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*सोशल मीडिया शिविर-2019, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार*

*हमारा शरीर वज्र की भांति होना चाहिए, जो बलहीन होते हैं उनका अस्तित्व मिट जाता है इसलिए बल की उपासना करो। सबसे बड़ा बल है योग बल और योग बल से बढ़ता है आत्म बल, बुद्धि बल, ह्रदय का बल, संवेदनाओं का बल, सामर्थ्य का बल। सबसे पहले स्वयं की ताकत फिर सोशल मीडिया की ताकत, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और पुरे देश के संगठन की ताकत को बढ़ा करके हमें भारत को बलवान बनाना है।*

_अपने उपर, अपने धर्म पर, अपनी संस्कृति पर, अपने पूर्वजों पर गौरव करना सीखो। सबसे बड़े न्याय और समानता की कोई संस्कृति है तो वैदिक सनातन आर्य संस्कृति है।_

*शरीर से बलवान, ह्रदय से श्रद्धावान, मस्तिष्क से प्रज्ञावान, ऐश्वर्य से धनवान और आचरण से चरित्रवान तभी एक महान भारत का निर्माण होगा।*

_संन्यासी को अपने संन्यास धर्म के साथ अपना वेद धर्म, राष्ट्र धर्म, सेवा धर्म और मानव धर्म निभाना चाहिए, यह वेद का उद्घोष है। दुनिया में सबसे ज्यादा फॉलोवर अगर किसी के हों तो वो भारत के संन्यासी के होने चाहिए। उनके पास यदि अधर्म की ताकत है तो हमारे पास में धर्म की, सत्य की, सेवा की ताकत है, भगवान की ताकत है।_

*हमारी संस्कृति के नाम पर जितने झूठे लांछन लगे हैं उन सारे झूठे लांछनों को दूर करने का काम भी सोशल मीडिया के माध्यम से हमको करना है। भारतीय संस्कृति को बहुत बदनाम किया जा रहा है। हमें सोशल मीडिया के माध्यम से अपने धर्म को, अपनी संस्कृति को, अपनी सभ्यता को गौरव दिलाना है।*

_आज अगर करोड़ों लोगों की जुबान पर देश और दुनिया में कपालभाति और अनुलोम-विलोम का, योग का, पतंजलि का नाम आया है तो यह प्रचार की भूमिका है। स्वामी विवेकानंद जी, महर्षि दयानंद जी, शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म का प्रचार किया। गुरु नानक देव जी से लेकर के गुरु गोबिंद सिंह जी तक हमारे गुरुओं ने अपने इस अध्यात्म, हिन्दू धर्म, ऋषि धर्म का प्रचार किया। हमारे सारे ऋषि मुनि प्रचारक थे, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर प्रचारक थे।_

*जितने भी अच्छे कार्य हुए दुनिया में वह अच्छे प्रचार से हुए इसलिए कहते हैं प्रचार की बहुत बड़ी ताकत है लेकिन दुष्प्रचार की उससे भी ज्यादा बड़ी ताकत आज पूरी दुनिया में दिख रही है। भारत के खिलाफ और भारतीय संस्कृति के खिलाफ जो दुष्प्रचार हो रहा है उसका हमें निराकरण और सोशल मीडिया को हथियार बना करके उस दुष्प्रचार को दूर करने की ताकत इकठ्ठी करनी है।*

_हमें अपने प्रचार की ताकत बढ़ानी है। मैंने योग, स्वदेशी, वेद दर्शन, उपनिषदों, संस्कृति का प्रचार किया है। अकेला मैं ही नहीं और भी महापुरुष हैं जिन्होंने अपने देश की सनातन मूल्य का प्रचार न किया होता तो आज यह सनातन हिन्दू वैदिक धर्म इस रूप में नहीं दिखता।_

*लॉजिक सबसे ज्यादा किसी ने सिखाया है, शिक्षा से लेकर के हेल्थ एजुकेशन, इकोनॉमी, पॉलिटिक्स, एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री, जीवन के सारे विज्ञान पिंड और ब्राह्मण के सारे रहस्य, सारे शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र से लेकर के तर्क शास्त्र, राजनीति शास्त्र दुनिया को देने वाला कोई देश है तो वह भारत देश है, नेपाल देश है। यह हमारी वैदिक संस्कृति, वैदिक सभ्यता है।*

*- परम पूज्य स्वामी रामदेव जी*

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