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#भाग-1 जब मुसलमान लड़के अपनी असली पहचान के साथ लड़की को टारगेट करते हैं तब बचने के लिए क्या करें

#भाग-1 जब मुसलमान लड़के अपनी असली पहचान के साथ लड़की को टारगेट करते हैं तब बचने के लिए क्या करें

1. अपनें बच्चों को बचपन से ही, लड़का हो या लड़की उनको गर्मी की छुट्टियों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अग्नीवीर, इस्कॉन, आर्य समाज किसी न किसी ऐसे संगठनों में summer camp में भेजें ताकि आपके बच्चों को बचपन से ही अपनें धर्म, संस्कृति, सभ्यता, उसका विश्व को दिया योगदान इन सभी की जानकारी हो. बचपन से ही बच्चों को समय समय पर मंदिर ले जाते रहें , अमर चित्रकथा जैसी कॉमिक्स दें ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव बना रहे.

2. इसके साथ साथ बचपन से ही बच्चों के माता-पिता और अन्य घरवाले उन्हें सही इतिहास की जानकारी भी दें, कैसे मुस्लिम शासकों ने प्राचीन समय में हिंदुओं पर अत्याचार किए और कैसे आज भी यही सब चल रहा है.

3. लड़कियों को ख़ासकर लव जिहाद के खतरे से अवगत कराते चलें, इसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी लड़की के माता-पिता की बनती है कि वे लड़की को उम्र के साथ साथ इन विषयों पर जागरूक करते चलें. जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है लव जिहाद से लड़ने का. हिंदू धर्म में स्त्री का क्या स्थान है यह भी बताते चलें ताकि कोई बहका न सके. उन्हें बताएं कैसे मुसलमान लव जिहाद में फंसाकर हिंदू लड़कियों का यौन उत्पीड़न से लेकर, MMS बनाना, जिस्मफरोशी के धंधे में धकेलने से लेकर या फ़िर उनका ब्रेनवॉश कर उनको आतंकवादी बनानें जैसा काम करते हैं.

4. लड़कियों को इस स्तर तक धार्मिक, राजनीतिक तरीके से जागरूक करते रहें उम्र के साथ साथ. स्कूल, कोचिंग, कॉलेज में खतरा सबसे अधिक रहता है इसलिए इतना तो लड़कियों को जागरूक कर ही दें कि चाहे जो हो जाए वह किसी भी मुसलमान पर किसी भी तरह का कोई भरोसा न करें. उन्हें बताएं कि मुसलमान कैसे मीठी मीठी, चिकनी चुपड़ी बातें कर अपने जाल में फंसाते हैं. कैसे सहानभूति का खेल खेलते हैं, कभी कोई समस्या बताकर तो कभी कुछ भी कहानी बताकर सहानभूति हासिल करने की कोशिश करते हैं तो उर्दू शायरियां सुनाकर दिल जीतने का प्रयास करते हैं. कभी assignment, कभी नोट्स मांगने तो कभी किसी न किसी कारण से मुसलमान लड़के हिंदू लड़कियों से ही नज़दीकी बढ़ाने का प्रयास करते हैं इसलिए यदि ऐसा हो तो लड़की तुरंत सावधान हो जाए.

5. स्कूल, कॉलेज के अलावा कोचिंग सेंटर भी एक बड़ा माध्यम होता है लव जिहाद के लिए. कई बार कोचिंग में या तो कोचिंग के बाहर मुसलमान लड़के हिंदू लड़कियों का पीछा करते हैं, उनसे दोस्ती बढ़ाने की कोशिश करते हैं उनका नंबर मांगते हैं, ऐसे में तुरंत सावधान हो जाना है. मुसलमान टीचर भी कई बार हिंदू लड़कियों को फंसाने में लग जाते हैं इसलिए हिंदू लड़कियों को सचेत रहना होगा और अगर कहीं लगे की टीचर कुछ ज्यादा ही पर्सनल होने की कोशिश कर रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाएं और अपने घर पर इसकी जानकारी दें.

6. इसके अलावा हिंदू लड़कियों को उनके माता-पिता hobbies जैसे की डांस,जिम आदि जगहों पर भेजते हैं. पहले तो प्रयास करें कि वह मुसलमान द्वारा संचालित न होता हो और अगर वहां किसी कारणवश जाना भी पड़ रहा है तो भी किसी भी मुसलमान ट्रेनर या अन्य साथ में आने वाले मुसलमान लड़कों से दोस्ती न बढ़ाएं और अगर वह ऐसा करनें का प्रयास करते हैं तो तुरंत सतर्क हो जाएं.

