नहि दिया होगा आपने। ये चंदा बिल्डर और बिजनसमैन देता है, जिसके बदले में उन्हे सरकार भ्रष्टाचार करने की लाइसेंस देती है। भले आपके पैसे ही होगा लेकिन आपने तो बिल्डर को दिया था और बिल्डर नें सरकार चलाने वाली राजनीतिक पार्टियों को दिया। फिर आप लोग क्यों उम्मीद करते है कि सरकार आपकी बात सुनेगी। आप तो बस नोएडा में धरना प्रदर्शन करते रहिए। एक बात और आपके बीच में भी नेता है बैठा है जिससे आपसे कुछ लेना देना नही है, इसी मे कोई पक्ष का होगा और विपक्ष का भी, उसके लिए आप सिर्फ एक वोटर है। क्षमा कीजिएगा उनके लिए आप एक वोटर भी नही है। आप एक घर खरीदार है, जिसकों बिल्डर नें अपने जाल में फंसाकर लूट लिया है।

आप रेरा जाने की बात करते है तो एक व्यंग्य लगता है। क्या करेंगे रेरा जाकर? जब माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशो को भी दरकिनार कर दिया जाता है। टवीन टावर का मामला तो याद होगा आपको, तीन महीने होने वाले है। 30 नवंबर आखिरी तारीख है बिल्डिंग गिराने के लिए। अभी तक प्राधिकरण इस नतीजा पर नही पहुँची है कि इसे गिरायेगा कौन ? बिल्डर को सस्ता कान्टेक्टर चाहिए जो कि इस गिरा सके। न तो सस्ता कान्टेक्टर मिलेगा और नही तो यह बिल्डिंग गिराये जायेंगे। फिलहाल इसके लिए थ्री डी, थ्री डी का खेल जारी है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ जी नें एक स्पेशल जांच इन्वेस्टीगेशन टीम नोएडा के लिए रवाना किया। टीम पहुंची और जांच करके रिपोर्ट भी दे दिया गया, लेकिन कार्यवाही के लिए मुहुर्त निकाला जा रहा है, ऐसा भी हो सकता है कि सरकार में बैठे कुछ लोग और ब्यूरोक्रेट का नाम आ रहा हो, उन्हे बचाना योगी सरकार की मजबूरी हो सकते है। मै ऐसा नही कह रहा हूँ कि होगा ही। लेकिन ये बात तो मान ही लिजिए कि इस सरकार में नही तो किसी भी सरकार में नही।

खैर मेंरा कोई अपना इंटरेस्ट नही है कि यह बिल्डिंग गिरे। मै तो सिर्फ आपको एक उदाहरण दे रहा था बस। भला बिल्डर से कोई दुश्मनी कैसे ले सकता है। बिल्डर के सामने घर खरीदारों को अपने ही पैसे देकर गिर-गिराने पड़ते है। आप ऊंची आवाज मे बात तक नही कर सकते है क्योंकि उनके साथ में बाउण्सर भी होते है। कई मामले तो आपके सामने आये होंगे जिसमें घर खरीदारों को न सिर्फ बेईज्जति किया गया उनको मारा भी गया। बस दोष इतना था कि उन्होने अपने खुन पसीने के पैसे को इनको दिया है जो कि दशकों गुजर गया, तो किसी नें घर मांग लिया तो किसी ने पैसे की वापसी।
हम तो कहते है कि टवीन टावर में जिन घर खरीदारों के पैसे लगे है उनका घर ही उनको माननीय न्यायालय दिलवा दे तो अच्छा होगा। माननीय न्यायालय इसलिए कि सरकार की बस की बात नही है कि इन बिल्डरों से पंगा ले।

नोएडा के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता अनिल के गर्ग निहायत ही पत्र लिखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, शहरी विकास मंत्री को धर्म संकट में डालते रहते है। उनका कहना है कि जब बिल्डर रेरा के द्वारा काटे गये आरसी का अनुपालन नही करता है, घर खरीदारों को रेरा के पास जाने का क्या फायदा होगा। बिल्डर इतने ज्यादा रसूख है कि प्राधिकरण को भी पैसे नही देता है। दिल्ली एनसीआर में 50 प्रतिशत से ज्यादा बिल्डर डिफाल्टर हो चुका है। देश में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट दिल्ली और एनसीआर में लटके पड़े है 52 प्रतिशत। ज्यादातर बिल्डर के पास भूमि आवंटन की पैसा बकाया है।
उन्होने कहा है कि जिन बिल्डर के पास में जमीन का पैसा बकाया है, उनसे शपथ पत्र लेना चाहिए। इसके साथ ही प्राधिकरण के द्वारा लगाए गए जुर्माना और ब्याज पर भी माफी के बारे में सोचना चाहिए। क्योंकि प्राधिकरण और बिल्डर के बीच चल रहे आंख मिचौली के कारण लाखो घर खरीदार परेशान है। अपने जीवन भर के कमाई बिल्डर के हवाले करने के बाद भी उनको घर नही दिया जा रहा है। कोई तो हो जो उनका भी सुने।

