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आज विजय दिवस पर विशेष:-

आज विजय दिवस पर विशेष:-
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21 मार्च 1977 को उस समय की कांग्रेसी सरकार के अत्याचारों से देश ने दूसरी आज़ादी प्राप्त की थी। लाखों लोगों को देश भर की जेलों में बंदी बना कर 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक जो यातनाये दी गई उसका आज के दिन ही अंत हुआ था। देश ने 15 अगस्त 1947 के बाद दुबारा आज़ादी की सांस ली। लोकतंत्र के चारों स्तंभो को गुलामी की जंजीरों में जकड़ कर रखने वाले कांग्रेसी आज जब लोकतंत्र का रोना रोते हैं तो सहज ही ह्सी आती है।
विपक्ष के लगभग सभी राजनेताओं को, चाहे वो जनसंघ के थे या वामपंथी, आनंदमार्गी थे या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक ,पंजाब के अकाली दल वाले थे या शिव सैनिक या समाजवादी, चाहे युवा तुर्क के नाम से जाने जाने वाले कांग्रेसी,सभी को आधी रात को घरों में सोते हुए गिरफ्तार कर करके जेलों में डाल दिया गया था। देश भर में इंदिरा की कांग्रेस सरकार ने जो चाहा वो ही अखबारों में छपा। जो चाहा वैसा ही कानूनी फैसला करवाया। भयानक वातावरण बना कर आम आदमी की जिंदगी को जबरन नपुंसक बनाने का काम भी तब की कांग्रेस सरकार ने किया। नाम दिया नसबन्दी का। विरोधियो को झूठे मुकदमो में फंसा कर उनपर थर्ड डिग्री पुलसिया अत्याचार कराने का ठेका तब के रहनुमाओ ने ले रखा था।
इस सारे कालखण्ड का विरोध करने के लिए आर एस एस के 15 से 20 साल के नोजवानो ने बिना किसी बात की परवाह करते हुए सत्याग्रह शुरू किया। एक लाख से ऊपर नोजवान, और बजुर्गो ने गिरफ्तारियां दे कर जैले भर दी।आज के बहुत सारे नेता उसी समय के छात्र आंदोलन और आपातकाल के योद्धा रहे हैं।

पिछले सालों में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में देश भर के लगभग पांच हज़ार से ज्यादा लोकतंत्र सेनानी (आपातकाल 1975-77 के योद्धा) विजय दिवस मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। जिसे संबोधित करने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन जी गडकरी, श्री अनंत कुमार जी, श्री थावर चंद जी ,श्री नरेन्द्रजी तोमर,श्री अर्जुन जी मेघवाल सहित लगभग दरजन भर सांसद भी आये थे।
लोकतंत्र सेनानी संघ देश की भाजपा सहित सभी राजनीतिक पार्टियों से जिनमे लोकतंत्र समर्थक आपातकालीन योद्धा है से मांग करता है कि देश के फ्रीडम फाइटर्स की तरह ही देश की दूसरी आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों को भी उसी तरह की सुविधाएँ प्रदान कर उन का सम्मान करने की घोषणा अपने घोषणा पत्र में शामिल करें। तांकि लोकतंत्र समर्थकों को पूरा सम्मान मिल सके।

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