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*सभी देशवासियों को होली की शुभकामनाएं, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार*

*यह होली का पर्व जो मूलतः हमारे सनातन आर्य हिन्दू वैदिक परम्परा में यज्ञ का पर्व है। योग और यज्ञ हमारी संस्कृति के प्राण तत्व हैं। हमारी होली और दीवाली मूलतः हमारे जो पर्व हैं वो यज्ञों के साथ जुड़े हुए हैं। हमारे जीवन में जो अपूर्णताएं हैं, जो उनको पूरा करदे वो पर्व है। हमारे जीवन की अपूर्णताएं दूर हो जाएं, दुर्बलताएं दूर हो जाएं इसके लिए हम पर्व मनाते हैं।*

_शुभ के मार्ग पर, धर्म, सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ते जाएं और और योग के रंग में, देशभक्ति, प्रभु भक्ति, प्रेम, पुरुषार्थ के रंग में, जीवन में जितने भी अच्छे रंग ढंग हैं उसमें हम रंग जाएं, बदरंग न हो हमारा जीवन इसलिए इस अर्थ में यह रंगोत्सव भी है।_

*हमारे जीवन में सभी प्रकार की पवित्रताएं, दिव्यताएं और हमारा जीवन भी दिव्य रंगों से भर जाए इस रूप में यह रंगोत्सव है। त्योहारों में भी केमिकल्स ने हर जगह जहर भर दिया है। हम न्याय नहीं कर रहे हैं अपने पर्व त्योहारों के प्रति, आओ अब ऐसी सात्विकता से, दिव्यता से, पवित्रता से पर्व मनाएं कि हम सबका जीवन उत्सव बन जाएं।*

_यह पर्व हमारे जीवन में पूर्णता लाने के लिए होते हैं, हमारी अपूर्णताओं को, हमारी दुर्बलताओं को दूर करने के लिए होते हैं। हम योग के रंग में, आयुर्वेद, स्वदेशी, वेदों, ऋषियों के ज्ञान और सब दिव्यताओं के रंग में रंग जाएं उसके लिए आज हम होली का यह पर्व पूरे उत्साह से मनाएं।_

*- परम पूज्य स्वामी जी*

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