जनता हुई स्वार्थी तो नेता भी हुए मतलब परस्त,राजनीति सेवा नही एक व्यापार है।

भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने पहुंचाया योगी को हाशिए पर

जैसी करनी वैसी भरनी भाजपा के कुनबे में भगदड़

दैनिक समाज जागरण संवाददाता राजेश वर्मा

उन्नाव।देश की आजादी के बाद लोकतंत्र की स्थापना हुई और देश तथा प्रदेश सरकार के बीच प्रतिनिधित्व करने के जनता लोकसभा व विधानसभा में मताधिकार के बल पर चुनकर जनसेवक को भेजती आ रही है लेकिन जब से जनसेवकों को स्वविवेक से खर्च करने के लिए निधि का निर्धारण हुआ है तब से बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया है जैसे वर्तमान समय में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना लागू हो चुकी हैं जिसमें जनता अपने जनप्रतिनिधि को चुनकर प्रतिनिधित्व करने के विधानसभा भेजेंगी जो जनता की समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार के समक्ष उठाकर निदान करना और अपने चुनाव क्षेत्र के निवासियों के विकास कार्य करवाना तथा सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से लाभान्वित करवाना होता है और उन्हें लोग जनप्रतिनिधि कहते है लेकिन परिवर्तन की लहर में सभी कुछ बदल गया जनप्रतिनिधि जनसेवक नहीं रह गए और जनता जनार्दन थी वही भी जनता जनार्दन नही रहा गई केवल सभी अपना अपना स्वार्थ निकालने के लिए नेताओं की जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारों में लगे हुए हैं इसलिए सभी कुछ व्यापार बन गया है इस लिए चुनाव के समय जनता के स्वार्थ में नेता जितना अधिक धन खर्च करता है और जीत हासिल करता है फिर वही नेता खर्च किए गए धन कमाता है सत्ता के नेताओं को अधिक लाभ मिलता है और विपक्ष के नेताओं को खर्च की गई रकम के सापेक्ष ही कमाई होती है फिर भी जनता नेताओं से महंगाई विकास कार्यों और बेरोजगारी तथा संचालित योजनाओं से वंचित रहने की बात करती है साथ ही भ्रष्टाचार और अपराधियों पर अंकुश लगाने की बात करते है कहते है और सभी नेताओ और सरकारी नौकरो पर आरोप लगाते है कि यह बिक गया है और वह बिक चुका है रिश्वत मांगी जा रही है इसलिए पहले अपने गिरेबान में देखो आखिर इसका कसूर वार कौन हैं क्योंकि इसी देश में लाल बहादुर शास्त्री जी ने जन्म लिया और जनपद में विशंभर दयाल त्रिपाठी भी जन्म लिया जिन्हे लोग जनसेवक कहते थे जिन्होंने अपने देश हित में और देश,प्रदेश,जनपद, वासियों के लिए जीवन अर्पण कर दिया था इसी लिए भाजपा के कुनबे में नेताओं की मची भगदड़ जो सपा के समंदर में ज्यादा समा रहे है जिसका खामियाजा सपा को आगे उठाना पड़ेगा क्योंकि आस की राह पकड़ कर जो पांच वर्षो से पार्टी की सेवा कर रहे थे उनको धोखा मिल रहा हैं।
आपको बताते चले कि राजनीति,जनप्रतिनिधि,जनसेवक,जनता जनार्दन आदि में बहुत बड़ा परिवर्तन हो चुका है क्योंकि बताया जाता है कि जिस समय देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी थे उसी समय देश में खाने के लिए गेंहू अमेरिका से आता था उसी समय हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था तभी अमेरिका ने हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बनाया और कहा था युद्ध नहीं बंद किया तो गेंहू की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी उस समय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने स्वयं एक समय भोजन किया साथ ही देश की जनता का आवाह्न किया जिसपर जनता ने एक वक्त का खाना खाया खेतों में कड़ी मेहनत की और गेंहू का उत्पादन किया साथ ही देश की सेना ने भी साथ निभाया जो आज भी अपने फर्ज को निभाती आ रही हैं तभी लाल बहादुर शास्त्री जी ने यह नारा दिया था जय जवान जय किसान और अपना पूरा जीवन देश व देश की जनता के लिए अर्पण कर दिया था इसी तरह जनपद के विशंभर दयाल त्रिपाठी जी ने जनपद वाशियो के लिए जीवन अर्पण कर दिया था बताया जाता हैं कि एक बार जनहित के कार्यों आदि को लेकर त्रिपाठी जी काग्रेस पार्टी से नजर हो गए थे जिन्होंने चुनाव लडने से इंकार कर दिया था तब काग्रेस ने डाक के माध्यम टिकट भेजकर चुनाव लडने का आग्रह किया बताया तो यह भी जाता हैं कि अंतिम समय जब त्रिपाठी जी के पहने हुए कपड़ों की तलासी ली गई थी उस समय जेब से कुछ रुपए निकले थे जो दहाई की संख्या भी नही पूरे कर रहे थे और जनता भी कभी पोस्टर ,बैनर ,मुर्गा,बिरियानी,शराब ,और लग्जरी वाहनों तथा भीड़भाड़ , सुरक्षा के घेरे में घिरे लोगो को देखकर नही चुनाव करते थे लेकिन धीरे धीरे समय सत्ता आदि में परिवर्तन होना शुरू हुआ और जनसेवको निधि का निर्धारण हुआ उसी समय से लोगो में लोभ लालच आदि के कीड़े ने जन्म ले लिया क्योंकि निर्धारित निधि का खर्च स्वविवेक से खर्च करने का अधिकार दे दिया गया उसी से लोगो में कुर्सी हथियाने का कांपटिसन शुरू हो गया धीरे धीरे जनता भी चुनाव के दौरान नेताओं में यह खोजते हैं कि कौन नेता मुर्गा बिरियानी शराब और नगद आने जाने के लिए लग्जरी वाहनों की पूर्ति करता है उसी को अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनकर विधानसभा भेज देती हैं जो करोड़ों खर्च करके अरबों रुपए कमाते है जिसमे सरकारी नौकरी करने वाले लोग भी कुर्सी पाने के लिए नेताओं की जेब गर्म करते है फिर वह क्यों नहीं वसूल करेंगे इस लिए किसी भी प्रकार से किसी के ऊपर ना ही अंकुश लगा है ना किसी भी प्रकार का अंकुश लगेगा यदि बदलाव चाहिए तो पहले जनता को बदलना बहुत जरूरी है नही तो बाहुबली और धनबली तो फलते फूलते रहेंगे अपना और नीचे गिरते जायेंगे कोई भी व्यक्ति रोक नही पाएगा।जय हिंद जय भारत

इनसेट

उन्नाव।एक पुरानी कहावत है कि जैसी करनी वैसी ही भरनी मै यह नहीं कहता कि हम राजा हरिशचंद्र का वंशज हूं क्योंकि समय परिस्थितियों के अनुसार हमको भी चलना मजबूरी किंतु सोचकर बहुत ही दुःख और तकलीफ होती है प्रयास जरूर करता हूं कि लोगो में जागुरूक हो और धीरे धीरे लोगो में परिवर्तन की शुरुआत हो और एक दो पीढ़ी बाद तक सुधार हो जाए क्योंकि मात्र दो लोगों में परिवर्तन होना जरूरी जनता और जनसेवक केवल सुधार जाए पूरी तरह से परिवर्तन हो जायेगा जरा सोचकर देखो क्योंकि शुरुआत जीरो से होती हैं और अंत भी जीरो ही है।

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