7. यही सतर्रकता सैलून, ब्यूटी पार्लर या अन्य जगहों पर भी दिखानी है जहां कि अगर मुसलमान कोई ज़्यादा नज़दीकी बढ़ाने की कोशिश करे तो सतर्क हो जाएं.

8. लव जिहाद के लिए अच्छी खासी फंडिंग होती है. इसलिए बहुत से मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को लुभाने के लिए महंगे महंगे गिफ्ट, कपड़े यह सब देते रहते हैं. इतनी जागरूकता और सतर्कता ले आइए लड़कियों में की कोई गिफ्ट उनसे लेना तो दूर की बात, किसी भी हाल में उनपर भरोसा न करें. यही नहीं , आत्मरक्षा के लिए जरूरी है कि हर हिंदू खासकर लड़कियां कराटे, मार्शलआर्ट जैसा कुछ सीख रखें.

9. चाहे कुछ भी हो जाए, मुसलमान लड़के के साथ अकेले कहीं भी न जाएं, उसके साथ किसी भी तरह की भावनात्मक बातों में न उलझें, अगर वह दोस्ती बढ़ाने के बाद धीरे-धीरे धार्मिक मुद्दे उठाता है, आपके धर्म पर धीमे धीमे प्रश्न चिह्न लगाना शुरू करता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं. पहले तो उस बातचीत को वहीं रोक दें, उसके बाद उस लड़के से दूरी बना लें. अगर वह तब भी जबरदस्ती बातचीत बढ़ाने का प्रयास करे तो जरूरत पड़ने पर सीधा मना कर दें, वह चाहे जितना भी विक्टिम कार्ड क्यों न खेले, जितना भी सहानभूति का खेल क्यों न खेले उसमें बिल्कुल न फंसे. अगर कहीं से खतरा महसूस हो रहा है तो तुरंत अपने माता-पिता को सारी जानकारी दें, बल्कि यह धार्मिक मुद्दे वाला प्रकरण शुरू होते ही अपने माता-पिता की जानकारी में यह बात लें आएं.

10. लव जिहाद में मुस्लिम लड़कियां भी बहुत अहम भूमिका निभातीं हैं. वे पहले तो हिंदू लड़कियों से दोस्ती बढ़ाती हैं, फ़िर धीमे धीमे उनके धर्म के प्रति प्रश्न करना शुरू कर देती हैं, उसके बाद उन्हें इस्लाम धर्म से संबंधित किताबें, ज़ाकिर नाईक जैसों के विडियो दिखाना शुरू कर देती हैं. वहीं दूसरी तरफ़ मुस्लिमों के मुकाबले हिंदू को धार्मिक शिक्षाईं दीं नहीं जातीं इसलिए वे जवाब नहीं दे पातीं हैं और चंगुल में फंस जाती हैं. इसलिए भी अपने धर्म के प्रति जानकारी होना और भी अधिक आवश्यक हो जाता है, साथ ही साथ इस्लाम जैसे मतों के बारे में भी जानकारी होना आवश्यक है ताकि पलट कर प्रश्न किया जा सके. इसलिए अगर हिंदू लड़की को धर्म के प्रति जानकारी है तो फ़िर जवाब दें , और अगर नहीं है तब तुरंत वहीं पर मुस्लिम लड़की को धार्मिक मुद्दे पर बात करने से रोक दें, तुरंत वहां से निकल लें और तुरंत उस मुस्लिम लड़की या मुस्लिम लड़कियों के उस ग्रुप से दूरी बना लें. अगर वे दबाव बनाने की कोशिश करें तो सीधा शिकायत दर्ज कराने की बात करें, अगर स्कूल, कोचिंग, कॉलेज, हॉस्टल में हों तो वहां के प्रशासन से और अन्य जगह हों तो कानूनी कार्रवाई से. और सबसे महत्वपूर्ण बात, ऐसी कोई भी घटना हो तो अपने माता-पिता को जरूर इस मामले से अवगत करा दें, इस तरह की कोई बात न छुपाएं. साथ ही साथ हिंदू लड़की अपने अन्य हिंदू लड़कियां जो उनकी दोस्त हैं उन्हें भी सावधान कर दें.

