fbpx

#भाग-2 जब मुसलमान लड़के नाम बदलकर हिंदू नाम रखकर हिंदू लड़की को अप्रोच करे तब कैसे बचना है

1. इससे बचनें का सबसे बड़ा उपाय तो यही है कि इन विषयों पर जागरूकता. अगर एकबार जागरूकता आ गई, एकबार विचारधारा बन गई तो फ़िर कभी न कभी पकड़ में आ ही जाएगा यह फर्ज़ी नाम का खेल. दूसरा यह देखा गया है कि नाम बदलकर फंसाने का काम अधिकतर सोशल मीडिया खासकर फेसबुक पर दोस्ती से शुरू होनें पर हुआ. इसलिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि किसी अनजान व्यक्ति से ज़्यादा दोस्ती न बढ़ाएं जबतक कि उसके सोशल मीडिया प्रोफाईल पर उसका पूरा प्रोफ़ाइल, बैकग्राउंड सब क्लीयर क्यों न हो जाए. अगर किसी फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया अकाउंट पर ज्यादा कोई पोस्ट नहीं है, आईडी भी ज्यादा नहीं 2-3 साल ही पुरानी है, न कोई घर-परिवार का फोटो है न तो कोई कमेंट वगैरह ज्यादा है मगर उस अकाउंट से मैसेज आ रहा है तो समझ जाएं की आईडी फर्ज़ी है.

2. स्कूल,कॉलेज या ऑफिस में अगर कोई मिलता है तो यह संभव है कि वह फर्ज़ी नाम वाला तो नहीं होगा क्योंकि तब वो वहां तक पहुंच ही नहीं पता. वहां तो अगर कोई नॉर्मल मुस्लिम लड़का अगर अप्रोच करे तो ऊपर बताए उपायों से ही बचा जा सकता है. मगर समस्या होती है तब जब ऐसे किसी व्यक्ति से मुलाकात हो जिसे पहले जानते न हो, जो अजनबी हो, जिससे संयोगवश मुलाकात हुई हो जैसे किसी से ट्रेन में मुलाकात हुई, किसी से दुकान में, किसी से सैलून में , किसी से पार्क में, किसी से बस में, किसी से मेले में या ऐसे ही किसी सामान्य दोस्त के किसी दोस्त से मुलाकात हुई, या किसी से जिम में मुलाकात हुई हो,या कोचिंग के बाहर कोई पीछा करता हो तो ऐसे मामलों में दोस्ती या अन्य स्तर पर बात बढ़ाने से पहले उस व्यक्ति का पूरा बैकग्राउंड पता करें, उसके घर-परिवार से संबंधित पूरी जानकारी लें उससे पहले कुछ भी हो जाए भरोसा न करें. इस तरह की जागरूकता से ही बचा जा सकता है.

3. इन संयोगवश मामलों में हुई मुलाकातों में ही अधिकतर मुसलमान लड़के हिंदू नाम रखकर हिंदू लड़कियों को फंसाते हैं, उनसे शारीरिक संबंध बनाने से लेकर शादी तक कर लेते हैं फ़िर पता चलता है कि वह लड़का मुसलमान है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए किसी भी ऐसे अजनबी व्यक्ति जिससे संयोगवश मुलाकात हुई हो, उसपर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करना है, न ही उस पहली ही संयोगवश मुलाकात के आधार पर फोन नंबर देना है और न ही बातचीत बढ़ानी है. इन मामलों में सबसे अधिक सतर्कता की आवश्यकता है, अगर लगे कि वह व्यक्ति ज्यादा ही friendly हो रहा है नंबर मांगने की कोशिश कर रहा है तो सावधान हो जाएं. उसकी किसी भी बातों में न आएं खासकर अगर वह कोई भावनात्मक बात करे या कोई अपने से जुड़ी कोई दुखद घटना सुनाए तो उसपर यकीन नहीं करना है.

