नोएडा स्वच्छता सर्वेक्षण और जमीनी हकीकत : अनिल के गर्ग

समाज जागरण नोएडा

स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में पहली बार इंदौर माँडल के बजाय नोएडा माँडल को पसंद किया जा रहा है। सबसे पहले नोएडा वासियों को और प्राधिकरण को इसके लिए बधाई मिलनी चाहिए। निश्चित तौर पर यहाँ तक पहुँचने में नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारी स्टाफ अधिकारियों नें बड़ी लगन से मेहनत की होगी। उन सबका बहुत बहुत आभार है। लेकिन सवाल फिर भी वही आखिर नोएडा के किस माँडल को पसंद किया गया है ? दूसरी महत्वपूर्ण बात आखिर स्वच्छता सर्वेक्षण में जो रैंक दिये जाते है वह किस आधार पर उनके नापने का पैमाना क्या होता है ? क्या शहर के कुछ हिस्सों को दिखाकर सर्वेक्षण करवा लिए जाते है या फिर एयरकंडीशन कमरे मे बैठकर पीपीटी के माध्यम से ही यह सर्वे कर दिए जाते है। हाल ही में नोएडा में पैंटिंग को लेकर सवाल उठा था। पैंटिंग के नाम पर खर्च किए जा रहे करोड़ो रुपयों को जो कि पब्लिक मनी है सह जगह पर इस्तेमाल करने की मांग की गई।

पिछले दिनों विशाल इंडिया में छपे खबर जिसमें नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग नें प्राधिकरण पर सवाल उठाते हुए पूराने स्टाफ के ट्रांसफर और पोस्टिंग का मुद्दा उठाया। जिसमें उन्होने सरकार नें नोएडा प्राधिकरण के लिए निजीकरण के मांग करते हुए कर्मचारी तथा अधिकारी के लिए वीआरएस की मांग रखा। उन्होने सुझाव दिया कि प्राधिकरण प्राधिकरण के प्लानिंग और फाइनेंस को निजी हाथों में सौप देना चाहिए। क्योंकि वर्तमान में जो अधिकारी और कर्मचारी लोग बैठे है एसी में बैठकर ही सारे काम कर लेते है। यही कारण है कि टवीन टावर 24 के बजाय 40 मंजिल के बन जाते है।

उनका कहना है कि नोएडा के किस पैमाने पर स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर दिए जाते है ? क्या नोएडा सेक्टर 19 बी ब्लाँक में नालियों को 12 वर्षों से जुगाड़ करके पंप के माध्यम से पानी को एक सीवर से खीचकर दूसरे में डाल दिये जाते है। यह पंप बी193 में लगा है और बी194 के नाली में इसका पानी छोड़ा जा रहा है जो कि बी195 होते हुए शायद सेक्टर 27 की तरफ निकलती है। यही बी195 में जीएसटी व एक्साइज के रिटायर्ड कमीशनर श्री शोभा राम जी रहते है। 10-12 साल से यही हालत है हालांकि बी ब्लाॅक के लिए एक बार टेंडर भी हो चुका है। नाली खुले होने के कारण यहाँ पर काफी तेज बदबू आते है। कई बार शिकायत करने के बाद भी दूर नही किया गया है। हालांकि एनजीटी नें भी मामले को संज्ञान में लेकर ठोस कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिया था शायद जुर्माना लगाने की बात भी कही गयी। लेकिन जुर्माना भी कौन सा जिम्मेदार आफिसर के जेब से जाना है वह भी तो सरकारी खजाना पर ही बोझ डालेगा। यही कारण है कि आज तक समस्या का समाधान नही किया गया है।

नोएडा सेक्टर 45 जहाँ पर लोगों को 5% आबादी के जमीन देकर बसाया गया है। नाली की व्यवस्था तो भगवान के भरोसे ही है। सभी नाली जाम है, गंदा पानी बाहर बिखरा पड़ा है। यह हालत पिछले 6 महीने से है सेक्टरवासियों नें कई बार शिकायत कर लिया लेकिन कोई सुनने वाला नही है। नाली से आ रहे बदबू के कारण आस पास के लोग परेशान रहते है।

