जब जहर भी नहीं रोक पाया लता की सुरीली आवाज 

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जब जहर भी नहीं रोक पाया लता की सुरीली आवाज

30 से अधिक भाषाओं में अपनी सुरीली आवाज से गाना गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर देने वाली स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अलविदा कह दिया है। 92 वर्ष की उम्र में उनका कंठ हमेशा के लिए बंद हो गया। यह सत्य है जो जन्मा है उसकी मृत्यु भी होनी है, लेकिन लता जी के साथ जुडी एक घटना ऐसी है जब लगा था कि वह अब कभी भी स्वर की दुनिया में अपना जादू नहीं बिखेर पाएंगी। लता जब 33 वर्ष की थी तब उनको जहर दिया गया था। लता को धीमा जहर देने वाले का शायद मकसद यही था कि वह कभी भी गायकी की दुनिया में वापस ना आ पाए । इससे भी बड़ी बात लता को यह भी पता था उन्हें जहर किसने दिया हैं। लता ने एक इंटरव्यू में भी कहा था यह उनकी जिंदगी का सबसे भयानक दौर था। वह 3 महीने बिस्तर से नहीं उठ पाई थी। जब लोगों को लग रहा था शायद वह नहीं उठ पाएंगे तभी लता के दृढ़ संकल्प, मजबूत मना स्थिति और उनके फैमिली डॉक्टर आर पी कपूर की उनको उनको ठीक करने की जिद ने वह कर कर दिखाया जिसके बहुत अधिक उदाहरण दुनिया में मौजूद नहीं है। लता ना सिर्फ ठीक हुई बल्कि दोबारा से स्वर की दुनिया में कदम रखा। और हेमंत कुमार का कंपोज किया हुआ गाना “कहीं दीप जले कहीं दिल ” गा कर दोबारा सबको अपनी सुरीली आवाज से मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके लिए उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला था। अफसोस आज के बाद हम लता जी के गाए हुए गाने तो सुनेंगे मगर उनका कंठ अब कोई नया गाना हमारे लिए नहीं गा सकता

 

श्रद्धांजलि

उमेश शुक्ला

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