4. लव जिहाद में मुस्लिम लड़कियां भी अहम भूमिका निभाती हैं. मुस्लिम लड़कियां हिंदू लड़कियों से पहले तो खूब दोस्ती बढ़ाकर उनका भरोसा जीतती हैं और फ़िर लड़की की मुलाकात अपने किसी भाई या दोस्त से करवातीं हैं जो कि होता तो मुसलमान है मगर नाम बदलकर हिंदू नाम रखकर आता है. एक तो वह होता है जिसमें मुस्लिम लड़की हिंदू लड़की की मुलाकात मुसलमान लड़के से उसकी असली पहचान के साथ ही कराती है और दूसरा यह जिसमें मुसलमान लड़के की पहचान छिपाकर उसे हिंदू नाम बताकर लड़की से मिलवाती है. ऐसे में हिंदू लड़की को तुरंत सतर्क हो जाने की जरूरत है. उसकी मुसलमान दोस्त ने चाहे मुसलमान नाम के लड़के से चाहे हिंदू नाम के लड़के से उसका परिचय कराया हो, लड़की को चाहिए कि तुरंत सावधान हो जाए और किसी भी हाल में न तो लड़के को फोन नंबर दे, न तो दोस्ती बढ़ाए और उस मुस्लिम लड़की से भी दूरी बना ले.

5. बहुत से लव जिहाद के मामलों में यह देखा गया है कि किसी शोरूम, सैलून या दुकान में फीडबैक लेने के बहाने या नए ऑफ़र्स के बहानें लड़की का नंबर मांगने की कोशिश करते हैं. अगर वह दुकान कोई बहुत प्रतिष्ठित ब्रांड की है, कोई MNC या कोई बड़ी राष्ट्रीय कंपनी है तब तो नंबर दे दें मगर अगर ऐसी ही कोई छोटी मोटी दुकान है तो वहां पूरा प्रयास करें की फोन नंबर न दें. अगर नंबर देना भी पड़ गया है तो भी यह ध्यान दें कि अगर ज़्यादा फ़ोन आ रहा है, और बात करनें वाला ज्यादा पर्सनल बातें करने या दोस्ती, नज़दीकी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है तो तुरंत सावधान हो जाएं, उस बातचीत को वहीं रोक दें और उस लड़के को चेतावनी देदें इस तरह की बातें या दोबारा फोन न करनें की. या उससे कहें कि उसे इन बातों से क्या मतलब वगैरह कुछ भी करके उस बातचीत को वहीं रोक दें.

6. ऐसे किसी भी व्यक्ति से अगर बातचीत बढ़ गई है, दोस्ती और अफ़ेयर जैसी स्थिति आ चुकी है तो फ़िर कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले, उस लड़के की पारिवारिक पृष्ठभूमि या कहें कि family background का पूरी तरह से पता कर लें. शादी जैसा कोई बड़ा कदम उठाने से पहले अपने माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी दें, अपने माता-पिता के साथ उस लड़के के परिवार वालों से जबतक पूरी तरह से सब बातों का पता न लगा लें, सारी जानकारी न हो जाए तबतक ऐसा कोई भी कदम न उठाएं. सिर्फ़ लड़के को ही अपनें माता-पिता से मिलाने से नहीं बल्कि जबतक लड़की के माता-पिता खुद पूरी तरह से लड़के के परिवार के प्रति आश्वस्त न हो जाएं ऐसा कोई भी कदम न उठाएं.

7. स्कूलों में, कॉलेजों में, कोचिंग में कई बार यह भी देखा गया है कि मुसलमान शिक्षक भी लड़की को बहला फुसला लेते हैं, ऐसे में लड़की को सावधान करें की अगर कोई भी शिक्षक उससे इस तरह की बातें करना शुरू करे तो वहीं सावधान होकर तुरंत अपने परिवार की जानकारी में बात लाएं.

