पब/स्पा और बार में होनी चाहिए विजिटर रजिस्टर : अनिल के गर्ग

समाज जागरण नोएडा

ये दिल है अब मुश्किल है जीना यहाँ, ये है नोएडा, ये है नोएडा मेंरी जान। शराब की पार्टी, बेईमानी और हत्या ने दिल्ली नोएडा तो क्या बिहार तक झकझोर दिया है। सवाल यही है कि आखिर हुआ क्या था ? ऐसी कौन सी बात थी जो कि बाउण्सर को एक हत्या करने पर मजबूर कर दिया? यह हत्या जानबुझकर की गई है या हो गई। पोस्टमार्ट के अनुसार मौत सिर में चोट के कारण हुई है, तो क्या बाकई बार में मौजूद बाउण्सर नें जानलेवा हमला किया ? साहब आप भले ही शराब को अच्छे समझियें, लेकिन शराब पार्टी के बाद हुए इस घटना नें आम आदमी के दिल में एक खौफ जरूर पैदा किया है। साक्षात्कार के समय शराब पीने वालों को रखने में मना करने वाली कार्पोरेट कंपनी को आखिर में शराब पार्टी देने की क्या जरूरत पड़ती है ? बार में रखे गए बाउण्सर का पुलिस वेरिफिकेशन कराये जाते है ? आखिर बार यह दूसरे रेस्टोरेंट में भी विजिटर रजिस्टर मैंटेन क्यों नही किये जाते है ?

नोएडा सेक्टर 38 गार्डन गलेरिया बार में हुए हत्या को लेकर लोगों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि बार और बिल्डर लोगोे का फैशन बन गया है बाउण्सर रखना। आये दिन ऐसी घटना देखने को मिलते रहते है, सवाल उठता है कि आखिर बाउण्सर बार में सरक्षा के लिए रखे जाते है या फिर ग्राहको को पीटवाने के लिए। पिछली साल की घटना जब सुपरटेक आफिस में न्याय मांगने गए घर खरीदारों को मारा पीटा गया, मामले में सेक्टर 39 थाने में मामला भी दर्ज है। हालांकि क्या कार्यवाही हुई अभी तक किसी को पता नही है।
नोएडा के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता इस घटना के बाद काफी आहत होते हुए पुलिस और प्रशासन पर कई सवाल उठाए है। उन्होने कहा है क्या हमारे प्रशासन और हमारे स्मार्ट सिटी की जनता के पास दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ाने वाली बेटी श्रीमती पूजा को इस घटना में मिली इस त्रासदी पर कोई जवाब है? प्यारा मासूम 5 साल का बेटा सार्थक और 3 साल की प्यारी बेटी भुविक भी, जिसने सब खो दिया अपने माँ से पूछ रही है कि पापा कब आयेंगे ?
क्या पब/स्पा सेंटर और अन्य में सभी कर्मचारियों/बाउंसरों के सत्यापन की कोई आवश्यकता नहीं है? आखिर क्यो नही सभी आगंतुकों का एक रजिस्टर भी रखा जाना चाहिए? एसपीए होटल और अन्य स्थानों में सभी बाउंसरों का डेटा एकत्र करने की सबसे अधिक आवश्यकता है, जैसा कि मालिकों द्वारा उसी प्रतिष्ठान में प्रतिनियुक्त किया गया है यह हमारे जिला प्रशासन, पुलिस कमिश्नरेट का कर्तव्य और जिम्मेदारी है, श्रम विभाग, सभी संबंधित प्राधिकरण इन सभी कर्मचारियों / बाउंसरों / सुरक्षा कर्मचारियों और प्रशासन कर्मचारियों और अधिकारियों का डेटा 3 महीने में एकत्र करके एक रजिस्टर बनाने की जरूरत है जिससे आने वाले समय में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

चूंकि गौतमबुद्धनगर एक स्मार्ट सिटी है अर्थात विकास एक महानगरीय शहर है, इसलिए इन सभी प्रतिष्ठानों के लिए एक रजिस्ट्रार बनाए रखने की सबसे अधिक आवश्यकता है ताकि ग्राहकों को रजिस्टर पर अपनी पहचान का उल्लेख करने के लिए कहा जा सके। नाम, पता और मोबाइल नंबर..! यदि अधिकारी को आने वाले व्यक्ति की पहचान के बारे में कोई संदेह है, तो उससे पहचान पत्र जैसे कि कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र मांगें। यह जनहित में हमारे सुझाव और राय है जो हमारे सभी पुलिस प्रशासन, आगंतुकों / खरीदारों और पूर्वाभासों के लिए फायदेमंद है। हम आशा करते हैं, हमारे गौतमबुद्धनगर के पुलिस आयुक्तालय, जिला प्रशासन और तथाकथित प्रतिष्ठान जैसे पब, मॉल, बार, एसपीए, पेइंग गेस्ट (पीजी) आदि के बीच मानवता को बनाए रखने के लिए सुरक्षा के इस मुद्दे पर संयुक्त रूप से निर्णय लेने के बाद निर्देशों का पालन करेंगे।

घटना बहुत ही दुखद है जिसे शब्दों में ब्याँ नही किए जा सकते है, लेकिन भविष्य में ऐसा ना हो इसके लिए प्रभावी कदम उठाने की जरुरत है। इसके साथ ही कंपनियों को भी शराब पीने और पिलाने वाले पार्टियों से बचने चाहिए। मिली जानकारी के अनुसार बिल को लेकर झगड़ा हुआ था, अगर यह सच है तो निश्चित तौर पर मेनू रेट डिसप्ले होनी चाहिए। पीने के बाद नशा होना लाजमी है बार और पब चलाने वाले प्रबंधक व मालिकों को चाहिए कि बउण्सर सिर्फ हंगामा करने वालों को बाहर निकालने के लिए रखनी चाहिए न कि मर्डर करने के लिए। इसके अलावा कार्पोरेट कंपनी को भी इस प्रकार के शराब पार्टी देने से बचने की जरूरत है।

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