मिड-डे-मील पहुंचाने वाली संस्था भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर गंभीर नहीं है।

रमन का चेहरा खुशी से दमक रहा था।वह डाढ़ा गांव के माध्यमिक विद्यालय का कक्षा 6 का छात्र है।ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी नरेंद्र भूषण ने एक सप्ताह पहले उसके साथ मध्यान्ह भोजन किया था। मैंने भी आज उस और उसके निकट स्थित प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया और मध्यान्ह भोजन का आनंद लिया।आज वहां मध्यान्ह भोजन में दाल चावल आये थे। दोनों ही अधपके थे परंतु स्वाद ठीक था। अध्यापकों ने बताया कि मिड-डे-मील पहुंचाने वाली संस्था भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर गंभीर नहीं है।

अक्सर कम भोजन दे जाते हैं और सब्जी या दाल में सब्जी और दाल ढूंढना किसी चुनौती से कम नहीं तो सप्ताह में एक दिन आने वाले दूध के सफेद रंग को छोड़कर उसमें दूध का कोई और तत्व ढूंढना फॉरेंसिक जांच का विषय हो सकता है।डाढ़ा गांव मेरी दादी का मायका है। इस गांव के लोग बेहद शांतिप्रिय और प्रगतिशील हैं। इस गांव में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना लगभग छः दशक पूर्व 1962 में हुई थी। गांव निवासी और इस विद्यालय में बीस वर्षों तक शिक्षा मित्र रहे राजीव शर्मा ने बताया कि पिछले एक दशक में यहां से पढ़े दो दर्जन से अधिक छात्रों को सरकारी नौकरी हासिल हुई है। खुद राजीव और उनके पिता यहीं से पढ़े हैं। उनके पिता भी अध्यापक हैं और राजीव भी अब सरकारी अध्यापक बन गये हैं।

उन्होंने इस विद्यालय में शिक्षामित्र रहते हुए विभिन्न संस्थानों से छात्रों के लिए फर्नीचर, खाना खाने के बर्तन,आर ओ प्लांट, वाटर कूलर और जरूरी किताबें मांग मांग कर जुटाए हैं। उनकी नियुक्ति जेवर क्षेत्र में है परंतु इस विद्यालय से उनका अनुराग कम नहीं हुआ है। माध्यमिक विद्यालय के अध्यापक मुनीराम भाटी ने बताया कि उनके विद्यालय की टीम ने कबड्डी में जिला विजित किया है और शारीरिक अभ्यास में हमेशा अव्वल रहती है। दोनों विद्यालयों की इमारत ठीक ठाक है परंतु छत से पानी रिसता है। टॉयलेट हैं परंतु उनकी सफाई यदा-कदा ही हो पाती है। प्राधिकरण के सफाईकर्मी तमाम अनुरोध और शिकायतों के बावजूद सफाई करने नहीं आते। पेयजल की समस्या है।

प्राथमिक विद्यालय के पुस्तकालय समेत तीन कमरे जर्जर घोषित हैं। इन सबके बावजूद इन दोनों विद्यालयों में दो सौ इकहत्तर बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और पर्याप्त संख्या में उच्च शिक्षित अध्यापक हैं। प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका चंचल शर्मा, माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनुराधा यादव ने आशा की आंखों में उस दृश्य को याद कर चमक उत्पन्न हो जाती है जब श्री नरेन्द्र भूषण ने एक बच्चे के साथ खाना खाया था।उनका कहना था कि अब इन विद्यालयों की कोई समस्या शेष नहीं रहेगी। आखिर ग्राम पंचायत समाप्त होने के बाद प्राधिकरण ही उनका असल अभिभावक जो बन गया है।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)राजेश बैरागी

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