विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31मई)

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“विश्व तंबाकू निषेध दिवस” (31 मई )
यह सर्वविदित है कि तंबाकू और इसके अन्य घटक जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटखा के सेवन से अनेक प्रकार के नुकसानदायक बीमारियां होती है । तंबाकू उत्पाद के सेवन को हतोत्साहित करने और इसके बारे में लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर वर्ष 31 मई को पूरे विश्व में “विश्व तंबाकू निषेध दिवस” मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के द्वारा 1987 में की गयी थी। इस दिवस का उद्देश्य तंबाकू सेवन के प्रचार – प्रसार और प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों की ओर सभी हितधारकों का ध्यान आकर्षित करना है, जो वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रूप से तथा इसके अतिरिक्त 10 लाख और मौतों का अप्रत्यक्ष अर्थात पैसिव स्मोकिंग का कारण बनता है। इस वर्ष (2022) विश्व तंबाकू दिवस (31 मई) की थीम है “तंबाकू हमारे पर्यावरण के लिए खतरा” ।

नि:संदेह तंबाकू सेवन/ खपत एक वैश्विक समस्या है। भारत वर्ष में भी नशीले पदार्थ का सेवन एक विषम समस्या है । विभिन्न प्रकार के प्रचलित नशे यथा तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट,शराब, चरस, गाँजा, स्मैक, हेरोइन, कोकीन के वजह से खासकर युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है, घर परिवार उजड़ रहे है, समाज, देश खोखले होते जा रहे हैं। नशे की वजह से दिल, दिमाग और दृष्टि पर बहुत कम नियंत्रण रह पाता है, जिसकी वजह से विभिन्न प्रकार के अपराध जन्म लेते हैं जो कि पुलिस व्यवस्था एवं प्रशासन के लिए एक सिरदर्द होता है ।

तंबाकू सेवन न केवल बहुत से गंभीर बीमारियों की जड़ है, बल्कि इसके सेवन करने वालों द्वारा यत्र-तत्र थूकने से स्वच्छता, पर्यावरण, पर्यटन, व्यापार , देश और समाज की छबि को काफी नकुसान होता है, साथ ही इसके चलते कई संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी डर बना रहता है । डब्ल्यूएचओ के वैबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार विश्व में सिगरेट के उत्पादन हेतु 60 करोड़ पेड़ काट दिये जाते हैं, 22 अरब लीटर पानी का दुरुपयोग होता है । साथ ही, इसके चलते 84 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है, जो पृथ्वी के तापमान को बढ़ाने और प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार है ।

नशा के प्रचार-प्रसार और लोगों द्वारा सेवन किए जाने हेतु मुख्यतया: निम्नलिखित कारण उत्तरदायी है:-
 नशीली वस्तुओं की आसानी से उपलब्धता
 कारगर कानून व्यवस्था का अभाव
 बेरोजगारी
 महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने विफलता
 जिज्ञासा के वशीभूत होकर
 किसी समस्या को भूलने के लिए
 आत्म विश्वास पैदा करने के लिए
 संयुक्त परिवारों का टूटना
 नशे की ओर लुभाने में इंटरनेट के बढ़ती भूमिका
 मौज मस्ती / पीयर प्रेसर के कारणस

समाज को नशा मुक्ति करने हेतु सबसे पहले इसके कारणों का समुचित अध्ययन कर सार्थक समाधान की ओर अग्रसर होना होगा । इसके कारणों की जड़ में मट्ठा डालना होगा ताकि न रहे वांस न बजेगी बांसुरी । आज जरूरत इस बात कि है मादक पदार्थ पैदा करने वाले देशों का, जब तक वे पैदावार बंद नहीं करते बहिष्कार किया जाए तथा इन देशों से व्यवहारिक तथा राजनीतिक संबंध भी खत्म किया जाय । नशीले पदार्थों की पैदावार /बिक्री / सेवन को रोकने के लिए देश में और अधिक कारगर कानून बनाये जायें और इन क़ानूनों का उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए ताकि लोगों में भय पैदा हो तथा इसके साथ ही वे मादक पदार्थों की पैदावार/बिक्री/ सेवन से होने वाले नकुसानों को अच्छी तरह समझ सके । साथ ही, समाज एवं परिवार स्तर पर प्यार व सहयोग की भावना विकसित करनी चाहिए ताकि स्नेहिल वातावरण में खासकर युवा वर्गों में व्याप्त नशा प्रवृति को दूर कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किया जा सके । बच्चों के रचनात्मक कार्यों /खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि वह अंतर्मुखी होने की बजाए सामाजिक रूप से सक्षम बन कर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका अदा कर सके । रोजगारोंमुखी कार्यों की ओर रूचि बढ़ाने हेतु उपयुक्त व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि ज़िंदगी में कुछ सकारात्मक करने का मकसद हासिल हो सके । हर गम को धुएँ में उड़ाने की प्रवृति पर रोक लगानी होगी । नशे के शिकार लोंगों के इलाज के लिए नशा मुक्ति केन्द्रों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए ताकि नशे से प्रभावित लोंगों को इलाज के बाद समुचित मार्गदर्शन देकर समाज की मुख्य धारा में शामिल किया जा सके । साथ ही यह सुनिश्चित करने का प्रयास किए जाने चाहिए कि इलाज के बाद व्यक्ति दुबारा नशे की राह न पकड़ ले ।

प्रवीण कुमार झा

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