पत्रकारिता पुनः भारतीय राष्ट्रवाद का ध्वजवाहक बने:- डॉ विवेकानंद मिश्र

टिकारी (विश्वनाथ आनंद):- गया के स्थानीय डॉक्टर विवेकानंद पथ स्थित डॉ विवेकानंद मिश्र के आवास पर विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े सुप्रसिद्ध चिकित्सक द्वय डॉक्टर विवेकानंद मिश्र एवं डॉक्टर बीरेंद्र चंद्रयान ने पत्रकारिता दिवस पर एक संयुक्त बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लेकर पत्रकारिता ने सकारात्मक वातावरण बनाया था l तथा राष्ट्रवादी क्रांति का उपकरण बनकर विचार प्रसार का प्रभावी माध्यम बनाया था, आज पुन: इसकी आवश्यकता पहले से अत्यधिक बढ़ गई है। क्योंकि भारतीय जनतंत्र का पत्रकारिता चतुर्थ स्तंभ कहा जाता है सत्य का अनुसंधान पत्रकारिता का धर्म है, कर्तव्य है। विकास एवं परिवर्तन का क्रांतिकारी रथ राष्ट्रवाद में समाहित होकर सतत चलता रहे। आज 50,000 से ज्यादा समाचार पत्र पत्रिकाएं हिंदी में प्रकाशित हो रही है , 20,0000000 अनुमानित इसके पाठकों संख्या है, जिसमें अधिकांश समाचारपत्र राजनीतिक समाचारों की बाढ़, आरोप-प्रत्यारोप, हिंसा, अराजकता, अपसंस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। स्वाभाविक है कि समाचारपत्र ऐसी खबरों से भरे पड़े रहते हैं जिससे राष्ट्र विरोधी तत्वों का प्रचार प्रसार होता है, उसे बल प्रदान होता है, मनोबल बढ़ता है,प्रोत्साहन मिलता है जो किसी भी दृष्टिकोण से वर्तमान और भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। उल्लेखनीय है कि राजनीतिक जीवन के सभी क्षेत्रों में सृजनात्मक कार्य हो रहे हैं किंतु समाचार माध्यमों में अपेक्षाकृत इसे समुचित स्थान नहीं मिल रहा है। इसका ईमानदारी से मूल्यांकन होना चाहिए। हालांकि अनेक बाधाओं को पार करते हुए आज पत्रकारिता ने सफलतापूर्वक लंबी दूरी तय की है जो प्रशंसनीय है। *इस अवसर पर बिहार के जाने माने साहित्यकार आचार्य राधामोहन मिश्र माधव* जी ने कहा कि आज अनीति, विकृति और दुष्कृति का विरोध करते हुए अपने स्थापना काल 1920 से लगातार प्रकाशित हो रहे दैनिक आज ने राष्ट्रवाद को प्राथमिकता देकर निरंतर अपनी लोकप्रियता बनाई है जो प्रशंसनीय है।
*मगध विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष रहे शिक्षा में प्रोफेसर उमेश चंद्र मिश्र शिव* ने कहा धू-धू कर जल रही धरती पर आज पत्रकारिता का दायित्व सचमुच पहले से अधिक बढ़ गया है। समय आ गया है कि स्पष्ट दिशा तय करने का, राष्ट्रप्रेम या राष्ट्रद्रोह को गंभीरता पूर्वक समझने का।
अंत में *डॉक्टर विवेकानंद मिश्रा एवं डॉक्टर वीरेंद्र चंद्रयान* ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि छल, छद्म, कपट तिकड़म की घृणित नीति से उपजी अनेक समस्याओं का अध्ययन तथा निराकरण का समुचित प्रयास करने का मार्ग प्रशस्त हो। आज जिस तरह सामाजिक जीवन के तानेबाने को क्षुद्र स्वार्थ के चक्कर में मुट्ठी भर लोगों ने तहस-नहस कर दिया है, ऐसे तत्वों पर निगरानी रखने, राष्ट्र के व्यापक हित में उजागर करने, प्रमुखता से प्रकाशित करने, राष्ट्र विरोधी नीति से से प्रीति करने वाले का सामाजिक बहिष्कार करने के लिए जन जागरूकता अभियान की तरह योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
इसके अलावा विभिन्न सामाजिक राजनीतिक संगठनों से जुड़े व्यक्तियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जिसमें प्रमुख रुप से शिवचरणबाबू डालमिया, रामकृष्ण त्रिवेदी
डा. सच्चिदानंद पाठक, आचार्य
अरुण मिश्र मधुप, आचार्य राघवेंद्र मिश्र, वीरेंद्र मिश्र, रविरंजन मिश्र, बालेंद्र पांडेय, राष्ट्रीय कवि सूर्यानंद मिश्र , रीना पांडे, रीना पासवान, विवेक कुमार, शंभू गिरी, विजय गुप्ता,रविभूषण भट्ट, समाज सेविका मृदुला मिश्रा, प्रियंका मिश्रा, डा.किरणपाठक सिद्ध नाथ मिश्र डॉक्टर ज्ञानेश भारद्वाज प्रोफेसर अशोक यादव सुचिता मिश्रा वैष्णवी मांडवी गुर्दा कविता राऊत पीयूषा गुप्ता पूजा वर्मा अधिवक्ता दीपक पाठक राशिद मसूद रेशमा परवीन राम भजन दास देव कुमार ठाकुर फूल कुमारी सुलेखा देवी रणजीत पाठक पवन मिश्रा डॉक्टर पूजा कुमारी प्यारी देवी सुनीता यादव प्रोफेसर रीना सिंह सुमो तारा चक्रवर्ती
यादि ने भी पत्रकारिता को समाज के प्रति सजग सचेत मानवता एवं राष्ट्र को बचाने के लिए पत्रकारिता के महत्व को समझने एवं अपने दायित्व कर्तव्य को निभाने की बात कही।

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