रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं, खुलकर करें महादान, लोगों को भी करें प्रेरित ।

एक अनजान से खून का रिश्ता बना देता है रक्तदान
नवादा:-(आर्यन मोहन)रक्तदान एक जीवन प्रदान करने वाली गतिविधि है। यही वजह है कि इसे ‘महादान’ कहा जाता है। आपके रक्त की बूंद का हर कतरा किसी के जीवन का स्रोत बन सकता है।ऐसे में देश एवं विश्व के अनेकों नकारात्मक समाचारों के बीच ह्वदय को छू जाने जैसा एक मामला नवादा के सदर अस्पताल में देखने को मिला।दरअसल, हम बात कर रहे हैं नवादा सदर अस्पताल के रक्त बैंक की जिसमें एक ओर भदौनी के निवासी अफजल अली जो सद्भावना चौक पर बैट्री की दुकान चलाते हैं, ज़ेबा वसी जो एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, तो दूसरी ओर शैलू कुमार जो बाल कल्याण समिति में कार्यरत हैं आदि ने स्वेच्छा से एक साथ आकर रक्तदान कर देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को जीवित रखते हुए अस्पताल में जीवन-मृत्यु की बीच लड़ रही एक मरीज की जान बचाया।लैब के तकनीकी सहायक मिथलेश प्रसाद सिन्हा के द्वारा तीनों ही व्यक्तियों को बारी-बारी से प्रोत्साहित किया गया एवं कहा गया कि रक्तदान महादान होता है, परंतु जब यह धर्म-जाति के बंधनों को तोड़कर किया जाता है तो मानवता को जीवित किया जाता है। भारत का वासुधैव कुटुंबकम का नारा और हज़ारों वर्षों का इतिहास इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।बाल कल्याण समिति के शैलू कुमार ने कहा कि शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है और ह्रदय रोग, कैंसर जैसे घातक बीमारियों का खतरा कम होता है।उन्होंने कहा हर समस्या का का कुछ न कुछ विकल्प ढूंढ निकाला गया है। लेकिन ब्लड का कोई विकल्प नहीं है। खून की कमी को केवल ब्लड डोनेशन के द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। इसलिए हर सक्षम व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। जब ब्लड बैंक में रक्त होगा, तभी लोगों की जिंदगी भी बचाई जा सकती है।समाजसेवी ज़ेबा वसी ने कहा कि जब किसी अपने का जीवन खतरे में हो तब रक्त की महत्ता समझ में आती है। आज हमारे द्वारा किया गया रक्तदान किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में सहायक होगा। रक्त के लिए कभी किसी का जीवन समाप्त न हो इस बात की जिम्मेदारी हम सब पर है। कहा कि सभी लोगों को जागरूक करें और समय-समय पर सभी को रक्तदान करना चाहिए।

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