“आतंकवाद से भी खतरनाक जातिवाद-9”

काकाजी! कल आपने, गांधी और नेहरू के मिलीभगत ने, विभाजित भारत के हिंदूओं को,किस तरह मूर्ख बनाया ,इसका बिलकुल व्यवहारिक चिट्ठा सामने रख दिया! लेकिन एक बात समझ में नहीं आयी कि जब सरदार पटेल को प्रधानमंत्री के रूप में चुनाव कर लिया गया था तो गांधीजी, नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने की जिद्द क्यों किये ! — मास्टर साहब वाजिब प्रश्न खड़ा किये!

मास्टर साहब, 29 अप्रैल 1946 को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में अध्यक्ष का चुनाव था जो कुछ महिनों बाद अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री बनता जिसमें गांधी, नेहरू, पटेल, कृपलानी, राजेन्द्र प्रसाद, अब्दुल गफ्फार खान जैसे लोग थे! अध्यक्ष का चुनाव,15 प्रांतीय कांग्रेस कमिटियां वोट करके करती थी ! अध्यक्ष के लिए वोटिंग में,15 में से 12 पटेलजी को और शेष 3 ने आचार्य कृपलानी एवं पट्टाभि सीतारमैया को प्रस्तावित कीं! नेहरू को कोई नहीं चाहा लेकिन, गांधी अलोकतांत्रिक तरिके से तानाशाही रवईया दिखाते हुए नेहरू के चुनाव की जिद्द किये तो गांधीजी के सम्मान में सबने स्वीकार कर लिया लेकिन वे नहीं जानते थे कि इसके पीछे गांधी,नेहरू तथा अंग्रेजों की मिलीभगत थी ! मुस्लिम लीग के जिन्ना और नेहरू की वार्ता पर विभाजन की रुपरेखा तय होनी थी जबकि इस वार्ता के लिए पटेलजी सबसे अधिक उपयुक्त थे! इस बीच सोचीं समझी प्लानिंग के तहत, नेहरू ने प्रेसवार्तान में मुर्खो की तरह ऐसा वक्तव्य दिया कि नाराज होकर,16 अगस्त को जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन की घोषणा की! जिसका नतिजा कलकत्ता फिर नोआखली में दंगा शुरू हो गया जो पुरे देश में फैला और लाखों हिंदूओं का नरसंहार हुआ! — काकाजी के चेहरे से दुख झलक रहा था!

ठीक कह रहे हैं काकाजी, मैंने भी सुना है कि गाधीं को नेहरू की अंग्रेजियत पसंद थी और पटेलजी की सनातनी विचाधारा से दुराव, इसीलिये वो प्रधानमंत्री के पर पटेलजी को पसंद नहीं किये!जबकि राजेन्द्र बाबू , कृपलानीजी आदि भी पटेलजी को पसंद किये थे!जैसा कि कृपलानीजी ने अपनी पुस्तक-” गांधी हिज लाइव एण्ड थाॅट्स” में लिखा है!— कुंवरजी ने अपनी कही!

इसका मतलब ये हुआ कि देश विभाजन एवं लाखों नरसंहार के पिछे सिर्फ और सिर्फ गांधी, नेहरू, एवं जिन्ना जिम्मेवार हैं ! और पटेलजी को प्रधानमंत्री नहीं बनने के पिछे गांधी एवं नेहरू का इस्लाम के प्रति साफ्ट कार्नर और पटेलजी का सनातनी होना रहा! — सुरेंद्र भाई समीक्षा किये!

ओहो, तब त हिंदूअन के बेवकूफ बनावल गईल!! एक ओर जनसंख्या के हिसाब से पाकिस्तान के देश के एक तिहाई जमीन आउर खजाना के एक तिहाई 65 करोड़ रुपयो दिया गईल आ करोड़ों मुसलमान एहिजे रहियो गईले आ हिंदूअन के हक मार लिहले! —- मुखियाजी बहस में सर तक डुबे लगे!

काकाजी ने जैसा कि बताया था– विभाजित भारत, नेहरू को, पाकिस्तान जिन्ना को और जम्मू कश्मीर शेख अब्दुल्ला को!!! और उधर इन तीनों का पारिवारिक संबंध!!! बा रे, ये तो गज़ब चालाकी दिख रही है जबकि बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था! — मास्टर साहब हाथ चमकाये!

