उच्चतम न्यायालय ने मौलिक भारत की शिकायत पत्र को संज्ञान में लेते हुए उनको “लेटर पिटीशन” किया स्वीकार

नोएडा समाज जागरण 28 सितंबर 2021

देश के सबसे बड़े न्यायालय में उच्चतम न्यायालय ने मौलिक भारत के द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र को “लेटर पिटीसन” स्वीकार कर लिया है। हाल ही में 19 अगस्त 2021 को मौलिक भारत संस्था के द्वारा प्रेस वार्ता कर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में पूर्व से लेकर अभी तक चल रहे अनिमियताओं व अराजकता के संदर्भ में शिकायत राष्ट्रपति कार्यालय, उच्चतम न्यायालय एवं आवास व शहरी विकास मंत्रालय की मुख्यमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश को नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश/ टिप्पणी पर प्रभावी कार्यवाही हेतु 19/08/2021 मांग पत्र योगी आदित्यनाथ जी,माननीय मुख्यमंत्री,उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा था व इस पत्र की प्रति महामहिम राष्ट्रपति महोदय,भारत सरकार, प्रधानमंत्री, भारत सरकार, मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय, आवास व शहरी विकास मंत्री, भारत सरकार, सीएजी भारत सरकार को भेजी थी।

मौलिक भारत के अध्यक्ष अनुज अग्रवाल नें भारत के प्रधान न्यायाधिश उच्चतम न्यायालय के द्वारा मामले को संज्ञान में लेने पर खुशी जाहिर की है और कहा है कि उम्मीद है कि जल्द से जल्द इस पर सुनवाई कर दोषियों को सजा मिलेेंगे। हालाँकि हम यह भी देख रहे है कि प्रदेश सरकार और प्राधिकरण के द्वारा मामले को उतना संवेदनशीलता से नही लिया जा रहा है जितना है। रविवार को आयोजित मौलिक जन संवाद में श्री अग्रवाल ने कहा कि प्राधिकरण के ऊपर इतने सख्त टिप्पणियों के बावजूद आज तक एक चपरासी को भी संस्पेंड नही किया गया है। सरकार नें एसआईटी से जांच कराकर भी रख लिया है, उसके भी कुछ अता-पता नही है ऐसे में माननीय न्यायालय से ही उम्मीद है।

गौतमबुद्धनगर के तीनों प्राधिकरण देश के लिए माॅडल बन चुका है भ्रष्ट्राचार के मामले में । अगर जांच ठीक से किया गया तो 2 लाख करोड़ से ज्यादा की घोटाला सामने आयेगा। यमुना सिटी एक ऐसा प्राधिकरण है जहाँ एक भी इंडस्ट्रीज नही है। 30 हजार लोगों को सस्ते दरों पर जमीन दिया गया लेकिन वहाँ एक भी घर नही है। न जाने किसको आवंटित किया गया और कौन खरीदार है। किसी शहर को बसने मे एक दशक लगता है लेकिन यहाँ तो तीन दशक लगने के बाद भी सब कागजो पर है। ऐसे मे मौलिक भारत के द्वारा लिखे गए पत्र को “लेटर पिटीशन” के तरह स्वीकार करना बहुत ही महत्वपूर्ण है आने वाले दिनों में। हाल ही में मौलिक भारत और बायर्स एसोसिएशन नें मिलकर संयुक्त मोर्चा गठन का ऐलान किया है।

नोएडा स्पोर्टस सिटी में 33 हजार से ज्यादा फ्लैट बायर्स है जिन्होंने बिल्डर को पूरा पैसा दे दिया है। लेकिन बिल्डर नें प्राधिकरण को पैसे नही दिये है इसलिए उनका रजिस्ट्री नही कराया जा सकता है। यानि की उनको अभी और इंतजार करना पड़ेगा। हालाँकि स्पोर्टस सिटी का मामला अपने आप में ही एक बड़ा अनिमियताओं से भरा हुआ है। हाल ही में योगी सरकार नें स्टांप शुल्क में छूट देने का ऐलान तो किया लेकिन इसका फायदा घर खरीदारों को मिलेगा कैसे इसके लिए कोई रोड मैप तैयार नही है। जब रजिस्ट्री होंगे ही नही तो घर खरीदारों को इसका लाभ क्या मिलेगा। आज ही बीजेपी वाले इसको लेकर एक ट्रैेंड चला रहे थे योगी जी ने घर खरीदारों के हित में लिया बड़ा फैसला। ये वही लोग है जिनका खुद का घर भी रजिस्ट्री नही हो पा रहे है क्योंकि बिल्डर नें प्राधिकरण को पैसे नही दिए है।



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