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सुल्तान बलबन और मायावती की समानता

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#सुल्तान_बलबन
शासन काल – 1267- 1285 ईस वी
गुलाम वंश का क्रुर मुगल शासक बहुत बदसूरत था काला कलूटा 3.5 इंच बौना बलबन था , बलबन खुद एक गुलाम था इसलिये उसे आम जन और अधिकारियो से काफी नफरत थी …

1-जब वह दिल्ली के गददी पर बैठा तो उसने सबसे पहले सभी राजकीय अधिकारियो की सुरक्षा कम कर दी ….
2-उसके राजदरबार में कोई भी पुरूष या स्त्री पूर्ण वस्त्र पहन नहीं भाग लेता था केवल वह पूर्ण वस्त्र पहनता नहीं था , स्त्रीयो को सजने संवरने और शृगांर पर रोक लगा दी थी !
3-उसके राजदरबार कोई भी खड़ाऊ या जूता (चमौधा )नहीं पहनता था केवल वही जूता (चमौधा ) पहनता था !
4- उसके राजदरबार कोई भी राजदरबारी या गुप्तचर, संदेशवाहक , युद्धबन्दी गुलाम अपनी बात शुरू करने से पहले घुटनो के बल बैठकर अपने जीभ से सुल्तान के पैरो का अंगूठा चूमते ज़िसको उसने #पैबोसा प्रथा का नाम दिया था !
5- बलबन को हीरे जवाहरत की माला ,मौहर इकठ्ठा करना ,खुद की पेंटिंग बनवानी , विलासता काफी पंसद थी …

#मायावती

1- माया भी अपने पार्टी नेताओ कार्यकर्ताओ को अपने दरबार में नीचे दरी पर बैठाती स्वय ऊँची कुर्सी पर …
2- माया को भी उसके सामने मंच किसी को जुते चप्पल पहनाना पंसद नहीं है किसी भी रैली स्थल के मंच पर केवल वह जूती पहनकर बैठती है !
3- कार्यलय मीटिंग में सभी बसपा नेता अपने जुते उतार कर जाते है ,अपनी बात रखने से पहले माया का पैर छुना अनिवार्य है …
4- माया को भी खुद की मुर्ति बनवाना , नोटो की माला पहनना , विशालकाय विला में रहना काफी पंसद है …
5- माया भी अपने कार्यकर्ता नेता और अधिकारियो से अपनी जूती साफ करानी भी पसंद करती है …

यही समानता है बलबन और मायावती में

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