नोएडा सेक्टर 27 वेंडर का बड़ा आरोप, वेंडिंग जोन आवंटन में हुआ है धांधली

नमस्कार,

नोएडा में वेंडिंग जोन का मामला कोई नयी नही है, वेंडिंग जोन के पात्रता को लेकर हमेशा ही सवाल उठते रहे है। हाल ही में नोएडा प्राधिकरण नें वेंडिंग जोन का ड्रा किया, जिसमें सेक्टर 27 अट्टा मार्केट के 300 वेंडरों को शामिल किया गया है। अब जबकि इन वेंडर के लिए वेंडिंग जोन बनाकर उसका उद्घाटन भी कर दिया गया है, फिर भी आज अट्टा मार्केट में पहले की तरह ही रौनक देखने को मिला। जिस मार्केट को खाली कराने और अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए 300 वेंडर को सेक्टर 38a बाटेनिकल गार्डन के पास अस्थायी वेंडिंग जोन बनाकर दिया गया है लगता है उस उद्देश्य को पूरा करना पाना नामुमकिन ही नही असंभव भी है। इस शब्द का प्रयोग मैं इसलिए कर रहा हूँ , कि आपके संज्ञान में होगा कि नोएडा से झुग्गी बस्ती हटाने के लिए ews मकान बनाये गये उसका वितरण भी कर दिया गया। लोगों नें मकान में रहना भी शुरु कर दिया लेकिन नोएडा के बीचों बीच बसे झुग्गी वाले आज भी जहाँ झुग्गी वही मकान के साथ मौजूदगी दर्ज करा रहे है। तो सवाल उठता है कि जो लोग मकान में रह रहे है वो लोग कौन है? आखिर मकान देने के बाद भी झुग्गियों को खाली क्यों नही करवाया गया। या फिर उन मकानों को किसी और को बेच दिया गया। संभव है कि यहाँ भी कुछ ऐसा ही चमत्कार हो जाये। जिन लोंगों को वेंडिंग जोन में जगह दिया गया है वो वेंडर ना हो और जो वेंडर है उसे जगह ना दिया गया हो।

कल ही क्षेत्र के सांसद माननीय महेश शर्मा जी नें उद्घाटन किया और आज वेंडिंग जोन को लेकर बड़ा आरोप लगा है। सेक्टर 27 के ही कुछ वेंडर नें प्राधिकरण के सीओं को पत्र लिखकर न्याय की मांग किया है। अब भारत में न्याय इतने सस्ता होता तो बात ही क्या था, यहाँ न्याय के लिए तो कई कई पीढ़ी तक न्यायिक लड़ाई लड़ने पड़ते है। नोएडा सेक्टर 27 के वेंडर कैमरे के सामने आकर जो कहा है वह आपकों एक बार जरूर सुनना चाहिए। विडियों में साफ-साफ नौकरशाही और राजनीतिक पर आरोप लगाया गया है। प्राधिकरण के द्वारा निकाले गए ड्रा पर भी सवाल खड़े किये है। वेंडरों का आरोप है उनका नाम पहले ही हटा दिया गया। एक वेंडर नें यह भी कहा है कि ड्रा कि प्रक्रिया को विपरित क्रम में चलाया गया ताकि जो पूराने वेंडर है उनका नंबर ही न आने पाये। प्राधिकरण और वेंडर की तू-तू मैं मैं चलती रहती है। लेकिन हाल ही में माननीय न्यायालय के द्वारा की गई टिप्पणि को भी ध्यान में रखना चाहिए। जिसमें नोएडा प्राधिकरण को सबसे भ्रष्ट ईकाई बताया।

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