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दोस्ती से ज्यादा

आकृति चुपचाप अपने कमरे में बैठी कुछ किताबें पढ़ रही थी । जो उसकी रूचि की थीं । और एक तरफ आस्था जो उसकी बेहद करीब दोस्त थी । अपने कुछ सामान समेटने में लगी पड़ी थी । इन दोनों की दोस्ती इतनी पक्की थी कि उनके बीच में कोई दरार की सम्भावना न थी । हाँ एक बार मुकेश आया था आस्था से मिलने , लेकिन उस वक्त आस्था घर पर नहीं थी तो मुकेश ने पूछा ‘आस्था कहाँ है? आकृति ने तपाक उत्तर दिया आस्था कहीं काम से गई है ,तुम्हे क्या है? मुकेश भड़का और बोला वो मेरी दोस्त है तुम्हे किसने हक़ दिया ये सवाल करने का । आकृति का पारा सातवें आसमान पर था । मुकेश को जैसे तैसे लड़- झगड़कर घर भेज दिया लेकिन आकृति मन ही मन बुदबुदाने लगी ; आज आने दो आस्था को , मैं उससे पूछती हूँ कि उसने मुझसे झूठ क्यों बोला कि उसका कोई दोस्त नहीं है । जो उसकी इतनी परवाह करता हो । थोड़ी देर बाद आस्था हॉस्टल पहुँचती है । दोनों की बहस जारी है आस्था और आकृति एक दूसरे पर प्रश्न भरी निगाहों से सवाल जवाब करने लगीं । एक साथ रहने वाली ये सहेलियां इतनी भयानक स्थिति में आ जाएंगी किसी ने सोचा नहीं था । उन दोनों ने मनमुटाव के कारण कुछ दूरी बना ली । लेकिन अब कमरा एक ही है और होस्टल में थोड़ी एडजस्टमेंट तो करनी पड़ती है । आस्था और आकृति का साथ रहना भारी पड़ रहा था । एक दिन मुकेश का कॉल आया तब आस्था बाथरूम में थी और आकृति नें कॉल रिसीव कर लिया । ‘हैलो’! मुकेश का स्वर ! आकृति ‘कौन’ ? मन ही मन सोचते हुए कहीं ये आवाज मुकेश का तो नहीं ? आकृति हाई अलर्ट पर थी उसने पूछा तुमने फ़ोन क्यों किया । मुकेश ने कहा! ; मैंने तुमसे बात करने के लिए कॉल नहीं किया है । ये बताओ आस्था कहाँ है ? उसको बोलो मुकेश का फ़ोन है । आकृति ने कहा ; मैं क्यों बोलूं ? तुम बहुत बेशर्म इंसान हो । और फ़ोन काट दिया । अंदर से आवाज आई आस्था ने पूछा कौन ? किसका कॉल आया था आकृति? , आकृति ने कहा मुझसे बात मत करो । खुद आकर देख लो किसका फ़ोन था ।
मुकेश आकृति के बारे में सोचने लगा , कैसी लड़ाकू लड़की है ये , जब देखो पारा हाई रहता है । सीधी मुँह बात भी नहीं करती । धीरे -धीरे मुकेश के मन में आकृति घर कर गई । परंतु आकृति के मन में ऐसा कुछ भी नहीं था । वहीं दूसरी ओर आस्था से मुकेश का संपर्क कुछ कम हो गया । आस्था समझ नही पा रही थी इस बड़े बदलाव का कारण क्या है उसे शक हुआ कहीं आकृति और मुकेश ????? नहीं! नहीं! ऐसा नहीं हो सकता । मुकेश तो सिर्फ मुझे चाहता है । जरूर आकृति ने ही उसे फंसाया होगा अपने जाल में , क्योकि मुझसे नफरत करती है और मेरी खुशियों को ग्रहण लगाने की नित नई तरकीब सोचती होगी । क्या करूँ ?? आस्था सोचने लगी । आकृति इन सब बातों से अंजान थी । उसको नही पता था कि मुकेश का रवैया उसके लिए अब बदल चुका है । मुकेश आकृति का कांटेक्ट जैसे तैसे निकालता है और उसे मिलने को सरयू रिजॉर्ट बुलाता है आकृति को फोन पर बात करते हुए आस्था ने सुन लिया । अब उसका शक यकीं में बदल गया । किन्तु आकृति मुकेश से मिलने को बिलकुल तैयार नहीं थी , वो उससे नफरत करती थी लेकिन जब मुकेश ने कहा मैं आखिरी बार तुमसे मिलकर कुछ बताना चाहता हूँ तुम प्लीज आने से मना मत करना । आकृति ने खुद को समझाया , एक बार मुकेश से मिल लेना चाहिए आख्रिर क्या कहना चाहता है ? दोनों सरयू रिजॉर्ट पहुचते हैं । मुकेश अपना प्रस्ताव रखता है और आस्था को केवल अच्छा दोस्त बताता है । आस्था दूर खड़ी सारी बातें सुन रही थी , उसकी आँखों में आंसू थे । जब आकृति ने कहा तुमने मेरी दोस्त को चीट किया है क्या भरोसा आज मुझे और कल किसी और को धोखा देते । मैं तो पहले ही जानती थी तुम सही नहीं हो , और आस्था को भी तुमसे दूर रहने को कहा , लेकिन उसके आँखों पर तुम्हारे प्यार की पट्टी जो पड़ी थी । जिसके कारण उसने मुझे अपनी दोस्ती को भुला दिया । आस्था को सब कुछ मालूम हो गया था सिवाय पछताने का कोई और उपाय शेष नहीं था उसके पास । आस्था उन दोनों के समीप आ खड़ी हुई , मुकेश आस्था को देखकर दलीलें पेश करने लगा । आकृति पर ही अपना आरोप मढ़ दिया । किन्तु आस्था शर्मिंदा थी उसने आकृति से माफ़ी माँगा और कहा” मुझे तुम पर यूँ शक नहीं करना चाहिए था ।तुमने मेरी जिंदगी बर्बाद होने से बचाई है अब मैं जान गयी हूँ की मुकेश और तुम्हारे बिच में कुछ भी नहीं था । और उसने मुकेश को कहा ,बेहतर होता कि तुम मेरे सिर्फ दोस्त ही होते उससे बढ़कर नहीं , तो मुझे भी इतना दर्द नहीं सहना पड़ता । मुकेश मैं तुम्हे कभी माफ नहीं करूंगी । तुम्हारे कारण आज मैं दोराहों पर खड़ी हूँ । लेकिन मुझे ख़ुशी इस बात की है कि मेरी दोस्त आकृति आज भी मेरे साथ खड़ी है ।

गायत्री शर्मा

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