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#पात्रकार_बनने_के_लियें_सबसे_आसान_काम।*

#पात्रकार_बनने_के_लियें_सबसे_आसान_काम।*

ना ही सूचना प्रसारण मंत्रालय से किसी अनुमति की जरूरत है और ना ही राज्य सरकार से किसी अनुमति की जरूरत है,किसी भी बडे
न्यूज़ चैनल से मिलते जुलते नाम से जीमेल एकाउंट बनायें,
उसके बाद यूट्यूब पर एक एकाउंट बनायें।
उसके बाद प्लास्टिक का छोटा सा डिब्बा लेकर उसमे बीच मे गोल सूराख बनवाये, और फ़िर उस डिब्बे के चारो तरफ चेनल के मिलते जुलते नाम से बनाये गये लोगो का स्टिकर चिपका दें।
अब आप सोशल मीडिया व्हाट्सएप्प पर एक ग्रुप बनायें, और उस ग्रुप में दो चार नेता, दो चार डॉक्टर, दो चार वकील साहब, दो चार समाजसेवी और उसके बाद चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी उसके बाद दो चार पात्रकार और फ़िर प्रशासनिक अधिकारी को उस ग्रुप में जोड़ लें, बस बन गये आप पात्रकार,
और हां पुलिस व प्रशासन द्वारा पत्रकारों से संबंध स्थापित करने हेतु बनाए गए किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप में जुगाड़ लगाकर ऐड हो जाएं जिससे आपको फ्री फंड में एक लाइसेंस मिल जाएगा कि आप बड़े पत्रकार हैं अगर कोई पूछताछ करें तो किसी साइबर कैफे पर जाकर एक लेटर निकाल लें और उसमें अपना नाम भरकर सूचना विभाग में जमा कर दें ताकि लगे कि आप किसी बड़े संस्थान के पत्रकार हैं।
अब आपको कुछ उदाहरण दिये जा रहे हैं।
*आज तक न्यूज़ चैनल सहित बड़े बड़े न्यूज़ चैनल / बैनर के मिलते जुलते नाम के पोर्टल देखें।*
ज़ुल्म आज तक
समय आज तक
नज़र आज तक
कल तक
*न्यूज़ 24 बड़ा बैनर।*
MP न्यूज़ 24
न्यूज़ 24 MP
न्यूज़ 24 समाचार
24 न्यूज़ समाचार
न्यूज़ 24 भारत
*न्यूज़ 18 नेटवर्क के नाम पर देखें।*
क्राइम न्यूज़ 18
न्यूज़ 18 एक्सप्रेस
न्यूज़ 18 साधना
न्यूज़ 18 भारत
प्राइम न्यूज़ 18
बड़े न्यूज़ चैनल के नाम पर थोड़ा बहुत आगे पीछे कर उस चेनल का नाम जोड़कर ख़ुद को उस संस्थान से जुड़ा बताया जाता है,
और ऐसे शातिर लोग जो बड़े न्यूज़ चैनल के नाम से मिलते जुलते पोर्टल बनाकर गैरकानूनी कार्य को अंजाम देते हैं, और अधिकारी इतने काबिल होने के बाद भी ऐसे लोगों का शिकार हो जाते हैं वह तो उन्हें बाद में पता चलता है कि अरे यह असली चैनल का पात्रकार नहीं था, बस उससे मिलते जुलते नाम से बनाए गए पोर्टल का पत्रकार था। इससे पहले अधिकारी भी खुशी-खुशी ऐसे पोर्टल वाले रिपोर्टरों को बाइट देकर ऐसे समझते हैं कि जैसे वह आज पूरे देश की मीडिया में छा जाएंगे यही पोर्टल वाले कभी कभी किसी वीआईपी विजिट के दौरान सूचना विभाग से जारी प्रेस पास पा लेते हैं, और अति विशिष्ट रूप से पाए व्यक्ति के लिए खतरा भी बन सकते हैं।
कई जिलों में तो पुलिस द्वारा बनाए गए पीआर सेल में 20 प्रतिशत ऐसे लोग जुड़े हुये हैं, जो न पत्रकार हैं नही किसी भी मीडिया संस्थान से उनका कोई ताल्लुक है लेकिन फिर भी पुलिस अपनी वाहवाही के लिए ऐसे लोगों को ग्रुप में जोड़ कर जिम्मेदार पत्रकारों की छवि धूमिल करा रही है,,,

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