11. मुस्लिम लड़कियां बहुत से मामलों में हिंदू लड़कियों से दोस्ती बढ़ाकर उनकी मुलाकात मुसलमान लड़कों से करवातीं हैं, कई बार तो हिंदू नाम से मुसलमान लड़कों से मुलाकात करवातीं हैं. अगर ऐसी कोई स्थिति बनती है तो हिंदू लड़की बहुत ही ज़्यादा सतर्क हो जाए, कुछ भी हो जाए उस लड़के से बातचीत न बढ़ाए और फोन नंबर बिल्कुल न दें, अगर फोन नंबर दे भी दिया तो भी उस लड़के से बातचीत न बढ़ाएं, नंबर डिलीट करें और न ही सोशल मीडिया पर उस लड़के को जोड़ें. और उस मुस्लिम लड़की से भी दूरी बना लें और कुछ भी करके उस लड़के पर भरोसा न करें, बातचीत आगे न बढ़ाएं. अगर लड़का धमकी दे तो अपने माता-पिता, पुलिस और हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी दें. वह लोग बहुत भावनात्मक कार्ड खेलेंगे, विक्टिम कार्ड खेलेंगे मगर उनके झांसे में न आएं, साफ़ इंकार कर दें बुरा लगता है तो लगे, सुरक्षा पहली प्राथमिकता है. यदि कोई मुस्लिम लड़की दोस्त है तो भी उससे ज़्यादा नज़दीकी न रखें, अगर वह कहीं ऐसी जगह साथ चलने को कह रही जो जो आपने नहीं देखी है तो तुरंत सतर्क हो जाएं और जाने से मना कर दें.

12. मुसलमान लड़के या मुसलमान लड़की अपनी हिंदू लड़की जो उसकी दोस्त है उसके लिए मस्ज़िद, दरगाह का “प्रसाद” लाती है जिसे तवरूक्ख कहा जाता है. इसमें एक विशेष तरह की दवा मिलाई जाती है जिससे लड़की की कामवासना बहुत अधिक बढ़ जाती है. बहुत से मामलों में लव जिहाद की पीड़िता ने यह बताया है कि खाने में कुछ ऐसा रहता था जिसके बाद वे एकदम उस मुसलमान लड़के के पीछे पागल हो जातीं थीं. दरअसल मुसलमान लड़के पहले तो लड़की से काफ़ी दोस्ती बढ़ा लेते हैं बल्कि दोस्ती से मामला थोड़ा और आगे लव अफ़ेयर तक पहुंच ही चुका होता है , भरोसे में ले लेते हैं और उसके बाद जब इस तरह की चीजें खिला दी जाती हैं तब फ़िर लड़की को उस लड़के के सिवा और कुछ नहीं समझ आता और पहले से तैयार मुसलमान लड़के इसका फ़ायदा उठा लेते हैं. विदेशों में भी जो सेक्स स्केंडल रिंग के मामले सामने आए थे उसमें भी यह बात सामने आई थी कि लड़कियों को ड्रग्स वगैरह दे दिया जाता था. यह सब पूरी प्लानिंग के साथ किया जाता है, इसमें खुद मुसलमान लड़के के घरवाले से लेकर मौलाना, पीर फ़कीर सब शामिल रहते हैं.

13. ऐसे हालात में अगर कोई मुसलमान लड़का या लड़की सिर्फ़ हिंदू लड़की को कुछ खानें को दे रहा है तो वह कुछ भी बहाना करके स्पष्ट मना कर दे. फ़िर चाहे वह मस्जिद का प्रसाद है, मना मत करो, थोड़ा सा खा लो बोलकर कितना भी भावनात्मक दबाव क्यों न डाले लेकिन उसे नहीं खाना है. मन नहीं है, बाद में खा लूंगी, तबीयत ठीक नहीं लग रही कुछ भी बहाना करें मगर न खाएं. बहुत करें तो अगर घर के लिए दे रहा है, या खुद बहाना करके घर ले आएं और उसे फ़ेंक दें. किसी भी मुसलमान का दिया हुआ कुछ तभी खाएं जब वह या तो खुद भी उसी में से खा रहा हो या खा रही हो और ग्रुप में हों और कई लोग खा रहे हों. कोई मुसलमान लड़की या लड़का अकेले में केवल कुछ खाने को दे रहा है हिंदू लड़की को तो तुरंत सतर्क हो जाएं और मना कर दें या कुछ भी बहाना कर दें मगर उसे न खाएं.

