तीनो प्राधिकरण पर तीखी टिप्पणियाँ, नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है इसकी आंख, कान नाक और यहाँ तक की चेहरे से भ्रष्ट्राचार टपकता है।

तीनो प्राधिकरण के कारनामें और घोटालो पर भले ही योगी सरकार चुपी साध रखी हो लेकिन माननीय सुप्रिम कोर्ट ने इस पर एक सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है। इसके आंख, कान और नाक ही नही अपितु इसके चेहरे से भी भ्रष्ट्राचार टपकता है। यह टिप्पणी माननीय न्यायलय ने मौलिक भारत के उन आरोपो की पुष्टि करते हुए की है। जिसमें सिर्फ नोएडा में ही नही बल्कि तीनों प्राधिकरण मे बड़े घोटाले का आरोप लगाया गया है। नोएडा में एमराल्ड कोर्ट के टवीन टावर एपेक्स और सियान के मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की गयी।

मौलिक भारत नें नोएडा प्राधिकरण ही नही बल्कि ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण को लेकर आरोप लगाया था कि यहाँ पर बड़े पैमाने पर भूमि आवंटन में अनिमियताएँ की गयी है। अगस्त 2019 में मौलिक भारत के द्वारा एक प्रेस कांफ्रेस करके तीनों प्राधिकरण पर आरोप लगाया था। प्राधिकरण के काले कारनामों व घोटालों के लिस्ट जो कि 300 पेज का था, भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रिम कोर्ट व उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा। लेकिन प्रदेश के योगी सरकार ने आज तक इस पर कोई संज्ञान नही लिया । जबकि मार्च 2020 मे भारत के राष्ट्रपति नें संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार को मामले की जांच करके मौलिक भारत को सूचित करने के आदेश दिये। किन्तु प्रदेश सरकार राजनीतिक सांठगांठ करके आज तक मामले पर चुपी साधा हुआ है। आज तक न तो कोई जांच की गयी है और नही तो मौलिक भारत को कोई सूचना दी गयी है।

इस भ्रष्ट्राचार में लिप्त तीनो प्राधिकरण जो कि भ्रष्ट्राचार में पीएचडी है। लगातार खबर छपने के बाद भी कोई परवाह किये बगैर, हर कश आगे की ओर बढता ही गया। प्रदेश में राजनीतिक चुपी भी इसका एक बड़ा कारण रहा है। भले ही दोनों विपक्षी पार्टी सपा और बसपा प्रदेश में अपनी मौजूदगी जताती रही हो लेकिन सच तो यह है कि यह मौजूदगी खामोशी में सिर्फ खर्राटे भरने जैसे ही है। इससे किसी को ज्यादा फर्क नही पड़ता है। आखिर नींद से सोए भी क्यो नही सरकार को जगाने का नुकसान शायद उनको चुप रहने को मजबूर कर दिया है। क्योंकि मौलिक भारत जिस समय में हुए घोटालो की बात कर रही है वह सपा और बसप के समय की बतायी जा रही है।

“भ्रष्टाचार मुक्त भारत या भ्रष्ट्राचार युक्त भारत” प्रदेश में योगी सरकार को आये 4 साल से ज्यादा हो चुके है। आने वाले 2022 मे एक बार फिर से योगी को ईमानदारी और विकास के कसौटी पर कसा जाना बांकि है। क्योंकि इस बार प्रदेश के चेहरा योगी आदित्यनाथ ही रहने वाले है। ऐसा में माननीय न्यायलय की यह टिप्पणी कही न कही उनके छवि पर दाग लगाने जैसी जरुर है। संयासी से सत्ता से ज्यादा उसकी कर्मठता और सत्यनिष्ठा को परखा जाता है। लेकिन योगी सरकार नें जिस प्रकार से जांच को दबाकर अपने ही छवि को धुमिल किया है उसकी तो अपेक्षा किसी ने नही की होगी।

क्या प्रदेश में भ्रष्टाचार पर राजनीतिक गठबंधन है।
हिंदी फिल्म की एक गाना है। तुम चुप रहो हम चुप रहे, क्या कहना है क्या सुनना है।। दिल सुन रहा और दिल कह रहा है। समय का यह धारा थम सा गया है। प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही है, विपक्ष इसलिए चुप है क्योंकि उसके शासनकाल की सारा घोटाला है, अगर राज खुलने लगे तो नुकसान तो उन्ही दोनों पार्टी के मुखिया को होने वाला है। दूसरी तरफ कुछ लोग सरकार कोई भी हो लेकिन अपना बिजनस चलाते रहते है, जो सत्ता आये उसी में मिल जाओं। अब पार्टी मे मिलने के लिए निश्चित ही चंदा की बड़ी रकम दी जाती है। राज्यसभा के कुर्सी ऐसे ही थोड़े मिलते है सुना है 100 करोड़ देने पड़ते है। 100 करोड़ देने वाले दाता हजार करोड़ की व्यवस्था तो अवश्य ही करता होगा। यही मजबूरी ही कि प्रदेश के योगी सरकार सीएजी रिपोर्ट को सामने नही लाना चाहती है।

नोएडा में लाखो घर खरीदार मारे मारे फिर रहे है और बिल्डर प्राधिकरण के अफसर के साथ बैठकर चाय पी रहे है, जिस पर 3 सौ करोड़ की बकाया है। हाल में आयी एक खबर के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट होल्ड है जो कि पूरे देश की 52% प्रतिशत से ज्यादा है। कुल मिलाकर 86463 करोड़ मूल्य की मकान पेंडिंग है। जिसमें से अधिकतर मकान 2014 से पहले से लटका पड़ा है। सबका साथ सबका विकास करने वाली मोदी सरकार और योगी सरकार भले ही ग्रामीण एरिया में घर बना रही है लेकिन दिल्ली एनसीआर के लाखो घर खरीदारों को न्याय देने में नाकाम रही है। जिसका कारण है बिल्डर लाँबी का सरकार में घुसपैठ।

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