fbpx

विनम्रता

विनम्रता
एक बार एक राजा अपने कुछ सेवको के साथ शिकार करने जंगल मे गया
शिकार करते करते वे बहुत दूर निकल गए दोपहर का समय हो गया । सब थककर चूर हो चुके थे और गरमी से बेहाल थे । राजा को तेज प्यास लगी थी लेकिन आसपास कहीं भी पानी का काई स्रोत नही थी । राजा एक पेड़ के नीचे आरम करने लगा और सेवक पानी की तलाश मे निकल पड़े । थोड़ी दूर जाने पर सेवकों ने देखा कि एक वृध्द व्यक्ति अपनी झोंपड़ी के बाहर बैठा लोगों को पानी पिला रहा है । सेवकों ने उस वृध्द व्यक्ति से कहा हम राजा के सेवक है राजा पास के जंगल मे विश्राम कर रहे है। उन्हे तेज प्यास लगी है। अत; जल्दी से उनके लिए पानी दो।
राजा के सेवकों व्दारा आदेश देना उस वृध्द को अच्छा नही लगा । उसने सेवकों से कहा जिसे भी पानी पीना हो वह यहां आकर पिए ।
सेवक राजा के पास गए और सारी बात कह सुनाई । तब राजा अपने सेवकों के साथ वृध्द व्यक्ति के झोपड़ी के पास पहुचा और आरद के साथ बोला बाबा मुझे तेज प्यास लगी है वृध्द व्यक्ति ने कहा।
राजा ने भर पेट पानी पीकर वृध्द व्यक्ति को धन्यबाद दिया फिर उस से पुछा बाबा जब मेरे सेवक पानी मांगने आए थे। तो आपने इंकार केयों कर दिया था।
वृध्द व्यक्ति बोला महाराज । मै इन्हें पानी अवश्य दे देता अरग ये विनम्रता के साथ बात करते आप राजा होते हुए भी अत्यंत विनम्र है जबकि आपके सेवकों मे इसका पूर्णतया है।
वस्तुत: विनम्र व्यक्ति ही राजा बनने या उच्च पद को सुशोभित करने की पात्रता रखता है। साधारण व्यक्ति विनम्रता के अभाव मे उच्च पदों तक नहीं पहुंत पाते।

Please follow and like us:
%d bloggers like this: