दवाई बैंक का स्वागत, योग और आयुर्वेद को भी मिले सहारा

नोएडा समाज जागरण

नोएडा लोकमंच और नोएडा प्राधिकरण के द्वारा आज नोएडा सेक्टर 12 बारात घर में दवाई बैंक की शुरुआत की गई है यह एक अनुठा पहल है, और मुंबई के बाद यह दूसरा है। जिसका आज जिला गौतमबुद्धनगर के सांसद महेश शर्मा व नोएडा प्राधिकरण के सीओ रितु महेश्वरी ने फीता काटकर शुभारमभ किया। दवाई बैंक के लिए नोएडा में 33 कलेक्शन सेंटर बनाए गए है। एक महीने में हजारों की दवा जमा भी हो चुकी है। दवा बैंक से फ्रि मे दवा मिलेगी लेकिन इसके लिए रजिस्टर्ड डाक्टर की पर्ची दिखाना होगा। अभी तक इस बैंक में लगभग 475 तरीके की दवा लोगों के द्वारा दान दिया गया है। दवा वैंक की समय 10 बजे खुलने की है और 6 बजे बंद होने की है। इसके अलावा साप्ताहिक बंदी शुक्रवार की होगी। नोएडा लोकमंच 23 वर्षों से नोएडा शहर में लगातार जनहित में कार्य कर रही है। जाने माने अंतर्राष्ट्रीय गायक ब्रह्मपाल नागर ने दवा बैेक को लेकर एक बेहतरी गाना बनाया है जिसमें लोगों को दवा दान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

दवा बैंक खुलना समाज के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, इसमें कोई दो राय नही है लेकिन समाज में बहुत सारे संगठन लोगों को दवाई की जरूरत न हो इसको लेकर काम कर रही है। जाहिर है कि दवाई लेने का मतलब है कि वह बीमार है, अगर बीमार है जो उसको दवाई लेने की जरूरत भी है। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा दो महत्वपूर्ण योजना जनहित में चलाई गई है, जिसमें एक है आयुष्मान भारत , दूसरा है फिट इंडिया।

हमारे क्षेत्र में लगातार कुछ स्वयंसेवक फिट इंडिया पर काम कर रहे है, जिसमें योग और आयुर्वेद मुख्य है। शहर में अगर देखे तो पतंजलि योगपीठ, भारतीय योग संस्थान, ब्रह्माकुमारी जैसी संस्थाएँ लगातार प्रयासरत है कि लोग बीमार ही न पड़े। जाहिर सी बात है कि फिट इंडिया का स्लोगन भी यही होनी चाहिए और है भी। लेकिन जिस प्रकार से मेडिकल साइंसेस को प्रोत्साहन दिया जा रहा है उस प्रकार से अगर इन छोटे छोटे समूह को भी प्रोत्साहन देकर फिट इंडिया मुवमेंट सो जोड़ा जाय तो हमे दवा की आवश्यकता कम से कम होगा। हम सभी जानते है कि एलोपेथ कट और कील पर काम करती है और योग और आयुर्वेद इसके विपरित काम करती है। जीओ और जीवन दो के साथ ऋषि मुनी परंपरा भी इससे जुड़ी हुई है।

ऐसे तो योग निशुल्क होते है और होनी भी चाहिए, लेकिन प्राधिकरण और संस्थाओं के द्वारा समय समय पर अगर इनको प्रोत्साहित किया जाय तो निश्चित तौर पर भारत में योग और आयुर्वेद का उद्भव संभव है। सबसे बड़ी बात इससे समाजिक संरचनाओं को पुनर्जिवित करने मे मदद मिलता है। लोगों में स्वस्थ्य वातावरण का निर्माण होते है और हमारा समाज स्वस्थ्य विचार धाराओं के साथ आगे बढ़ता है। दवाई बैंक के साथ अगर योग निरोग को भी बढ़ावा दिया जाय तो एक बेहतर समाज बनाने में मदद मिलेगा। योग से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़े इसके लिए हमारे क्षेत्र के प्रतिनिधि और समाजिक संस्थाओं को निरंतरण प्रयास करती रहनी चाहिए। पार्कों में योग के लिए अच्छी और स्वस्थ्य वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए जो कि नही हो रहा है।

यह लेखक का अपना विचार है।

Please follow and like us:
%d bloggers like this: