रमेश कृष्णन जन्म- 5 जून, 1961 भारत के प्रसिद्ध टेनिस प्रशिक्षक और पूर्व टेनिस खिलाड़ी हैं।

रमेश कृष्णन जन्म- 5 जून, 1961, चैन्नई) भारत के प्रसिद्ध टेनिस प्रशिक्षक और पूर्व टेनिस खिलाड़ी हैं। 1970 के दशक के अंत में कनिष्ठ खिलाड़ी के रूप में इन्होंने विंबल्डन और फ्रेंच ओपन में पुरुष एकल का खिताब जीता था। वर्ष 1980 के दशक में तीन ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचे और डेविस कप टीम में भी फ़ाइनल तक पहुंचे थे। रमेश कृष्णन 2007 में भारत के डैविस कप कप्तान रहे थे। ये रामनाथन कृष्णन के पुत्र हैं, जो भारत के प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी रहे हैं। इन्हें 1998 में भारत सरकार ने ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया था।

परिचय
रमेश कृष्णन का जन्म 5 जून, सन 1961 को चैन्नई, भारत में हुआ था। इनके पिता रामनाथन कृष्णन भी प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी रहे। रमेश कृष्णन ने अपने पिता की भांति भारत को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई। उन्होंने अपने पिता का अनुसरण करते हुए 1979 में जूनियर विंबलडन चैंपियनशिप जीत थी। जूनियर फ्रेंच टाइटल जीतकर वे नंबर एक जूनियर खिलाड़ी बन गए।[1]

कॅरियर
सीनियर स्तर पर भी रमेश कृष्णन 1986 में विंबलडन में क्वार्टर फ़ाइनल तथा 1981 तथा 1987 में यू.एस. ओपन के क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुँचे थे।
रमेश कृष्णन का डेविस कप का रिकॉर्ड भी प्रशंसनीय रहा है। 1987 में भारत रमेश कृष्णन के योगदान से ही तीसरी बार डेविस कप के फ़ाइनल तक पहुंचा था। इस प्रतियोगिता में ऑस्ट्रेलिया के अति अनुभवी वली मसूर को सीधे सेटों में हराकर वे निर्णायक स्थिति तक पहुंच गए थे।
1992 में बार्सिलोना ओलंपिक खेलों में रमेश कृष्णन भारत के लिएंडर पेस के साथ जोड़ी बनाकर पुरुषों की डबल्स प्रतियोगिता में खेले और क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचे। ए.टी.पी. टूर में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहने के कारण रमेश कृष्णन 1985 में विश्व में एकल रैंकिंग में 23वां स्थान प्राप्त कर सके।
उपलब्धियाँ
रमेश कृष्णन द्वारा अर्जित की गईं प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं-

1979 में रमेश कृष्णन ने विबंलडन खिताब जीता।
जूनियर फ्रेंच टाइटल जीतकर वे विश्व रैंकिंग में नम्बर एक जूनियर खिलाड़ी बने थे।
1986 में विबंलडन में रमेश कृष्णन क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचे।
1987 में ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध खिलाड़ी वली मसूर को हराया।
1992 में बार्सिलोना ओलंपिक में युगल मुकाबले में खेलते हुए क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचे।

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