जिलाधिकारी के आदेश का अवहेलना कर रहे मोतिहारी के अफसर, 93 फर्जी शिक्षकों पर नही कर रहे केस।

समाज जागरण (चम्पारण समाचार)
बिहार का सरकारी सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अब तो छोटे स्तर के अधिकारी भी अपर मुख्य सचिव के आदेश को रद्दी की टोकरी में फेंक दे रहे। सुशसान राज में अफसर* इतने बेलगाम हो गये हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं रहा। तभी तो पूर्वी चंपारण में शिक्षक नियोजन में फर्जी प्रमाण पत्र देने वाले 93 अभ्यर्थियों पर केस दर्ज करने को लेकर अधिकारी दो महीने से एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। बताया जा रहा कि अधिकारियों ने फर्जी प्रमाण पत्र वाले शिक्षक अभ्यर्थियों को बचाने का ठेका ले लिया है। जानकारी के अनुसार जिला स्तर के कार्यालय से लेकर प्रखंड व पंचायत नियोजन इकाई इस पूरे गोरखधंधे में शामिल हैं।
अपर मुख्य सचिव के आदेश को ठेगा दिखा रहे छोटे अफसर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने 8 जनवरी 2022 को ही मोतिहारी के डीईओ को फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल होने वाले शिक्षा शिक्षक अभ्यर्थियों पर केस दर्ज करने को कहा था. इसके पहले पूर्वी चंपारण के डीएम ने भी 2 सितंबर 2021 को ही जिला शिक्षा पदाधिकारी को इस संबंध में आदेश दिया था. इसके बाद भी 93 शिक्षक अभ्यर्थियों पर अब तक केस दर्ज करने की कार्रवाई नहीं की गई है.अधिकारी एक-दूसरे को पत्र भेज केस दर्ज कराने का घोड़ा दौड़ा रहे।

आपको बता दें कि डीईओ लेटर का खेल खेल रहे हैं।मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्र में कहा गया है कि प्रारंभिक शिक्षक नियोजन वर्ष 2019-20 के तहत पहले, दूसरे एवं तीसरे चक्र की काउंसलिंग में फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाली की शिकायत मिली थी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों के शिक्षक पात्रता प्रमाण पत्र,सीटीईटी-बीटीईटी प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए निर्देश दिये गए थे। जिसके बाद बीटीईटी का सत्यापन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से तथा सीटीईटी प्रमाण पत्र का सत्यापन वेबसाइट से 12 जनवरी 2022 के द्वारा गठित कमेटी से कराई गई. डीईओ ने अपने पत्र में कहा है कि जांच के बाद फर्जी प्रमाण पत्र वाले अभ्यर्थियों पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए 18 फरवरी को ही आदेश दिया गया. लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है.

मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी आगे लिखते हैं कि कुछ अभ्यर्थियों के द्वारा शिक्षक उपयोगिता प्रमाण पत्र का पुनः जांच कराने का अनुरोध किया गया. जिस आलोक में बीटीईटी का बिहार बोर्ड से कराई गई. जांच के बाद प्रतिवेदन के आधार पर कुल 23 शिक्षक अभ्यर्थियों का शिक्षका प्रमाण पत्र अवैध पाया गया. वहीं, प्रशिक्षण उतीर्णता के 6 कैंडिडेट का प्रमाण पत्र भी अवैध पाया गया है. ऐसे में निर्देश दिया जाता है कि 2 दिनों के अंदर संबंधित अभ्यर्थियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर इसकी जानकारी दें।

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