मृतक व्यक्ति को मृतक नर्स नें लगाया कोरोना वैक्सीन, सीतापुर chc का मामला

कोविड-19 के प्रति स्वास्थ्य विभाग लापरवाह

रिपोर्ट शालू तिवारी संवाददाता सीतापुर

सीतापुर/देश और प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण को लेकर शासन जहाँ चिन्तातुर है वहीं स्वास्थ्य महकमा भी इस पर नियन्त्रण पाने के लिये आम लोगों के वैक्सीनेशन मे काफी तत्परता से लगा हुआ है, जब कि सी०एच०सी०मिश्रित के स्वास्थ्य कर्मियों ने कोविड वैक्सीनेशन प्रक्रिया को ही खिलवाड़ बना कर रख दिया है।बताते चलें कि मिश्रित सी०एच०सी० अन्तर्गत ग्राम मरेली निवासी 65वर्षीय यदुनाथ प्रसाद अवस्थी पुत्र छोटे लाल को कोविड की पहली डोज 2अप्रैल 21को लगाई गयी थी उनको दूसरी डोज लगने का समय आ पाता इसके पहले ही 16अप्रैल 21को किन्हीं कारणोवश उनकी मृत्यु हो गई, इसके बाद आम लोगों की वैक्सीनेशन प्रक्रिया का सीएचसी के जिम्मेदारों ने उड़ा दिया मखौल। यहाँ मिश्रित क्षेत्र के ग्राम बरेठी में तैनात नर्स सोनेश्वरी जिसकी भी यदुनाथ प्रसाद अवस्थी की मृत्यु के बाद मृत्यु हो गई थी के द्वारा 14जनवरी 22को दूसरे डोज का टीकाकरण कर दिये जाने के बावत आनलाइन वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र विभाग के जिम्मेदारों द्वारा जारी कर दिया गया।ज्ञातव्य हो कि सी०एच०सी० मिश्रित के ग्राम मरेली निवासी एक मृतक ब्यक्ति के अस्पताल में कार्यरत रही एक मृतक नर्स व्दारा कोविड की दूसरी डोज लगा दी गई।और चौकाने वाला यह मामला मीडिया की सुर्खियाँ बन गया जब कि सीएचसी मिश्रित के नवनियुक्त अधीक्षक डा०आशीष सिंह उसको ठण्डे बस्ते में दफन कर देने की प्रक्रिया में जुट गये।जानकार सूत्र बताते हैं कि नर्स सोनेश्वरी की मौत हो जाने के बाद भी अस्पताल की लिखा पढ़ी में उसे मृत नहीं दिखाया गया तभी तो मृतक हो चुके ब्यक्ति को मृतक हो चुकी नर्स ने लगा दिया वैक्सीन का दूसरा डोज। हैरत अंगेज इस मामले में विभागीय लोगों की लचर नीतियांँ और अनदेखी खुलेआम उजागर हो रही है शासन और जिला प्रशासन को गम्भीरता से जांँच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की आवश्यकता है। क्योंकि प्रकरण का मीडिया में प्रकाशन होने के बावजूद भी सीएचसी अधीक्षक डॉ आशीष सिंह सहित अन्य जिम्मेदारों के कानो पर जूं तक न रेंगना,इस बात का प्रमाण है कि दूषित नीतियों के चलते यहाँ सब कुछ राम भरोसे ही चल रहा है। और मृतक हो चुके व्यक्ति को मृतक हो चुकी नर्स लगा रही है कोविड- वैक्सीन। पूँछने पर सी एच सी अधीक्षक ने बताया कि कोविन पोर्टल पर मृतक हो चुकी नर्स के नाम पर आईडी पहले से बनी हुई है तभी प्रमाण पत्र जारी हो गया लेकिन उनसे जब यह पूछा गया कि मृतक हो चुके व्यक्ति के जब दूसरा डोज लगा ही नहीं तो फिर कैसे जारी हो गया प्रमाण पत्र जिसके लिए वे मानवीय और मशीनरी चूक को हो ही जिम्मेदार ठहराकर अपना और अधीनस्थों का बचाव करते हुये नजर आये।

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