हाल ही में एक मौलिक जन-संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें बहुत सारे अलग-अगल प्रोजेक्ट के घर खरीदार के प्रतिनिधि उसमें पधारे। उनका बड़ा भव्य स्वागत मौलिक भारत के द्वारा किया गया। घर खरीदारों के हित में लड़ने के लिए एक संगठन बनाने के लिए भी तैयार हो गए प्रतिनिधि। एक्शन प्लान भी बना लिया गया। लेकिन अपने अपने निवास स्थान पहुँचते ही सब मुकर गया। उनके स्वीकृति का मुख्य कारण पूरा मिटिंग कैमरे के सामने पारदर्शिता के साथ होना था। लेकिन बाद में उनको लगा कि हम तो घर खरीदार के फेवर में बेकार ही बोल आए है और हस्ताक्षर कर दिया। कई लोगों नें अपना नाम वापस ले लिया। फिर वही ढाक की तीन पात। यह तो होना ही था क्योंकि राजनीतिक मोह और बिल्डर के साथ सांठ गांठ की यही नतीजा निकलना था। कुछ लोग बिल्डर को जेल भिजवाना चाहते थे लेकिन मौलिक भारत नें बताया की यह समाधान नही है। वो तो जेल में भी मजे से रहेंगे और घर घरीदारों को और ज्यादा समय तक सड़को पर।

नोएडा स्पोर्टस सिटी के 35 हजार से ज्यादा घर खरीदार है, जिनका रजिस्ट्री नही हुआ है। बिल्डर को यहाँ पर स्पोर्टस सिटी के साथ-साथ स्पोर्टस सिटी से संबंधित लोगों के लिए घर बनाने के लिए अनुमति दिया गया, यहाँ पर खेल सुविधा विकसित करने के लिए 400 करोड़ खर्चा करने के नियम के साथ आवंटन हुई थी। लेकिन बिल्डर और प्राधिकरण के लोगो नें मिलकर घर तो बना दिया और खेल का मैदान खाली छोड़ दिया। यानि खेल के मैदान मे खेला हो गया।

खैर राजनीतिक चरखे मे उलझते घर खरीदारों के सपने, देखते रहिए, उम्मीद पर कायम रहना ही जीवन को संघर्ष करना सीखाता है। आप खाली है तो घरना प्रदर्शन कीजिए अन्यथा गांधीगिरी का इन बिल्डरों पर कोई फर्क नही पड़ता है। स्मार्ट सिटी नोएडा भ्रष्टाचार मे भी रैंकिग किया जाय तो नंबर वन है। यानि कि पहले पायदान पर। खैर राजनीतिक माहौल गर्म है, कुछ लोग घर खरीदारों के कंधों पर बंदूक रखकर अपना उल्लू भी सीधा करने में लगे है। घर खरीदारो से चंदा और बिल्डर से रिश्वत लेकर बिना काम धंधा के ही एसयूबी गाड़ी में चल रहे है वह भी महंगे पेट्रोल फुककर।

आपको कोई सुने न सुने लेकिन यह गाना आप जरूर सुनियेगा और वतन की आवाज यू-ट्यूब चैनल पर जाकर मौलिक भारत जन-संवाद कार्यक्रम जरूर देखियेगा। दिल तो एक ही है लेकिन इस गाने में दो दिल की बात हो रहा है जरा ध्यान से

दो दिल टूटे, दो दिल हारे
दुनिया वालों सदके तुम्हारे
दो दिल टूटे…

देखेगी मुखड़ा अपना, अब से जवानी दिल के दाग में
बरसेगा कैसे सावन, कैसे पड़ेंगे झूले बाग़ में
बैन करेंगे ख्वाब कुँवारे
दो दिल टूटे…

मैं ना रहूँगी लेकिन, गूंजेंगी आहें मेरी गाँव में
अब ना खिलेगी सरसों, अब ना लगेगी मेहंदी पाँव में
अब ना उगेंगे चाँद सितारे
दो दिल टूटे…

प्यार तुम्हारा देखा, देखा तुम्हारा आँखें मोड़ना
तोड़ तो डाला दिल को, खेल नहीं है दिल का तोड़ना
तड़पोगे तुम भी साथ हमारे
दो दिल टूटे…

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