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*लड़ने दो बूढों को*

💥🔆 सुप्रभात 💥🔆

पिछले 15- 20 दिन से देख रहा हूँ , कॉलेज और हॉस्टल के बाहर और आसपास के पार्क में प्यार पनप रहा है
गर्ल्स और बॉयज एक दूजे की बाहों में सच्चा लव और रोमांस एन्जॉय कर रहे है
और मैं- मैं आज अपनी आंटी के घर आया हूँ

मैं फस्ट फ्लोर पर हूँ और जब से आया हूँ ग्राउंड फ्लोर से आती अंकल और आंटी की नोक-झोंक, खट पट की आवाज़ें सुन -सुन कर पक गया हूँ

सोच रहा हूँ हद है इन लोगों की भी, कहां जवान लड़के लड़कियां इस बसंती मौसम में चारो और प्यार की खुशबू फैला रहे है और यहाँ इन 60-65 साल के कपूर अंकल आंटी का झगड़ा ही ख़त्म नहीं होता

बचपन से उन्हें देखता आ रहा हूँ तो एक बार के लिए मैंने सोचा अंकल और आंटी से बात करू क्यों लड़ते हैं, हर वक़्त आख़िर बात क्या है फिर सोचा मुझे क्या मैं तो यहाँ दो दिन के लिए आया हूँ मगर थोड़ी देर बाद आंटी की जोर-जोर से बड़बड़ाने की आवाज़ें आयी तो मुझसे रहा नहीं गया
ग्राउंड फ्लोर पर गया तो देखा अंकल हाथ में वाइपर और पोछा लिए खड़े थे

मुझे देखकर मुस्कराये और फिर फर्श की सफाई में लग गए अंदर किचन से आंटी के बड़बड़ाने की आवाज़ें अब भी रही थी

कितनी बार मना किया है
फर्श की धुलाई मत करो
पर नहीं मानता बुड्ढा
मैंने पूछा अंकल क्यों करते हैं आप फर्श की धुलाई जब आंटी मना करती हैं तो”
अंकल बोले “दिनेश बेटा, फर्श धोने का शौक मुझे नहीं इसे है। मैं तो इसीलिए करता हूं ताकि इसे न करना पड़े। ये सुबह उठकर ही फर्श धोने लगेगी इसलिए इसके उठने से पहले ही मै धो देता हूं
क्या😳
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ।
अंदर जाकर देखा आंटी किचन में थीं।”अब इस उम्र में बुढ़ऊ की हड्डी पसली कुछ हो गई तो क्या होगा। मुझसे नहीं होगी खिदमत।”
आंटी झुंझला रही थीं।
परांठे बना कर आंटी सिल बट्टे से चटनी पीसने लगीं
मैंने पूछा “आंटी मिक्सी है तो फिर??
*तेरे अंकल को बड़ी पसंद है सिल बट्टे की पिसी चटनी।बड़े शौक से खाते हैं। दिखाते यही हैं कि उन्हें पसंद नहीं।”*
उधर अंकल भी नहा धो कर फ़्री हो गए थे।उनकी आवाज़ मेरे कानों में पड़ी,” बेटा,इस बुढ़िया से पूछ रोज़ाना मेरे सैंडल कहां छिपा देती है, मैं ढूंढ़ता हूं और इसको बड़ा मज़ा आता है मुझे ऐसे देखकर।” मैंने आंटी को देखा वो कप में चाय उड़ेलते हुए मुस्कुराईं और बोलीं,”हां मैं ही छिपाती हूं सैंडल, ताकि सर्दी में ये जूते पहनकर ही बाहर जाएं,देखा नहीं कैसे उंगलियां सूज जाती हैं इनकी।”हम तीनो साथ में नाश्ता करने लगे
इस नोक झोंक के पीछे छिपे प्यार को देख कर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।नाश्ते के दौरान भी बहस चली दोनों की।
अंकल बोले “थैला दे दो मुझे , सब्ज़ी ले आऊं”
नहीं कोई ज़रूरत नहीं, थैला भर भर कर सड़ी गली सब्ज़ी लाने की”।आंटी गुस्से से बोलीं।अब क्या हुआ आंटी-मैंने आंटी की ओर सवालिया नज़रों से देखा, और उनके पीछे-पीछे किचन में आ गया।
“दो कदम चलने मे सांस फूल जाती है इनकी,थैला भर सब्ज़ी लाने की जान है क्या इनमें”
बहादुर से कह दिया है वह भेज देगा सब्ज़ी वाले को।”
“बेटा ,मॉर्निंग वॉक का शौक चर्राया है बुढ़‌ऊ को”
तू पूछ उनसे क्यों नहीं ले जाते मुझे भी साथ में।चुपके से चोरों की तरह क्यों निकल जाते हैं “आंटी ने जोर से मुझसे कहा”
“मुझे मज़ा आता है इसीलिए जाता हूं अकेले।”
अंकल ने भी जोर से जवाब दिया ।

अब मैं हॉल में थी,अंकल धीरे से बोले
बेटा, रात में नींद नहीं आती तेरी आंटी को ,सुबह ही आंख लगती है कैसे जगा दूं चैन की गहरी नींद से इसे ।”इसीलिए चला जाता हूं गेट बाहर से बंद कर के।”

इस नोक झोंक पर मुस्कुराती मैं वापस फस्ट फ्लोर पर आ गया
कुछ देर बाद बालकनी से देखा अंकल आंटी के पीछे दौड़ते हुए आ रहे हैं।
“अरे कहां भागी जा रही हो मेरे स्कूटर की चाबी ले कर
इधर दो चाबी।”
“हां नज़र आता नहीं पर स्कूटर चलाएंगे। कोई ज़रूरत नहीं। ओला कैब कर लेंगे हम।”आंटी चिल्ला रही थीं।
“ओला कैब वाला किडनैप कर लेगा तुझे बुढ़िया।”।
“हां कर ले, तुम्हें तो सुकून हो जाएगा।”

अंकल और आंटी की ये बेहिसाब नोंक-झोंक तो कभी ख़तम नहीं होने वाली थी मगर मैंने आज समझा था कि इस तकरार के पीछे छिपी थी इनकी एक दूसरे के लिए बेशुमार मोहब्बत और फ़िक्र
*मैंने आज समझा था कि प्यार वो नहीं जो कोई “कर” रहा है*
*प्यार वो है जो कोई “निभा” रहा है*

जय हिन्द

*पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए 45 जवानों का बदला लेने के लिए हम सब सेना और सरकार के आभारी हैं।*

*सदैव प्रसन्न रहिये*
*जो प्राप्त है-पर्याप्त है*

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