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राजनीति में हमारी भूमिका शक्ति की समीक्षा-01/04

अनीति को रोकना और साधनों को बढ़ाना शासन का कार्य है। सबको समान अवसर तथा समान न्याय प्राप्त कराना राजकीय उत्तरदायित्व माना गया है। इन उत्तरदायित्वों को पूरा करने के लिए राज्य कर्मचारियों को न्याय और कानून के प्रति नितान्त निष्ठावान, निर्लोभी, निष्पक्ष एवं कर्तव्यपरायण होना चाहिए। कानून तो पुस्तकों में बन्द रहते हैं, उनका पालन करना और कराना कर्मचारियों का काम है। उनका चरित्रवान एवं उच्च आदर्शवादी होना ही प्रजा की सुख- शान्ति की गारण्टी हो सकती है।   

        यदि वह शासक वर्ग अपने कर्त्तव्यों और उत्तरदायित्वों की उपेक्षा करेगा तो प्रजा का न्याय पर से विश्वास कम होता चलेगा और हर क्षेत्र में अनीति पनपेगी, भ्रष्टाचार बढ़ेगा, रिश्वतखोरी पनपेगी और अधिकारियों को अपने पक्ष में करके दुष्ट लोग जनता को संत्रस्त करेंगे। टैक्स चुरायेंगे तथा निर्भय होकर नाना प्रकार के अपराध करेंगे। अपराधों की रोकथाम के समस्त उपाय एक ओर और राज्य कर्मचारियों की कर्त्तव्यपरायणता को एक ओर रखकर तोला जाय, तो कर्मचारियों की ईमानदारी ही अधिक महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगी। इसके अभाव में नाना प्रकार की योजनाएँ बनती- बिगड़ती रह सकती हैं, पर जनहित का, समस्या का ठीक समाधान न हो सकेगा।

क्रमशः जारी
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

समस्त आदरणीय एवं सम्माननीय मातृशक्ति एवं भ्राता जनों को हृदय से यथा योग्य सादर प्रणाम🙏🙏

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