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*पतंजलि योगपीठ द्वारा ग्रामीण किसानों को प्रथम चरण में 800 से अधिक गायों का गौ-दान कार्यक्रम*

*रौमारी चिरांग में पतंजलि गौशाला का उद्घाटन*

*असम व नॉर्थ ईस्ट में पतंजलि योगपीठ द्वारा विभिन्न सेवा प्रकल्प*

बोडोलैंड जो असम का दूरदराज का ग्रामीण क्षेत्र है तथा असम के ग्रामीण क्षेत्र में पतंजलि योगपीठ द्वारा सेवा के अनेकों कार्य चल रहे हैं जिसमें शिक्षा ग्रामीण अंचल में निर्धन ग्रामीण बच्चों के लिए कई शिक्षण संस्थान आचार्यकुलम चलाये जा रहे हैं जिसमें उच्च स्तर की आधुनिक शिक्षा नैतिक मूल्यों के साथ-साथ ग्रामीण विद्यार्थियों को लगभग निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है इसके साथ-साथ यहां ग्रामीण लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनके स्वावलंबन के लिए उनकी खेती को उन्नत बनाने के लिए हरियाणा से देशी नस्ल की गिर, साहिवाल, थारपारकर, राठी, कांकरेज, हरियाणवी इत्यादि उन्नत नस्ल की गायों को लाकर यहाँ पर किसानों के स्वावलंबन के लिए यहाँ की गाय की नस्ल सुधारने के लिए गोदान का कार्यक्रम किया जा रहा है ।
जिसमें परम पूज्य स्वामी जी महाराज और पूज्य श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज द्वारा पतंजलि योगपीठ के माध्यम से प्रथम चरण में लगभग 800 दुधारू देसी गायों का गोदान कार्यक्रम किया जा रहा है। यह कार्यक्रम चिरांग जिले में रौमारी में स्थित पतंजलि आश्रम में दिनांक 26 फरवरी को 11 बजे आयोजित किया जायेगा जिसमे यहां पर एक गौशाला का उद्घाटन भी किया जायेगा, इस कार्यक्रम में पूज्य स्वामी रामदेव जी, पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी तथा बीटीसी चीफ हग्रामा महिलारी जी भी विशेष रूप से भाग लेंगे।
इसके साथ-साथ यहां पर कुमारीकाटा, बाक्सा जिला में भी एक आचार्यकुलम चलाया जा रहा है जहां पर ग्रामीण बच्चों को अत्यंत न्यूनतम फीस के साथ उच्च स्तर की माडर्न एजुकेशन सैकड़ों विद्यालयों को आचार्यकुलम् के माध्यम से प्रदान की जा रही है।
असम के इसी ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीणों के सहायतार्थ भावी योजना है, जिसमें आगामी 27 फरवरी को पूज्य स्वामी जी पूज्य आचार्य जी, मा. रेहोन देइमारी जी (माननीय मंत्री असम सरकार) के कर कमलों द्वारा योग, आयुर्वेद ट्रीटमेंट एवं ट्रेनिंग सेंटर का शिलान्यास दोपहर 1100 बजे भैरव कुंड, उदालगुरी, असम में किया जा रहा है। जहाँ पर योग, आयुर्वेद की समस्त चिकित्सा व ट्रेनिंग की व्यवस्थाएं की जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि उदालगुरी और भैरव कुंड, उदलगुड़ी जिला वही क्षेत्र है जहां आज से 25 वर्ष पूर्व 90 के दशक में पूज्य स्वामी जी और पूज्य आचार्य जी हरिद्वार से प्रति वर्ष ट्रैन में आकर आयुर्वेद की दवाइयां लाकर, यहां के ग्रामीण लोगों को योग, आयुर्वेद से उनका उपचार करके, उनकी सेवा करते थे। तथा योग के शिविर लगाने के लिए प्रतिवर्ष आते थे।
इस क्षेत्र में जहां से पूज्य स्वामी जी महाराज और पूज्य आचार्य जी का विशेष लगाव है वहां पर पतंजलि ने एक अनूठी पहल करते हुए इस भैरव कुंड जहां भूटान, अरुणाचल प्रदेश एवं असम की सीमाएं लगती हैं वहां पर यहां के ग्रामीण लोगों के लाभ के लिए एक योग, आयुर्वेद का ट्रीटमेंट ट्रेनिंग सेंटर का शिलान्यास किया जा रहा है।
इसके साथ ही 28 फरवरी को कुमारीकाटा जिला बाक्सा के आचार्यकुलम का वार्षिकोत्सव का कार्यक्रम भी है। जिसमे श्री विश्वजीत देइमारी राज्यसभा सांसद महोदय भी भाग लेंगे। कुमारीकाटा के कार्यक्रम में स्थानीय एम.एल.ए. इमानुएल मुसहरी जी भी विशेष रुप से उपस्थित रहेंगे|