14. लव जिहाद के लिए पूरी जबरदस्त प्लानिंग होती है. इसके लिए मस्जिद से लेकर आस पड़ोस में रहने वाले मुसलमान पड़ोसियों से लेकर हिंदुओं के घर दूध पहुंचाने वाले, या मज़दूरो का काम करने वालों से लेकर आसपास कबाड़ बिननें वाले, सब्जी बेचनेवाले, पंचर की दुकान चलाने वाले जैसे मुसलमान भी शामिल होते हैं जो यह नज़र बनाए रहते हैं कि इलाके में किस किस जगह पर किन किन हिंदू घरों में जवान लड़कियां हैं, उसकी पूरी लिस्ट तैयार होती है और तब उन इलाकों में मुसलमान लड़कों को काम पर लगाया जाता है. इसलिए जितना हो सके हरसंभव मुस्लिमों का आर्थिक बहिष्कार करें और उनसे कोई भी सामान न तो खरीदें और न ही घर में उनसे कोई काम करवाएं. अगर किसी कारणवश करना ही पड़ जा रहा है कोई और विकल्प नहीं है तो बहुत ही अधिक सचेत रहें इन्हें लेकर. मोबाइल रिचार्ज कराना हो, दर्जी से कपड़े सिलवाने हो या ब्यूटी पार्लर वगैरह जाना हो. सबसे पहले तो प्रयास करें कि इनमें से कोई मुसलमान न हो या मुसलमान द्वारा संचालित न किया जाता हो. अगर किसी कारणवश जाना पड़ रहा है तो अत्यधिक सावधान रहें.

15. लव जिहाद में हर उम्र की लड़कियों, महिलाओं पर इनकी नज़र रहती है. छोटी बच्चियों से लेकर अधेड़ उम्र की औरत तक सभी इनकी शिकार रहतीं हैं इसलिए सिर्फ हिंदू लड़कियों को ही नहीं हिंदू लड़कों और पुरूषों की भी बहुत जिम्मेदारी बनती है इन विषयों पर जागरूक होनें की.

16. चाहे कुछ भी हो जाए, हिंदू लड़कों को यह देखना होगा कि ज़्यादा मुसलमान लड़कों से दोस्ती न बढ़ाएं और उनका घर में आना जाना जितना हो सके उतना कम रखें. अगर किसी कारणवश आना जाना हो भी रहा है तो भी अपनी घर की लड़कियों, बहनों, भाभियों या जो भी कोई महिला है उससे मुसलमान लड़कों की बातचीत न होने दें, उन्हें सामने न पड़ने दें और घर की सभी लड़कियों, महिलाओं को भी मुसलमान लड़के से सावधान और सतर्क रहने को कहें. कम उम्र की छोटी बच्चियों को मुसलमान अगर कोई पड़ोसी है तो उसके घर न जानें दें. मुसलमान लड़के हिंदू लड़कों को भी कहते हैं कि लड़की से “सेटिंग कराने के लिए” मगर हिंदू लड़कों को तुरंत वहां सावधान हो जाने की आवश्यकता है और तुरंत मना कर दें वहीं पर. अगर क्रॉसचेक करना हो तो उस मुस्लिम लड़के या किसी भी मुस्लिम लड़के से अपनी सेटिंग किसी मुसलमान लड़की से करनें के लिए कहे तब उसका प्रतिक्रिया क्या होती है इसी से सब कुछ साफ़ हो जाएगा.

17. लव जिहाद के लिए वह महिलाएं और लड़कियां सबसे ज्यादा इनके निशाने पर होती हैं जो बाहर निकलकर काम करतीं हैं. चाहे कोई हिंदू लड़की या महिला किसी कंपनी में काम करती हो, स्कूल या कॉलेज में पढ़ाती हो अध्यापिका हो या कहीं भी कोई भी छोटा मोटा काम भी क्यों न करती हो. उसे बहुत अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है अपने साथ काम करनें वाले मुसलमान लड़कों से. यही नहीं काम करते समय बहुत बार ऐसे भी लोगों से सामना पड़ जाता है जिन्हें लड़कियां या महिलाएं पहले से नहीं जानती रहतीं हैं, ऐसे में नाम बदलकर मुसलमान लड़के हिंदू नाम रखकर हिंदू लड़कियों/महिलाओं को टारगेट करते हैं, उससे कैसे सावधान रहना है यह भी आगे बताया गया है.

18. अपनें किसी भी धार्मिक आयोजनों में या मुसलमानों द्वारा हिंदुओं के त्योहारों के लिए किए गए धार्मिक आयोजनों खासकर गरबा आदि में न तो किसी मुसलमान को बुलाएं, न तो उसको अंदर आनें दें और न ही खुद जाएं. गरबा महोत्सव में शामिल होने वाले हर लड़के का पहले आईडी प्रूफ चेक करें तभी उसे जानें दें.

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