fbpx

हर फिक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया

दुनिया ग़मों का सैलाब है तो आँसू समंदर जिसमें भावनाओं के हर रंग एक एक बूंद में तब्दील होकर अवसाद अथवा असीम ग़मों के सैलाब में बह जाते हैं ।
आनंद बहुत ही सुलझा हुआ शख्श था जो कि बचपन से ही घर परिवार से दूर रहता था और आज एक नए मुकां पर है । उसने जीवन में हर शक्श की तरह् बहुत सी कठिनाइयों का सामना किया और फ़िक्र को धुंए में उडाता चला गया । उसने अपनी मर्जी से नहीं बल्कि दोस्तों के संगत में कुछ बुराइयों को जिंदगी के रूटीन में शामिल कर लिया । जाहिर सी बात है आपके सामने कोई कबाक की पेशकश करे और आप खड़े उसका मुँह देखें तो आप कब तक खुद को रोक पाओगे । आपका भी मन चाहेगा कबाब को चखने का । और किशोरावस्था के बाद युवावस्था तक यही स्थिति बनी रहती है pear group ज्यादा प्रभावी होता है । आनंद के साथ भी ऐसा ही था । हालाँकि उसके घर के अन्य सदस्य बेहद धार्मिक किस्म के थे और मांस मदिरा जैसी चीजों से सख्त नफरत करते थे । घर में पूजा पाठ ,संस्कारों भरा माहौल था किंतु आनंद को कौन समझाए । उम्र के उस दौर में जब हमारे कॉलेज फ्रेंड्स ही हमारा रूटीन deside करते थे । तब घर परिवार का असर थोड़ा सा फीका जरूर पड़ जाता है । आनंद ने कैरियर के शुरुआती दौर में भी काफी संघर्ष किया और अपनी ख्वाहिशों को पूरा किया । घर परिवार की जिम्मेदारियाँ उसके कन्धों पर है । उसने कभी जीवन में हार मानना नहीं सीखा शायद इसलिए वो आज मानसिक और बौद्धिक स्तर पर बेहद मजबूत है । और फ़िक्र ,चिंता में डूबे अन्य लोगो के लिए जो उसके निकटतम हैं , उनके लिए एक बैसाखी है जो अपने मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर बड़े ही सरल तरीके से हर समस्या का हल निकालने में धुरंधर है ।
हालाँकि कोई भी यह नहीं चाहेगा कि वह अपंग की तरह दूसरों के सलाहों की बैसाखी को आजमाएं लेकिन जब कोई उस बैसाखी पर चलने की इच्छा रखता है तो या तो वो पूरी तरह से अपनी इच्छाशक्ति खो चुका होगा अथवा वह सामने वाले पर खुद से ज्यादा भरोसा करता है । आनंद की यह खासियत सबसे भिन्न थी , उस वृक्ष की तरह जो हर तरह के आंधी तूफानों ,चक्रवातों का सामना करते हुए अपनी जगह पर निडरता और अदब से खड़ा रहता है ।
फिक्र क्या है यह हमारे कमजोर मानसिक स्थिति की दयनीय अवस्था है जो मजबूत इच्छा शक्ति के आगे पंगु है । समाज में ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने फ़िक्र को धुंए में उड़ा दिया । और बढ़ते रहे अनंत क्षितिज की अनंत यात्रा पर । यही जीवन है यही सार है । —————-

23/01/2020
गायत्री शर्मा

Please follow and like us:
%d bloggers like this: