न नौ मन तेल होगा न टवीन टाॅवर गिराये जायेंगे, प्राधिकरण तो—

दैनिक समाज जागरण

न नौ मन तेल होगा न बिल्डिंग गिराये जायेंगे। फिर वही बात वसूलों की, दिन है या है रात भूलों की। भूल किसकी और भुगत कौन रहा है ? तारीख पर तारीख फिर मिलेगा क्या ?

नोएडा सेक्टर 93 टवीन टावर में मामले भारत के सर्वोच्चय न्यायालय नें जो फैसला सुनाया उसका लगभग तीन महिने के आस-पास होने वाले है। लेकिन प्राधिकरण और बिल्डर टावर को गिराने के लिए किसी भी एजेंसी को अधिकृत नही कर पाये है। जाहिर है कि इस टाॅवर को गिराने में आस-पास में बने फ्लैटों पर भी प्रभाव पड़ेगा। निश्चित तौर पर यह खतरा लेना आम जनमानस के लिए भी ठीक नही है। निश्चित तौर पर एक ऐसी ऐजेंसी का चुनाव करना होगा जो कि आस-पास के फ्लैटों पर बिना प्रभाव डाले ही इस बिल्डिंग को धाराशयी कर सके।
इस बिल्डिग को गिराने के लिए जो डेडलाईन या अंतिम तिथि निर्धारित है वह है 30 नवंबर 2021, अब जबकि बि्ल्डर ने अभी तक किसी एजेंसी को इसका ठेका नही दिया है, निश्चित तौर पर बिल्डर सुपरटेक चाहेगा कि यह बिल्डिंग न गिराया जाया। इसमें उसका कितना नुकसान होगा यह कोई मायने नही रखता है लेकिन अब बिल्डिंग नही गिराया गया तो प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके ये बताने की तैयारी कर रही है कि इसमें बिल्डर की लापरवाही है। कोर्ट में मामला पहुँचेगा, फिर तारीख पर तारीख, लंबे इंतजार के बाद फिर इस मामले में एक फैसला आयेगा। वह भी बिल्डर के पक्ष में।
इन सबके बीच में बिल्डर घर खरीदारों को पैसे देने से बच जायेगा, प्राधिकरण अपने द्वारा किये गए घोर लापरवाही है। फसेगा बेचारा निवेशक जिसने अपने खुन पसीने की कमाई को निवेश किया हुआ है और 2012 से घर के इंतजार में है। न तो इसका प्राधिकरण पर कोई फर्क पड़ता है और नही तो बिल्डर पर। बिल्डिंग नही तोड़े जायेंगे और नही घर खरीदारों के घर मिलेंगे। केस चलने के बाद बिल्डर ये भी कहेगा कि मै घर दूंगा इसी टवीन टावर में क्योंकि पूरा उम्मीद है कि फैसले को पलटा जा सकता है। नही भी पलटा गया तो 10 साल तक तारीख ही तो चलेंगे। फिर उसके बाद एक पीटिशन डाल दिया जायेगा।

अभी तक तीन दौर की बैठक होने के बाद भी कोई एक्शन प्लान नही बना है। आदेश के अनुसार टाॅवर तोड़ने पर आने वाले खर्च को बिल्डर वहन करेगी। बिल्डर चाहेगा कि ऐसा सस्ता एजेंसी ढुंढी जाये। न नौ मन तेल होगा न तो राधा नाचेगी। न तो बिल्डर को कोई ऐसा मिलेगा और नही तो बिल्डिंग टुटेगी।

प्रदेश के योगी सरकार नें आनन फानन मे एक जाँच कमेटी बनायी और जाँच करवाकर रिपोर्ट भी मंगवा ली। कमेटी को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया, कमेटी नें दे भी दिया लेकिन आज तक उस पर क्या कारवाई हुई है यह किसी को नही पता। क्या कार्यवाही करने के लिए सरकार को वर्षा को समय चाहिए। मौलिक भारत के द्वारा बार-बार पूछे जाने के बाद भी किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नही की गई है। ऐसा लगता है कि प्राधिकरण के लापरवाह अधिकारी सरकार से ज्यादा रसूख वाले है, या फिर बिल्डर सरकार को चला रहे है। ऐसे मे निश्चित तौर पर किसी भी प्रकार के एक्शन लेना योगी सरकार के लिए खतरे कि घंटी है। भले ही 2 लाख से ज्यादा घर खरीदार दीपावली सड़क पर मनाये हो उनको घर नही दिया गया हो लेकिन सरकार को तो बिल्डर को खुश रखना ही होगा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़े पैमाने पर घोटाले है जो कि उजागर है लेकिन खेल हम सब साथ-साथ वाली है। एक उंगली उठाओ को चार अपने तरफ उठता है।

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