शतचंडी महायज्ञ का हवन पूजन के साथ हुआ समापन


मछरेहटा / सीतापुर । विश्व मे एकमात्र भारतीय सनातन संस्कृति ही है जो वसुधैव कुटुम्बकम का उद्घोष करती हुई प्राणीमात्र के कल्याण का पाठ पढ़ाती है । यह भारतवर्ष को ही श्रेय प्राप्त है कि जब दुनिया मे अज्ञान रूपी अंधकार छाया हुआ था तब इस धरती पर वेदों के मंत्र गुंजायमान हो रहे थे । अहिंसा परमो धर्म : का संदेश यहीं से संपूर्ण विश्व मे प्रसारित हुआ । अनेक देवी देवताओं की पूजा-अर्चना विभिन्न विचारधाराएं धर्म संस्कृति के होते हुए भी एकता हमारी विलक्षण पहचान है जिसके बलबूते पर ही आज विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप मे हमारी प्रतिष्ठा है । यज्ञ हवन पूजन हमारी सनातन संस्कृति की अनुपम धरोहर है जिसके संरक्षण की अहम जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी के कंधों पर है – उक्त विचार मछरेहटा क्षेत्र के ग्राम केसरा मे शतचंडी महायज्ञ के समापन अवसर पर मुख्य संरक्षक महंत प्रीतमदास ने व्यक्त किए । महायज्ञ के संयोजक संजय राठौर ने बताया कि सप्ताह भर चले इस कार्यक्रम मे जहां एक ओर विभिन्न झांकियों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन हुआ वहीं दूसरी ओर कथाव्यास रामू पंडित ने अनेक पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से भक्ति की रसधारा बहाई और जनता जनार्दन को भगवान का भजन करते हुए सुखमय जीवन जीने का संदेश दिया । यज्ञाचार्य रामलखन तिवारी के नेतृत्व मे विधि विधान से हवन संपन्न हुआ । इस विशाल आयोजन को संपन्न कराने मे विश्रामलाल राठौर ब्रजेश मिश्रा मोलहे राठौर अजेन्द्र त्रिवेदी बटेश्वर राठौर मनोज राजवंशी सुरेश रामकिशोर मौर्य सहित सभी कमेटी के सदस्य और ग्राम वासियों ने अपना भरपूर सहयोग दिया । कार्यक्रम के अंत मे विशाल कन्याभोज और भण्डारे का आयोजन हुआ ।व्यास मंच का सफल संचालन बाबा निर्मलदास ने किया ।

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