स्मार्ट सिटी नोएडा में जहाँ एक तरफ नाली सीवर की समस्या है वही दूसरी तरफ अवैध कंस्ट्रक्शन भी चरम सीमा पर है। शहर के बीचों बीच में बसे झुग्गी झोपड़ी भी शहर के शान में चार चांद लगा रहे है। बात यही तक नही रुकती जहाँ झुग्गी वही मकान के स्लोगन भी नोएडा प्राधिकरण के बाहर बखूबी सुनने को मिलते है। नोएडा प्राधिकरण ने नोएडा को स्वच्छ और सून्दर बनाने के लिए कई हाउसिंग स्कीम लेकर आयी लेकर और योजना आकर भी चली गयी। लेकिन झुग्गी झोपड़ी टस से मस नही हुआ या यह कहे कि रात दूनी और दिन चौगुनी के रफ्तार से कारवां बढ़ता ही गया। आलम यह है कि जिसके लिए मकान बना था वह मकान भी ले लिए और झुग्गी झोपड़ी भी खाली नही किया। आज नोएडा सेक्टर 8,9,10, 16,17,18 और न जाने कितने दिल्ली के जहाँगीरपुरी बने हुए है।

स्मार्ट सिटी नोएडा की गाँव की बात न करना अपने आप मे एक बेईमानी होगी। नोएडा की गाँव में अवैध कंस्ट्रक्शन की भरमार लगी हुई। हालत यह है कि अगर किसी कारण मकान में आग लग जाये तो अग्निशमन वाहन को भी नही आ सकते है। प्राधिकरण के लचर और आलसीपन के कारण खुलेआम नियम को ताक पर रखकर कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। जहाँ एक तरह जी+3 के बजाय जी+6 तक कंस्ट्रक्शन किया गया है वही दूसरी तरफ गलियों को ऊपर से बिल्कुल ढक दिया गया है। गली की हालत यह है कि स्कूटी तक बड़ी मुश्किल से मोड़ी जा सकती है। एक दूसरे के छत मिले हुए है। अतिक्रमण करके गलियों में लेटरिंग तथा बाथरुम बनाने के लिए छज्जी डाले गए है। गाँव में गंदे पानी से उछलती गंदी नालियाँ और खंभे पर लटके सैकड़ो बिजली के तार का क्या कोई समाधान नही होनी चाहिए?

नोए़डा सेक्टर 44-45 सदरपुर छलेरा गाँव के बीच एक बाजार है जिसे हम सोमबाजार के नाम से जानते है। इस बाजार के कारण जहाँ लोगों को सब्जी सस्ती मिलती है वही दूसरी तरफ गाड़ियों को निकलने बढने में बड़ी दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। बाजार को शिफ्ट करने के लिए 60 दुकान वेंडिंग जोन परियोंजना के तहत बनाए गए, जिस पर लाखो रुपये खर्च की गई। लेकिन वेंडिंग जोन तो बस वालों का अड्डा बन गया जबकि बाजार में और भीड़ बढ़ते ही जा रहे है। इसके साथ ही नोएडा सेक्टर 43 के स्ट्रैलर ग्रीन पार्क के चारों तरफ प्राइवेट बसों की अवैध पार्किंग बनी हुई है और पार्क के गेट पर अवैध वेंडर और मनचलों का ठिकाना।

दिल्ली के जहाँगीरपुरी को देखकर तो यही लगता है जैसे कि केजरीवाल ने इसे पिछले सात सालों में बसा दिया हो। लेकिन नेता लोग दूसरे पर उंगली उठाने से पहले अपनी तरफ उठने वाली चार उंगलियों को भूल जाते है। आज के बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता जी कभी दिल्ली के इसी भाग के मेयर हुआ करते थे। दूसरी बात दिल्ली में बीजेपी लगातार एमसीडी में प्रतिनिधित्व करती रही है। आखिर उस समय में इस पर लगाम क्यों नही लगाया गया। यही हालत आज नोएडा के भी है राजनीतिक रोटियों सेकने के लिए सारे सरकारी स्कीम को झुग्गी झोपड़ी में लांच किये जाते है। इसका विशेष लाभ भी पार्टियों को मिलते है। आरोप लगाना कि पिछली सरकारों नें ऐसा किया तो यही कहा जायेगी कि वर्तमान सरकार उस पर क्या एक्शन ले रही है। शर्त ये है कि कौन अपना वोट बैंक कम करना चाहेगा। योगी सरकार के जितना बुल्डोजर विपक्ष के खिलाफ चला है उसका एक प्रतिशत भी अपने नेताओं के ऊपर चलता तो शायद बात कुछ और होती।

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