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*एक बहू ने अपने मन की बात कही*

*हम हमेशा घर के कामों में बिजी रहते थे* पर
*ससुर जी रोज हमे बुला बुला कर कहते थे*
*बहू मेरा चश्मा नही मिल रहा है,कभी कुछ कभी कुछ मांगते रहते थे*
*एक बार हमने अनसुनी कर दी और हम कुछ भी नही सुनते थे*
*अचानक बीमार हुए और उनकी मौत हो गयी*
*जब मे ससुर के रूम की साफ-सफाई करने लगी तो मुझे वहाँ पर ससुर के हाथो लिखी डायरी मिली*
*जब मैने वो डायरी पड़ी तो आखों मे आँसू निकल आये*
*उसमे लिखा था कि मेरे बेटे और बहू घर के कामों में इतने बिजी रहते थे* कि
*मै जान बुझकर अपना चश्मा यहाँ वहाँ रख देता था ताकि वो मेरे पास आए और मे उन्हे आशीर्वाद दे सकूं*
*कई बार हम बड़ो की बाते समझ नही पाते ,वो हमे तकलीफ नही देना चाहते*

*वो हमे आशीर्वाद देना चाहते है , अगर घर मे बड़े है तो*
*उनसे रोज मिलो , और उनके पांव छू कर आशीर्वाद लो*

*यही आशीर्वाद आप के भाग्य को बदल देगे*
:
*इसमे कोई दो राय नहीं है क्योंकि भगवान का दिया हुआ बदल सकता है* लेक़िन
*माँ-पिता का दिया हुआ भगवान को भी पूरा करना पड़ता है*
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

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