राख उठान को लेकर ग्रामीण व थर्मल प्लांट प्रबंधन आमने-सामने

ग्रामीणों ने थर्मल गेट पर ताला लगाकर किया धरना शुरू

ग्रामीणों और थर्मल प्लांट प्रबंधन का मामला सुलझाने पहुंचे बरवाला के अधिकारी, बात सिरे नहीं चढ़ी

हिसार (राजेश सलूजा)। बरवाला के निकटवर्ती गांव खेदड़ में बने राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट की राख को लेकर थर्मल प्रबंधन और ग्रामीणों में तनातनी हो गई है। थर्मल प्रबंधन राख को टेंडर लगाना चाहता है। वहीं ग्रामीण टेंडर के विरोध में उतर आए हैं। ग्रामीणों ने ऐश प्लांट के गेट को ताला लगाकर धरना शुरू कर दिया। धरने की सूचना मिलने पर बरवाला के प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए और ग्रामीणों व थर्मल प्रबंधन के बीच सुलह के प्रयास शुरू किए। थर्मल पावर प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों के विरोध के कारण करोड़ों का नुकसान हो सकता है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि राख के उठान से जो आमदनी हो रही थी, वह गांव खेदड़ की गौशाला पर खर्च हो रही है। ऐसे में यदि राख उठान का कार्य टेंडर के माध्यम से दे दिया जाएगा तो गौशाला में मौजूद सैंकड़ों की संख्या में गोधन के पालन पोषण करने का संकट आ जाएगा। उधर मामला पुलिस तक भी पहुंच गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि थर्मल प्लांट से राख उठाने का कार्य गोशाला की कमेटी द्वारा किया जा रहा है। राख उठान के लिए गोशाला कमेटी ने करोड़ों रुपये खर्च कर मशीनें, ट्रैक्टर व पानी के टैंकर खरीदे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि थर्मल प्लांट प्रबंधन द्वारा 20 रुपये टन के हिसाब से गोशाला कमेटी को दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य के लिए गोशाला कमेटी ने लाखों रुपये खर्च कर एक मशीन तो अभी कुछ दिन पहले ही खरीदी थी। ग्रामीणों की मांग है कि राख उठान का कार्य गोशाला कमेटी से ही करवाया जाए ताकि उठान कार्य से मिलने वाली राशि को गोशाला में रखे गए पशुओं का पेट भरने में किसी तरह की कोई परेशानी न आए। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला में एक हजार से ज्यादा गऊएं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब थर्मल के पास राख उठाने का कोई प्रबंध नहीं था और थर्मल की राख से ग्रामीण परेशान थे तो थर्मल प्लांट प्रबंधन पर गांव पर ही राख उठान की जिम्मेदारी सौंपी थी और अब जब कई साल से राख उठान का कार्य गोशाला करती आ रही है तो थर्मल प्लांट प्रबंधन इसका टेंडर लगाने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब थर्मल प्रबंधन के पास कोई व्यवस्था नहीं थी तो गौशाला कमेटी ने व्यवस्था संभाली थी इसी के लिए थर्मल प्रशासन की सहमति से ही लाखों करोड़ों रुपए की मशीनें खरीदी गई जो कि अब वेस्ट हो जाएंगी और गौशाला घाटे में चली जाएगी यदि ऐसा होता है तो 1000 गायों का पालन पोषण कैसे होगा। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक राख उठान का कार्य पुन: गोशाला कमेटी से शुरू नहीं करवाया जाता तब तक धरना जारी रहेगा।

एसडीएम व तसीलदार मौके पर पहुंचे
ग्रामीणों द्वारा थर्मल गेट पर ताला लगाकर धरना देने की सूचना मिलने पर बरवाला के एसडीएम व तसीलदार मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की एक कमेटी व थर्मल प्लांट के अधिकारियों के साथ बैठक कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ पाई। ग्रामीण जहां राख उठाने का कार्य गोशाला कमेटी से करवाने की मांग कर रहे थे, वहीं थर्मल प्रबंधन इस कार्य का टेंडर की बात कर रहा था।

उधर थर्मल पावर प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों के गेट बंद कर धरना देने से काफी नुकसान हो सकता है। थर्मल प्लांट के अधिकारियों द्वारा तोडफोड़ की आशंका व्यक्त की है। अधिकारियों का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान जब राज्य पहले से ही बिजली की कमी से जूझ रहा है, तब बिजली के लिए उत्पादन बाधित होने से भारी समस्या खड़ी हो सकती है। ग्रामीणों के विरोध के कारण खेदड़ थर्मल में बिजली उत्पादन में भी बाधा आने की संभावना है।

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