नोए़डा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आज शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन किया

भारत की भूमि योग्य भूमि नहीं बल्कि कर्म और त्याग की भूमि है
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नोएडा के सेक्टर 82 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (श्रद्धानंद शाखा) द्वारा आज शस्त्र पूजन व पथ संचलन का आयोजन किया गया।
सेक्टर 82 के तिकोना पार्क (शाखा स्थल) पर शस्त्र का विधिवत पूजन किया गया ।तत्पश्चात वही से पथ संचलन शुरू होकर पाकेट 7 एस के वन होते हुए पाकेट 12 में समापन किया गया।

पथ संचलन में सभी स्वयं सेवको ने दंड एवं तलवार लेकर पंक्ति बुद्ध होकर कदमताल करते हुए अनुशासित तरीके से पथ संचलन किया ।
सभी स्वयंसेवको ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया और शस्त्र पूजन किया।

संघ के 6 उत्सव में एक है शाखा प्रमुख ने स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे राष्ट्र जीवन में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व के प्रसंग भरे पड़े हैं। प्रत्येक प्रसंग के साथ हमारे उत्सव भी जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष भर में कुल छह उत्सव मनाता है। उसमें यह एक है। यह पर्व असत्य पर सत्य की और अंधकार पर प्रकाश की विजय का घोतक है।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भारतीय जन मानस की आत्मा हैं। अयोध्या राजपरिवार में जन्म लेने वाला राजकुमार जब पिता की आज्ञा से महल छोड़ता है तो वह अपनी सामर्थ्य और सामाजिक संरचना के बल पर मर्यादा पुरुषोत्तम बन जाता है। सारी आसुरी शक्तियां शरणागत हो जाती हैं। पुरातन काल से हम शक्ति की उपासना करते रहे हैं।।संघ विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं।।विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना हुई।।यह दिन विजय, शौर्य, संयम, असत्य पर सत्य की विजय, शक्ति की पूजा एवं संघ की स्थापना का दिन है। हम लोग विजयदशमी का कार्य क्रम आज मना रहे है ।
96 वर्षों से बुराई पर अच्छाई को प्रतिस्थापित करने की कोशिश की जा रही है ।

उन्होंने आगे कहा कि मनुष्यत्व ही हिंदुत्व है और हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है। स्वदेशी और देशभक्ति के माध्यम से हम बड़ी से बड़ी शक्तियों को परास्त कर सकते हैं। भारत की भूमि भोग्य भूमि नहीं बल्कि कर्म और त्याग की भूमि है। भारत कभी पराजित नही रहा, सभी आक्रांताओं का मान मर्दन करने के लिए भारत भूमि ने अनेक वीर पुत्रों को जन्म दिया है। भारत भूमि शक्ति की आराधना करने वाला देश है।

यह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की पूजा करता है। इसलिए यह सोने की चिड़िया के साथ साथ विश्वगुरु भी रहा। हमें गर्व करने की आवश्यकता है कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति है।हम सत्य व न्याय के लिए सनातन काल से लड़ते आये हैं। कलियुग में शक्ति का प्रमुख स्रोत संगठन है, संघ की शक्ति है।

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