2 बम के साथ पत्रकार गिरफ्तार, बम को लानत भेजेंगे।

मजहब नही सिखाता है आपस में बैर करना। तो फिर सिखाता कौन है एक पत्रकार को बम फेकना। आखिर पत्रकार के हाथ में कलम होनी चाहिए या बम या इस नेरेटिव को भी बदल दिया जायेगा कि वो पत्रकार बम लेकर बम के बारे में रिपोर्टिंग करने जा रहा था। क्या बम का रिपोर्टिंग करना गुनाह है। जैसे एक हैडमास्टर के आतंकी औलाद भटके हुए नौजवानों में शामिल कर लिया जाता है वैसे ही यहाँ पर बम लेकर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को भटके हुए पत्रकार कहकर छोड़ दिया जायेगा।

जिस प्रकार मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित एक पत्रकार और टीवी एंकर अपने ही गुट के लिबरल पत्रकार को यह कहकर क्लीन चिट दे देता है कि हत्या की नही गई है बल्कि पीतल की गोली गलती है उसके सिर में घुस गयी थी जिसके लिए लाखों लानते उस पीतल की गोली को भेजा गया। शर्म से वो पीतल के गोली नें भी आत्महत्या कर लिया होगा। बाद में पता चला की पत्रकार की निर्मम हत्या की गई है।
उसी ईमानदार पत्रकार के चैनल एक जेहादी के धमकी के बाद टवीट को डिलिट कर देता है और कंटेट बदल देता है। वही @thequint के एक दंगाई को हीरो बनाकर पेश करता है। और अब कश्मीर में एक पत्रकार को बम फेकने के लिए पकड़ा जाता है। हो सकता है इसे मिडिया का नया दौर साबित किया जाय। खैर जो भी हो बम को लानत भेजना जरूरी है जिसके कारण एक जेहादी मानसिकता के पत्रकार पकड़ा गया।

इस अराजकता और नये दौर की पत्रकारिता के लिए भारत के सरकार भी बराबर की दोषी है। एक आदमी जो सबके लिए समान शिक्षा और समान नागरिक संहिता का मांग करता है उसे जेल भेज दिया जाता है। वही एक संत के हत्या और लोगो को सर तन से जुदा करने की धमकी देने वाले दिल्ली के विधायक आज तक खुलेआम घुम रहा है। जिस पर आज मुख्य सचिव के साथ मार-पीट करने का आरोप भी सही साबित हुआ है। भारत में हिदुत्व के बात करने वालों को जेल भेजा जाता है और हिंदू को गाली देने वालों को पाल कर रखा जाता है। सरकार ऐहसान दिखाना चाह रही है कि देखो मै हूँ इसलिए तुम बचे हो। खुलेआम एक सुप्रिम कोर्ट के वकील वसीम रिजवी को धमकी देने वाले का क्या हुआ कुछ भी नही।

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