8. जहां तक संभव हो किसी भी ऐसे जिम, डांस क्लास या कोई भी ऐसी hobbies सिखाने वाले के यहां लड़कियों को न भेजें जो मुसलमान हो. अगर भेज भी रहे हैं तो लड़की को सावधान रखें इन विषयों पर कि इस तरह की अगर नज़दीकी बढ़ाने का कोई शिक्षक या ट्रेनर प्रयास करे तो तुरंत सावधान हो जाना है. इन मामलों में भी बात ऐसे ही शुरू में धीमे-धीमे बातचीत बढ़ाकर, विश्वास हासिल करने से होती है, जहां लगे कि बात एक औपचारिक सीमा को लांघकर व्यक्तिगत हो रही है वही सबसे ज़्यादा सतर्क और सावधान होनें का है.

9. जिन मामलों में मुसलमान लड़के नाम बदलकर हिंदू नाम रखकर हिंदू लड़कियों को टारगेट करते हैं उसमें यह पाया गया है कि वे अधिकतर निचले तबके के होते हैं जैसे कोई electrician, कोई carpenter, कोई दुकान चलाता है, कोई सैलून में काम करता है. इसलिए भी संयोगवश जहां कहीं भी ऐसी किसी जगहों पर मुलाकात हो तो उसपर भरोसा नहीं करना है, कोई बातचीत आगे नहीं बढ़ानी है और खतरा महसूस होने पर घर पर और पुलिस को तुरंत सारी जानकारी देनी है.

10. सिर्फ़ पढ़ने-लिखनें वाली उम्र की लड़कियों को ही नहीं, हर उम्र की लड़कियों और महिलाओं को इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है, किसी मुसलमान को “राखी बांधने”, “भाई बनानें” जैसी मूर्खता भी नहीं करनी है क्योंकि उसकी नज़र में हिंदू लड़की सिर्फ़ और सिर्फ़ एक “काफ़िर” और “भोग की वस्तु” ही है. और वह कितना भी बुलाए अकेले तो जाना ही नहीं है उससे मिलने.

11. यह भी देखा गया है कि अगर हिंदू लड़की मना करे तो मुसलमान लड़के धमकी देना शुरू कर देते हैं. जान से मारने या एसिड एटैक जैसा कुछ कर भी बैठते हैं. और यह भी देखा गया है कि जब लड़की को पता चलता है कि जिसके साथ वह रह रही थी लिव इन या शादी में वह कोई और मज़हब का है तो भी मुसलमान उनके साथ ऐसा ही कुछ कर बैठते हैं.

12. इस परिस्थिति से बचने के लिए अगर पहले कहीं से भी खतरा महसूस हो या मुसलमान लड़का धमकी दे रहा हो तो तुरंत अपने घर में बात बताएं, पुलिस में तो शिकायत दर्ज कराएं हीं साथ ही साथ अग्नीवीर, हिंदू जनजागृति समिति, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठनों के हेल्पलाइन नंबर पर उनसे संपर्क जरूर करें क्योंकि जब वो लोग अच्छी खासी संख्या में साथ में खड़े हो जाते हैं तो पुलिस पर तो दबाव बनता ही है केस दर्ज कर कार्यवाही करनें का बल्कि मुसलमान तब मामले में हिंदू संगठन वालों के जुड़ते ही डर जाते हैं कि कहीं उनके साथ ही कुछ न हो जाए. इस तरह से हिंदू लड़कियां अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें.

13. सबसे अधिक नाम बदलकर लव जिहाद के मामलों की शुरुआत फ़ोन नंबर की अदला-बदली से होती है इसलिए हिंदू लड़कियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे किसी भी व्यक्ति को जल्दी अपना फोन नंबर न दें जिसे अच्छे से जानती न हों.

