भारत में विपक्ष कौन है ? और विपक्ष की भूमिका क्या है ?

भारत में राजनीतिक स्तर इतना नीचे गिरते जा रहा है की पता नही चल रहा है कि आखिर विपक्ष क्या है और विपक्ष की भूमिका वर्तमान में क्या है ? ऐसा लगता है कि भारत में भी तालिबान और अफगानिस्तान का युद्ध चल रहा है। किसी राष्ट्र में पक्ष हो या विपक्ष उसे उनके सत्ता से ज्यादा उसके लिए राष्ट्र होना चाहिए। लेकिन भारत में सरकार हो या विपक्ष उसके लिए सिर्फ और सिर्फ उसका कुर्सी महत्व रखता है। देश के किसी भी राजनीतिक और सामाजिक संगठन के साथ-साथ पत्रकारिका का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र रक्षा होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान परिवेश में जहाँ राजनीतिक के लिए उसका कुर्सी सबकुछ है मिडिया के लिए टीआरपी सबकुछ है। मिलकर एजेंडा चलाया जा रहा है। यही कारण है कि आज सच लिखने वालों के लिए कोई जगह नही है ।

समाज का मुख्य कार्य अपने सभ्यता और संस्कृति को संजोना होता है और जिसके पास में सनातन धर्म की धरोहर हो उसके लिए यह कार्य और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। दो चार सिक्कों के लिए शेख के हाथ बिकना कितना उचित है यह उदाहरण आप तालिबान कों देखकर समझ सकते है। तालिबानी सैनिक किस प्रकार से हथियार डालकर भाग खड़े हुए है। माना जा रहा है कि यह सब प्राईवेट सैनिक थे जो तन्ख्वाह नही देने पर हथियार डालकर भाग रहे है। लेकिन उसका परिणाम क्या हो रहा है यह भी समझने की जरूरत है। अपने औरत बच्चों को भी तालिबानी के हवाले कर दे रहे है। तालिबानी आतंकी उनके साथ क्या करते होंगे यह तो आप सभी जानते ही होंगे।

इसी प्रकार से अगर भारत को भी चंद सिक्कों के लिए छोड़ दिया गया तो जिसके लिए आप धन जमा कर रहे है उसका क्या होगा। आपकों तो यह भी नही पता कि तालिबानी आतंकी सिर्फ उनको नही मार रहे बल्कि उनको भी मार रहे है जो निर्दोष है। छोटी छोटी बच्चियों को उठाकर ले जा रहे है। क्योंकि आतंकियों को तो सिर्फ 72 हूरें चाहिए। आपके मानवता से उसको क्या लेना देना है।

भारत मे कोई विपक्ष नही है इस समय। एक बड़ी पार्टी थी जो कि अपना विश्वास खो चुकी है। हालांकि यह पार्टी जिसका नाम कांग्रेस है कभी भी विश्वास के लायक था ही नही। क्योंकि यह पार्टी नें देश और देश के बहुसंख्यकों के प्रति हमेशा ही घृणा किया है। भारत विभाजन के समय में भी भारत के बहुसंख्यकों नें कांग्रेस पर विश्वास किया था लेकिन उसका परिणाम ये हुआ कि करोड़ो लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। महिलाओं के साथ हत्या बलात्कार जैसी घृणित अपराध हुआ और कांग्रेस पार्टी उस पर मौन रही। उसके बाद भी लगातार तुष्टिकरण करती रही है।

इसके साथ ही देश में बहुत सारे क्षेत्रीय पार्टियों नें जन्म लिया। लेकिन सभी ने अपना स्वार्थ ही सिद्ध किया है। उनके स्वार्थ सिद्धी नें राष्ट्रहित देशहित और समाजहित को बहुत पीछे छोड़ दिया है। भारत के महान इतिहास को पीछे धकेल कर। महाराण प्रताप और वीर शिवाजी को दरकिनार करते हुए अकबर महान का पाठ पढाया गया और मुगलों को प्रेम का प्रतिक बताया गया है। जिस महाराणा की लोक गाथा गुंजायमान है उसको सिर्फ एक पन्ने में सिमट कर रख दिया।

आज विपक्ष के पास मे कोई मुद्दा नही है तो देश विरोध पर उतर आयी है। जिस तालिबानी को भारत ने हमेशा से आतंकी माना है और है भी उसकों भारत के तथाकथित सेक्यूलर समर्थन दे रहे है। भारत में तालिबान जिंदाबाद के नारे लग रहे है और विपक्ष इस पर खामोश है। यह चुप्पी कहीं न कहीं एक समर्थन है।
आज विपक्ष विकास की मुद्दा के लिए लड़ रहा है ऐसा नही है विपक्ष के लिए सिर्फ एक मुद्दा है “मोदी हटाओ योगी हटाओ”। अभी हाल ही में नोएडा प्राधिकरण को लेकर देश के माननीय उच्चतम न्यायालय ने जो कहा वह एक बड़े भ्रष्टाचार के तरफ इशारा है। इसके बाद मौलिक भारत के द्वारा प्रेस वार्ता करके भी एक बड़े भ्रष्ट्राचार होने के लेकर वर्तमान के योगी सरकार और मोदी सरकार को घेरा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर विपक्ष बिल्कुल चुप है। उत्तर प्रदेश के वर्तमान सत्ता में बैठे योगी सरकार पर भी सवाल उठाया गया कि 4 साल होने के बाद भी आखिर जांच रिपोर्ट क्यों नही दिया गया। कहीं न कहीं योगी सरकार में शामिल लोग भी नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे में हुए अनिमियताओं में शामिल हो ऐसा संदेह जताया जा रहा है। क्योंकि सत्ता बदलने के बाद बहुत सारे लोगों नें पार्टी भी बदल लिया है।

महिलाओं के सम्मान को लेकर लड़ने वाली प्रियंका गाँधी भले ही हाथरस जाकर न्याय की मांग की हो लेकर राजस्थान पर चुप्पी साध लेती है। राजनीति में अब विरोध जाति मजहब और स्टेटस देखकर किया जाने लगा है जो कि शर्मनाक है। इजरायल के द्वारा गाजा पट्टी पर हमले के बाद जो लोग बाप बाप चिल्ला रहे थे। मानवाधिकार के दुहाई दे रहे थे वही विपक्ष और लिबरल गैंग बंगाल और अफगानिस्तान को लेकर चुप है। क्योंकि गाजा में मुस्लिम पर हमला किया जा रहा था लेकिन बंगाल में हिंदू पीड़ित था। अफगानिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथी , आतंकी संगठन तालिबान के द्वारा देश के सिया समुदाय के खिलाफ हमला किया जा रहा है। वहाँ पर रहे हिंदू तथा दूसरे लोग जो इस्लाम को मानते है लेकिन कट्टरपंथी नही है उनको भी निशाना बनाया जा रहा है। भारत के इस्लामवादी उनको मुबारकबाद भेजने में व्यस्त है। क्रुरता करने के लिए प्रोत्साहन दे रहा है।

आज भारत के विपक्ष भारत के राष्ट्रीय पार्टी भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार को हटाने के लिए लड़ रही है। उनका पेट्रोल महंगा होने, सस्ता होने के कोई लेना देना नही है। बढ़ते बेरोजगारी से कोई लेना देना नही है। अगर उनको बेरोजगारी से कुछ लेना देना होता तो देश के वामपंथियों के खिलाफ मोर्चा खोलते जो भारत में पहले उद्योग बंद करवाता है युनियन करके और जब लोग बेरोजगार हो जाते है तो उसी को लेकर रोजगार के लिए धरना देते है। देश के समाजवादी नेता आज परिवारवादी बन चुका है। उनके बाद उनके बेटे को सत्ता हस्तांतरण किया जायेगा।

आज देश में मैकाले की शिक्षा पद्धति से लड़ने की जरूरत है। 1961 की पुलिस एक्ट को बदलने की जरूरत है। मैकाले कि शिक्षा पद्धति के कारण ही हम अंग्रेज और मुगल के भाईचारे और उसको महान बताने में लगे है। हमारे गुरुकुल की व्यवस्था ठप्प है और गली-गली में अंग्रेजी स्कूल खोले जा रहे है । आज जरूरत है कि इन स्कूलों कों बंद करके गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आगे बढाने की। लेकिन भारत के विपक्ष इस पर चुप है खासकर जो अपने आप को हनुमान भक्त बताते हो और बाहर जालिदार टोपी पहनकर मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपना रखा हो।

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