अब समझ में आया न! आजादी के बाद कांग्रेस की नीतियां, हिन्दू विरोधी और तुष्टीकरण की क्यों रही है!! — कुंवरजी ने हाथ चमकाया!

बिलकुल, आपने एक दिन बताया था–
कश्मीर की 370 धारा,
हिन्दू जनसंख्या रोकने के लिए हिन्दू कोर्ट बिल, ताकि एक से अधिक विवाह न कर सके जबकि मुसलमान चार चार शादियां करे और तेजी से जनसंख्या बढ़ावे, इमरजेंसी में 70 लाख हिंदूओं की नसबंदी, हिन्दू मंदिरों का सरकारीकरण लेकिन पुजारी को वेतन नहीं जबकि मस्जिद और चर्च को स्वतंत्रता लेकिन इमामों और मौलवियों को वेतन,इस्लाम और ईसाई धर्म के पठन पाठन और प्रचार की छूट और हिंदूओं पर बंदिशें, अल्पसंख्यक आयोगआयोग के माध्यम से अनेकों सुविधायें, वक्फ बोर्ड के असीम अधिकार और लाखों एकड़ जमीन,करोड़ों मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता, घुसपैठियों को शरण देना, पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाले महान जनरल, मानेकशॉ के विजय से दुखी होकर, युद्ध जीतने के परिणामस्वरूप, उनका वेतन और पेंशन बंद करना, पुनः 93000 हजार युद्धबंदियों को और जीते हुए पोओके को यू हीं वापस करना अर्थात पाकिस्तानियों के प्रति हमदर्दी,आतंकी संगठन पीएफआई आदि को सह देना जो 2047 भारत को “गज़ब ए हिंद” बनाने का मजबुत आतंकी संगठन बन गया! इतना हीं नहीं, धर्म परिवर्तन का राष्ट्रव्यापी खेल, ये सब साफ साफ मुस्लिम तुष्टीकरण को तो दर्शाता हीं है साथ में सनातन धर्म एवं संस्कृति के विरुद्ध एक सुनियोजित कुचक्र भी साबित करता है!!— सुरेंद्र भाई याद दिलाये!

ए भाई लोग! इ सब जानके त हमार माथा घुमे लागल! — मुखियाजी निराश लगे!

देखिये, आपलोगों ने अबतक जो कहा उसे अगर सही भी मान लिया जाय तो आज हमारे देश का जो स्वरूप है उसमें कैसे हम सभी धर्मों और संप्रदाय के लोग, एक दुसरे के साथ सामंजस्य स्थापित कर, एक राष्ट्रीय भावना के साथ आगे बढ़े! ये अधिक महत्वपूर्ण है और इसके लिये हिन्दू और मुसलमान दोनों तबकों के राजनितिज्ञों और धर्म गुरुओं को राष्ट्रीय स्तर पर सोंच विकसित करनी चाहिये! जहाँ तक हिन्दू समुदाय का प्रश्न है इसमें तो दो मत नहीं की इसके डीएनए में हीं सहिष्णुता है! अब गेंद मुस्लिम भाईयों के पाले में है कि वे कैसी मनोदशा एवं कार्यकलापों का प्रर्दशन करते हैं! आज आवश्यकता है कि सारा मुस्लिम समाज देशविरोधी, हिन्दू विरोधी एवं आतंकी गतिविधियों के विरुद्ध हिंदूओं के साथ खड़ा हो जाय ! — मैं चुप हुआ!!

ए सरजी, ये आपका दिवा स्वप्न है! आज तक मुस्लिम कट्टरपंथियों का विरोध करते मुस्लिम समुदाय को नहीं देखा हां आतंकियों का स्लीपर सेल जरूर बनते हैं! वैसे,ईश्वर करे देश आतंक मुक्त और संप्रदायिक सौहार्द्र बनाकर उन्नति के उंचे सोपानों को प्राप्त करे! — कहकर काकाजी मुखियाजी की ओर देखे!

अच्छा! अबतक आतंकवाद के जड़ से वर्तमान स्थिति के चर्चा भईल !अब कल से आतंकवाद से जातिवाद कईसे अधिका खतरनाक बा! ए प चर्चा होखेके चाहिं!– कहकर मुखियाजी उठ गये और इसके साथ हीं बैठकी भी…..!!!!!

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