🌹सभी पटरी दुकानदारों को “पथ विक्रेता क़ानून” दिवस की हार्दिक बधाई 🌹🙏*

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*आज ही के दिन 8 वर्ष पूर्व दिनांक “4 मार्च” 2014 को पथ विक्रेता अधिनियम-2014 नाम से क़ानून बना था जो कि सम्पूर्ण भारत के पथ विक्रेताओं की जीविका का संरक्षण और उनके विनियमन के लिए “तत्कालीन सरकार” ने संसद में क़ानून पास करके पूरे देश में लागू किया था जिसके लिए पटरी दुकानदारों और उनके संगठनों ने सड़क से सदन तक आंदोलन कर अपने अधिकारों की गुहार लगाई थी।*
*ज्ञात हो कि इस संबंध में “सिविल अपील संख्या 4156-4157/2002 महाराष्ट्र एकता हाकर्स व अन्य बनाम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन व अन्य” में माननीय उच्चतम न्यायालय ने पथ विक्रेताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए दिनांक 09-09-2013 को “तत्कालीन केंद्रीय सरकार” को क़ानून बनाने के आदेश दिए थे जिसके अनुपालन में तत्कालीन सरकार ने “पथ विक्रेता अधिनियम -2014” (4 मार्च 2014) क़ानून बना कर सम्पूर्ण भारत में लागू किया।*

पटरी दुकानदार वो असहाय स्वरोजगार हैं जो जनता के सेवक होने के साथ साथ अपने परिवार का पेट पालने के लिये प्रातः 5 बजे से लेकर रात्रि 12 बजे तक सभी मौसम में खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे दुकानें लगाकर अथवा फेरी करके जनता की रोज़मर्रा की आवश्यकताओं का लगभग 70% सामान की पूर्ति करते हैं और इस सेवा के बदले वो सन्मानपूर्वक जीवन जीने की आस लगाए हमेशा से जनता को समर्पित हैं।
इन पथ विक्रेताओं के लिए *तत्कालीन सरकार* ने 2007 एवं 2009 में नेशनल पॉलिसी भी बनाई थी जिसका नाम क्रमशः *”राष्ट्रीय फेरीनीत 2007 एवं 2009″* है।
लेकिन नगर पालिका स्तर के अधकारियों व शासन प्रशासन एवं सत्ता के गलियारों में अपनी धाक जमाने वाले माननीयों ने आजतक उक्त अधिनियम का पूरा लाभ पथ विक्रेताओं तक पहुंचने नहीं दिया।

पटरी दुकानदारों के हितों के लिए काम कर रही संगठनों ने पूर्व में जब इसी विषय को लेकर *माननीय उच्चतम न्यायालय* में गुहार लगाई थी तो *माo.उच्चतम न्यायालय ने दिनांक 09-09-2013* को “तत्कालीन केंद्रीय सरकार” को आदेश जारी करते हुए स्पष्ट रूप से आदेश जारी कर दिए थे कि प्रशासनिक स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों के ज़रिये पथ विक्रेताओं का उत्पीड़न बंद हो,और पटरी दुकानदारों के लिए एक व्यवस्था एवं कानून बनाया जाए जिसके अनुपालन में “तत्कालीन सरकार” ने पटरी दुकानदारों के हक़ में उचित व्यवस्था और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकारों के साथ साथ व्यापार करने के हक़ के लिए “4 मार्च 2014” को *”पथ विक्रेता अधिनियम- 2014″* के नाम से क़ानून बना कर सम्पूर्ण भारत में लागू कर दिया था।

*ग़ौरतलब है कि इस क़ानून के बनने के बावजूद पटरी दुकानदारों की समसस्याएँ अभी भी कम नहीं हुईं हैं और उनका उत्पीड़न अब भी निरंतर जारी है।*
केंद्र सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन तक पटरी दुकानदारों के हक़ में बने इस क़ानून को लेकर कभी भी गंभीर नहीं रहा है।
अगर इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के 60 लाख पटरी दुकानदारों सहित देश के करोड़ों पटरी दुकानदारों का उत्पीड़न निरंतर जारी रहा तो पथ विक्रेता आने वाले सभी चुनावों में अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने पर मजबूर होंगे।
🙏
*अख़्तर हुसैन खान*
सदस्य- टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC)
नगर निगम लखनऊ
*एवं*
महामंत्री- पूर्वांचल पटरी दुकानदार कल्याण समिति लखनऊ (रजिस्टर्ड)
*9889111234 + 9454187860*

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