*पतंजलि योगपीठ की असम में स्थानीय स्तर पर सेवाएं*

*1. शिक्षा-* असम के ग्रामीण क्षेत्रों में चिरांग, उदालगुड़ी व कुमारीकाटा में नैतिक मूल्यों के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा के संगम आचार्यकुलम की स्थापना की गयी, जिसमें ग्रामीण बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा न्यूनतम मूल्य (लगभग निःशुल्क) यहाँ पर प्रदान की जाती है।
*2. योग चिकित्सा सेवा-* पतंजलि योगपीठ के योग्य योग शिक्षकों और योग प्रचारकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में गाँव-गाँव जाकर लोगों को योग, आयुर्वेद, घरेलू उपचार आदि से कैसे स्वस्थ रहें, इसके लिए निःशुल्क कैंप लगाए जा रहे हैं।
*3. मोबाईल हेल्थ क्लिनिक-* मोबाइल हेल्थ क्लीनिक के माध्यम से चिकित्सा की जरूरी दवाइयों के साथ योग्य चिकित्सक गांव-गांव जाकर लोगों को नि:शुल्क चिकित्सकीय परामर्श प्रदान करने की सेवा का कार्य कर रहे हैं।
*4. औद्योगिक इकाई-* असम के तेजपुर में एक बड़ी औद्योगिक इकाई जिसमें स्थानीय जड़ी-बूटियों की प्रोसेसिंग से विश्वस्तरीय उत्पाद बनाए जा रहे हैं ऐसी लगभग 1200 सौ करोड़ रुपए की लागत से एक विशाल औद्योगिक इकाई की स्थापना असम के तेजपुर में की गई है। जिसमें हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है।
*5. मोबाईल सोल टेस्टिंग यूनिट-* पतंजलि योगपीठ द्वारा असम में किसानों के लिए मृदा जांच हेतु मोबाइल सोईल टेस्टिंग की व्यवस्था जिससे उपज बढ़ाई जा सके उसके लिए उपलब्ध् करवाई गई है।
*6. गौ अनुसंधान केंद्र-* नार्थ-ईस्ट में पाए जाने वाली मिथुन गाय व स्थानीय गाय की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एक गौ रिसर्च सेंटर की स्थापना यहाँ पर की जा रही है।
*7. कृषि अनुसंधान केंद्र-* किसानों की आय बढ़ाने के लिए चिरांग, कुमारीकाटा इत्यादि में कृषि अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है जहां पर औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती से किस प्रकार से किसान लाभान्वित हो सकते हैं उसके ऊपर अनुसंधान व रिसर्च का काम चल रहा है।
*8. पतंजलि कुदरती खेती प्रशिक्षण सेवा-* पतंजलि योगपीठ द्वारा प्रधनमंन्त्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत पूरे असम में किसानों को कैसे जीरो बजट प्राकृतिक कुदरती खेती करें, जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो, उसका व्यवहारिक प्रशिक्षण पतंजलि योगपीठ के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रदान किया जा रहा है।
*9. पतंजलि योगपीठ (मिर्जा)-* गुवाहाटी में 100 से अध्कि बिस्तर के आयुर्वेदिक कॉलेज व हॉस्पिटल की स्थापना पतंजलि योगपीठ, कामरूप मिर्जा में की जा रही है जिसका निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है।
*10. जैव विविध्ता पार्क (बायोडायवर्सिटी पार्क) -* सिजुसा, अरुणाचल प्रदेश में एक बायोडायवर्सिटी पार्क की स्थापना की गई है। जिसमें 3 लाख से अध्कि पौधे लगाये गये हैं, जैव विविधता पर अनुसंधन किया जाएगा। जिसमें बिक्रेटिंग प्लान्ट व टिश्यू कल्चर लैब की भी स्थापना की जायेगी। जिससे कि स्थानीय निवासियों को कृषि से अतिरिक्त लाभ मिले तथा पर्यटन बढ़े। शिक्षा के लिये सिजुसा में भी आचार्यकुलम् की स्थापना की जा रही है।
*11. सीड बैंक-* (कुमारीकाटा) परंपरागत बीजों के संरक्षण, सम्वर्धन व अनुसंधान के लिए कुमारीकाटा में एक बीज भंडार (सीड बैंक) स्थापित किया जा रहा है जिससे किसान विदेशी कंपनियों के महंगे बीजों की लूट से बचें तथा वह अपने परंपरागत बीजों से अधिक से अधिक पफसल प्राप्त करके लाभान्वित हो सके।
*12. प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट-* (कुमारीकाटा) स्थानीय स्तर पर मिलने वाली गिलोय से लेकर दूसरी औषधियों के लिए एक्सट्रेक्शन प्लांट व आयल प्रोसेसिंग यूनिट कुमारीकाटा में स्थापित की गई है।
*13. निःशुल्क योग कक्षाएँ-* पतंजलि योगपीठ द्वारा असम में लगभग 8000 से अधिक निःशुल्क योग कक्षाएँ प्रतिदिन संचालित की जाती हैं जिसमें लाखों रोगी व्यक्ति प्रतिदिन भाग लेकर योग, आसन, प्राणायाम द्वारा लाभान्वित होते हैं।
*14. निःशुल्क साहित्य वितरण-* पतंजलि द्वारा असम में विविध् साहित्य- घरेलू उपचार, ज्ञानामृत, योग संदेश, स्वाभिमान संकल्प-पत्र आदि पुस्तकों व विभिन्न पत्रकों का निःशुल्क वितरण किया जाता है।
*15. निःशुल्क जड़ी-बूटी वितरण-* 4 अगस्त, जड़ी-बूटी दिवस पर संस्थान द्वारा निःशुल्क औषधीय पौधें का वितरण व संस्थान द्वारा किसानों को जड़ी-बूटी कृषि सम्बंधी सलाह उपलब्ध् करवाई जाती है।
*16. आपदा राहत सेवा कार्य-* असम में गतवर्ष आयी भयंकर बाढ़ में 100 से अधिक ट्रक राहत सेवा सामग्री संस्थान द्वारा बाढ़ राहत कार्य में वितरित की गयी, इसके साथ ही असम में निर्धनो को कम्बल वितरण, रक्तदान, वृक्षारोपण आदि सेवा कार्य एवं कन्या भ्रूण हत्या व नशामुक्ति के विरोध् में लगातार कार्य किया जा रहा है।
*17. नेचुरोपैथी सेंटर-* आगामी योजना में असम के चिरांग में 60 से अधिक बिस्तर वाला नेचुरोपैथी अनुसंधान केंद्र खोलने की योजना पर कार्य चल रहा है।

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