चाय पान की दूकानों पर चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू

विश्वनाथ त्रिपाठी
प्रतापगढ़ {समाज जागरण} विधान सभा चुनाव की घोषणा होते ही चुनावी महफिले सजने लगी | चाय पान की दूकानों पर चुनावी चर्चाएं जोर पकड़ने लगी | गाव हो या फिर सहर, मुहल्ला हो गली जहाँ देखो चार छ लोग बैठ कर आपस मे बहस करते मिल जाएंगे | अपनी मन पसंद पार्टी की चर्चाएं शुरू करते है आपस मे गर्मा गर्मी भी करते हैं |
15 जनवरी तक चुनावी रैलियों पर रोक ने चौपालो के महत्व को और बढ़ा दिया| कही पर लोग बैठ कर जातीय समीकरण की गणित लगाकर पार्टी की बेहतरी का कयास लगा रहे है तो कही पर काम व विकास को मुद्दा बनाकर बहस करते नजर आ रहे है | लोग मत दाताओं के रुख की भी जानकारी पर भी आगे बढने की बात करते है| अपने विचारो मे केवल सपा व भाजपा का तुलनात्मक विचार रखते लोग देखे जा रहे हैं | वैसे रामपुर खास मे काग्रेस की मौजूदा विधायक पर भरोसा जताते लोग नजर आए | कुंडा बाबागंज मे राजा का बोलबाला रहता है लेकिन इसबार बाबागंज बिखरता नजर आ रहा है | प्रतापगढ़ की सात सीटो पर घमासान होने की संभावना है |
कुंडा, बाबागंज व रामपुर के दौरे मे देखा गया कि नव जवान और किसान चुनाव मे बढ़चढ़ कर भाग ले रहा है सबेरे नाश्ते के बाद से ही लोग इधर उधर निकल लेते है और पार्टियो से संबंधित लोग मतदाताओ का दिलटोलने मे लग जाते है |
इस समय लोग आपसी मतभेद भूल कर राम राम करते देखे जा रहे है |जिनके द्वारा सवर्ण उपेक्षित थे आज वही लोग उन बस्तियों का चक्कर लगा रहे है | सलामती पूछ कर फैसला कम करने का प्रयास कर रहे है| चर्चा करते समय लोग इस बात का बाखूबी ध्यान रख रहे है कि आपसी सौहार्द न बिगड़े | संभावित प्रत्यशियों के गुण दोष की भी विवेचन चल रहा है | चुनावी माहौल मे दागी, प्रत्यशियों पर कोई बात करना पसंद नहीं कर रहा है | जागरूकता का भी आलम देखा जा रहा है |मत दाता ज्यादा सरकार है ऐसा लग रहा है इसबार जातीय हवा मे न बह कर ठोस विकास निति पर मतदान करेगा वह दंगे उचक्को से निजात चाहता है |

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