राम मंदिर की नींव पर खर्च हो चुके दो सौ करोड़*

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#अयोध्या राम मंदिर की नींव बनाने में अब तक दो सौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इससे नींव की ढलाई हो चुकी है। अब नींव के ऊपर राफ्ट की ढलाई का कार्य चल रहा है। हालांकि अभी राफ्ट निर्माण का अंतिम चरण चल रहा है।
इसी माह के अंत तक मंदिर निर्माण का तीसरा चरण प्रारंभ हो जाएगा। ट्रस्ट के अनुसार मंदिर निर्माण पर कुल 11 सौ करोड़ खर्च होने है, जबकि लगभग तीन हजार सात सौ करोड़ रुपये मिल चुके हैं। यह धनराशि पीएनबी, एसबीआई व बैंक आफ बड़ौदा के श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में जमा है। अब तक हुए खर्च से ही रामजन्म भूमि पर 50 फीट नीचे से 48 लेयर की नींव तैयार हुई। इसकी ढलाई भी उच्चकोटि के इंजीनियर्ड फिल्ड मटीरियल से की गई है। नींव को पांच फीट मोटी एक और सतह से युक्त किया गया है। यह राफ्ट के रूप में है। राफ्टिग में कंक्रीट, विशेष किस्म की सीमेंट, पत्थरों का पाउडर आदि के मिश्रण का प्रयोग हुआ है, जिसकी मजबूती असंदिग्ध है।
कार्यदायी संस्था ने प्लिथ निर्माण की तैयारी पूरी कर ली। पत्थरों को लिफ्ट करने के लिए दो टावर क्रेन स्थापित हो चुके हैं। इसके लिए तीस हजार घन फीट पत्थर बेंगलुरू से तथा तकरीबन 35 हजार घन फीट पत्थर मिर्जापुर से पहुंच चुके हैं। इसमें कुल पांच लाख घन फीट पत्थर का प्रयोग होना है। दो चरणों में पूरा होगा सूर्यकुंड के कायाकल्प का कार्य
सूर्यकुंड के पुनरुद्धार का कार्य आरंभ हो चुका है। रामनगरी सूर्यकुंड सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सूर्यकुंड के कायाकल्प का कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। विकास प्राधिकरण सूर्यकुंड का पुनर्विकास करा रहा है, जिस पर पहले चरण में 28 करोड़ रुपये व्यय होगा। इसमें मंदिर की सीढि़यों के साथ बाउंड्रीवाल, शौचालय एवं अन्य जनसुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
अयोध्या में सूर्य उपासना के आदिकेंद्र के रूप में प्रतिष्ठित सूर्यकुंड को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। भगवान राम सूर्यवंशी थे, इसलिए सूर्यदेव की आराधना का यह प्राचीन धर्मस्थल श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बिदु है। रामनगरी के समग्र विकास को लेकर बनाए गए विजन डाक्यूमेंट में भी सूर्यकुंड के विकास का ²ष्टिकोण शामिल किया गया है। सूर्यकुंड के विकास में वास्तु शास्त्रियों की भी राय शामिल की गई है। यह मंदिर दर्शननगर कस्बे में स्थापित है। इस कुंड का निर्माण अयोध्या के पूर्व राजा दर्शन सिंह ने करावाया था, जिनके नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम भी दर्शननगर पड़ा है। प्रतिवर्ष भाद्र मास में यहां मेला लगता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। सूर्यकुंड मंदिर पक्के घाटों से सज्जित स्थापत्य का एक सुंदर उदाहरण है, जिसे संरक्षित करने की दिशा में पुनर्विकास का कार्य आरंभ किया गया है। कायाकल्प की योजना में यहां विपश्यना केंद्र, थीम आधारित बाउंड्री, नवग्रह वाटिका, कुंड के भीतर वाटर फिलटरेशन प्लांट, म्यूजिक एंड साउंड सिस्टम, पार्क, वाकिग ट्रैक, प्रसाधन ब्लाक आदि का निर्माण किया जाएगा। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह का कहना है कि सूर्यकुंड रामनगरी के महत्वपूर्ण पौराणिक स्थलों में है। सूर्यकुंड का विकास कार्य आरंभ कर दिया गया है।

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