14. मुसलमान लड़के बहुत बार यह भी झांसा देते हैं कि वह लड़की के लिए हिंदू बनने को तैयार हैं लेकिन ऐसा पाया गया है कि शादी के बाद लड़का वापिस से इस्लाम कबूलकर लड़की को धमकाने लगता है उसपर दबाव बनाने लगता है धर्म परिवर्तन के लिए. बहुत बार मुसलमान लड़के यह आश्वासन भी देते हैं कि वह लड़की को हिंदू ही बनें रहने देंगे मगर उसका अंज़ाम भी वही होता है.

15. मुसलमान लड़के हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने के बाद उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने पर दबाव बनाने लगते हैं और यह भी झांसा दिए रहते हैं कि वह उससे शादी करेंगे मगर जब लड़की मान जाती है तो लड़की के साथ बनाए गए संबंध के समय का वह विडियो बना लेते हैं और फ़िर शुरू होता है धमकियों का खेल इसलिए इससे भी बहुत अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है.

16. जब कभी हिंदू लड़की को पता चले कि उसे छला गया है, लड़का हिंदू नहीं मुसलमान है तब तुरंत उस लड़के पर गुस्सा या नाराज़गी या किसी भी तरह का आक्रोश जाहिर न करें न ही कोई पुलिस केस करनें की बात करें अन्यथा ऐसी परिस्थिति में मुसलमान लड़के या तो हत्या कर देते हैं, या फ़िर गैंगरेप जैसा कार्य कर MMS बनाकर धमकी देनें जैसा कार्य शुरू कर देते हैं. ऐसे में लड़की धैर्य और सूझबूझ से काम ले. धीमे से चुपचाप चुपके से उस लड़के के चंगुल से भाग निकलें और तुरंत अपने परिवार, पुलिस और हिन्दू संगठनों से बात कर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें और तब उस लड़के के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करें.

17. सबसे महत्वपूर्ण है जागरूकता और यह जागरूकता ही लव जिहाद से हिंदू लड़कियों/महिलाओं को बचा सकती है. साथ ही साथ हिंदू समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि अगर कोई लड़की लव जिहाद की शिकार हो ही गई है तो उसे वापिस से अपनाएं. हिंदू लड़कों को जागरूक करें कि अगर कोई मुसलमान उनके पास किसी हिंदू लड़की से सेटिंग कराने जैसी बात करता है तो बेझिझक मना कर दें. उसकी मंशा जानने के लिए क्रॉसचेक करें उससे यह बोलकर की वह किसी मुस्लिम लड़की से उसकी सेटिंग कराए और तब उसकी प्रतिक्रिया देखिए सारी तस्वीर साफ़ हो जाएगी. आपसी एकता और जागरूकता से ही इस समस्या का समाधान संभव है. ध्यान रहे, मुस्लिम लड़के चुनकर उन्हीं लड़कियों को टारगेट करते हैं जिनके बारे में उन्हें यह पता चल जाता है कि उसे अपने धर्म, इतिहास, संस्कृति, सभ्यता या वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में कुछ नहीं पता और तब ऐसी परिस्थितियों में उन्हें बहकाना आसान हो जाता है. उदाहरण के लिए देखिए कभी भी इन मुसलमानों की किसी सिख लड़की को लव जिहाद में फंसाने की हिम्मत नहीं होती क्योंकि उन्हें पता है कि वे अपने धर्म के प्रति जागरूक हैं और सिख इतनें संगठित हैं कि उनकी ईंट से ईंट बजा देंगे. बस यही जागरूकता और एकता ही समाधान है.

18. और राजनीति रुप से जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है इसलिए जरूरी है कि उस पार्टी को वोट दें जो हिंदू हित में काम करे और फिलहाल एक ही पार्टी है जो हिंदू हित में खड़ी है और वह है बीजेपी. इसलिए बीजेपी को ही वोट दें.

इस तरह इन माध्यमों से लव जिहाद के इस भयानक खतरे से बचा जा सकता है.

Please follow and like us:
%d bloggers like this: