औद्योगिक सेक्टर को कमर्शियल बनाने के लिए क्या नीति अपना रही है नोएडा प्राधिकरण

समाज जागरण नोएडा

नोएडा उत्तर प्रदेश के आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ स्मार्ट सिटी के दौर में भी प्रदेश में नंबर 1 पर है। दिल्ली से सटे होने और दिल्ली एनसीआर के हिस्सा होने से इसका महत्व और भी बढ़ जाते है। नोएडा जिसका नाम है न्यू ओखला इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट आर्थारिटी। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह एक औद्योगिक शहर है। दिल्ली से भीड़ भाड़ को कम करने के लिए नोएडा को बसाया गया। लेकिन यह कहना होगा कि दिल्ली से सिर्फ इंडस्ट्रीज ही नही शिफ्ट किया गया बल्कि बड़े पैमाने पर अतिक्रमण भी शिफ्ट हुआ। आज नोएडा इंडस्ट्रीज से ज्यादा आवासीय और व्यवसायिक केन्द्र बनकर उभरा है। नोएडा को स्मार्ट बनाने के जहाँ एक तरफ आम जनता टैक्सपेयर के पैसों को पानी के तरफ बहाया जा रहा है वही दूसरी तरफ अतिक्रमण भी मुंह फैलाया दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे है।

नोएडा में कई सेक्टर जो कि विशेष तौर पर औद्योगिक गतिविधियों के लिए तैयारी किया गया वह आज अतिक्रमण का शिकार होकर आवासीय और व्यवसायिक हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर नोएडा सेक्टर 8,9,10 को भी ले सकते है। नोएडा सेक्टर 8 में जहाँ एक तरफ एक बड़ा झुग्गी बना हुआ है और उसके चारों तरफ लगी दुकानों से लगता ही नही है कि यह कोई औद्योंगिक क्षेत्र है। इसी प्रकार से सेक्टर 9 और 10 में भी तमाम तरह के अतिक्रमण है।
नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता नें औद्योगिक विकास मंत्री को पत्र लिखकर सरकार और प्राधिकरण से जबाब मांगी है। उनका कहना है कि आखिर नोएडा के इन क्षेत्रों को जिसे विशेष तौर पर औद्योंगिक क्रियाकलाप के लिए विकसित किया गया था उसको किस आधार पर व्यवसायिक गतिविधियों मे शामिल किया गया है ? क्या इसके लिए प्राधिकरण से अनुमति लिए गए है या फिर यह सब भी ग्रेटर नोएडा मे भूमि आवंटन की तरफ ही किया जा रहा है। जिस प्रकार से वहाँ पर औद्योंगिक भूमि को आवासीय बनाकर सरकार के साथ साथ बिल्डरों नें आम घर खरीदारों को भी लूटा है।

श्री गर्ग नें सरकार और प्राधिकरण से कई सवाल पूछे है : हमारी उत्तर प्रदेश की सरकार और हमारे प्राधिकरण नोएडा ने हमारे शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारी सार्वजनिक धन खर्च किया है और प्राधिकरण नोएडा को “स्वच्छ नोएडा मिशन” के तहत कई पुरस्कार मिले हैं। यह काबिले तारीफ है। लेकिन नोएडा के किस सेक्टर में सर्वे किए गए है यह नही बताया गया है। पिछले 30 से अधिक वर्षों से, मुख्य रूप से हमने देखा कि 2-3 औद्योगिक क्षेत्रों ने औद्योगिक नीति के मानदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। क्योंकि भूखंडों / इकाइयों का उपयोग औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाना था लेकिन आवंटियों को अर्ध-वाणिज्यिक में इन क्षेत्रों में परिवर्तित किया गया है जैसा कि देखने में लगता है। अगर ऐसा किया गया है तो यह एक अवैध गतिविधि है और इसके लिए क्या नियम अपनाये गए है।

1. वह लेकिन हमारा सवाल यह है कि क्या प्राधिकरण ने इन क्षेत्रों के रूपांतरण और नियमितीकरण के लिए कोई ठोस नीति तैयार करने के लिए कोई सक्रिय दृष्टिकोण और पहल की है, जो कि अर्ध-वाणिज्यिक या पूर्ण रूप से व्यावसायीकरण उद्देश्यों के लिए है? यदि नहीं तो उसके पीछे कारण क्या है और कौन जिम्मेदार और जवाबदेह है?

2. इसलिए अब हम कह सकते हैं कि यह औद्योगिक इकाइयों / भूखंडों के आवंटियों द्वारा 100% अवैध गतिविधि में शामिल कर लिया गया है। लेकिन इसके पीछे क्या कारण है यानी इन सभी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह कौन है? इन आवंटियों के साथ अधिकारियों नौकरशाही और राजनेताओं की सांठगांठ से भ्रष्टाचार और अनियमितता एकमात्र जवाब है। समय-समय पर उन्होंने भ्रष्टाचार के पैसे एकत्र किए और इस समस्या के समाधान और समाधान के लिए कोई सक्रिय दृष्टिकोण और पहल नहीं की।
अब जबकि आधा से ज्यादा सेक्टर औद्योगिक के बजाय व्यवसायिक गतिविधियों में लिप्त है, ऐसे में प्राधिकरण और सरकार को चाहिए कि सेक्टर को पूर्णरूप से व्यवसायिक सेक्टर घोषित करे। इसके साथ ही व्यवसायिक सेक्टर के हिसाब से सेक्टर को विकसित करे जिस प्रकार से दिल्ली को चांदनी चौक को विकसित किया गया है। प्राधिकरण व्यवसायिक सेक्टर के हिसाब से शुल्क चार्ज करे और जो बिजली अभी औद्योगिक सेक्टर होने के कारण सस्ती दर पर दिए जा रहे है उसको भी कमर्शियल में कन्वर्ट करे। प्राप्त आय से सेक्टर की विकास करना चाहिए।

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