जनहित में जारी : अखबार पढ़ना क्यों है जरूरी

समाज जागरण नोएडा

जनहित में जारी: अखबार पढ़ना क्यों है जरूरी।

हमारे हमारे समाज में हजारोंं चालबाज धोखेबाज आसानी से भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहे है। कारण है सही जानकारी का नही होना। आज के समय में जनमानस अखबार पढने से ज्यादा सोशल मिडिया पर अपना विश्वास जताते है और धोखेबाज और चालबाज लोग उनको आसानी से इसी माध्यम से अपना शिकार बना रहे है। अखबार के प्रति घटते रूझान स्वयं जनता के लिए नुकसानदायक है जिसका फायदा पदस्थ अधिकारी और उनके करीबी उठाकर करोड़ों के टेंडर अपने नाम कर लेते है। क्योंकि गलती उनके नही गलती आपके है क्योंकि आपने उस योजना के लिए अप्लाई नही किया जो कि आप कर सकते थे। जनता को लूट खसोट करने वालों से बेहतर सेवा दे सकते थे लेकिन आपने ऐसा नहि किया।

मामला नोएडा ग्रेटर नोएडा और जनपद गौतमबुद्धनगर की है। जहाँ पर हाल ही में 62 से ज्यादा फार्म हाउस को तोड़ दिये गये है क्योंकि यह सब हिंडन के डूब क्षेत्र में आते है जहाँ पर सरकार के तरफ से खरीद बेच करना प्रतिबंधित है। तोड़े गए 62 अवैध फार्म हाउस को वैध कहे या अवैध इस पर ज्यादा विस्तार से अगले कड़ी में लिखने की कोशिश करूँगा। लेकिन फिलहाल यह तो जानना जरूरी है कि यह सभी जमीन किसी न किसी के द्वारा बेचे गए थे, जिस पर फार्म हाउस बने है। अब नोएडा प्राधिकरण यह कह रही है कि उनको पता ही नही है कि यह फार्म जो तोड़े गए है वह किसका था। इसका मतलब तो यही है कि हमार देश में शत प्रतिशत इंटेलिजेंसी फैलियर है। इतने बड़े बड़े फार्म हाउस किसी ने खरीदा फिर उस पर निर्माण कार्य किया लेकिन यह बात न तो पुलिस को पता है नही तो प्राधिकरण को।

इस प्रकार के सैकड़ो फार्म हाउस और भी हो सकते है जिसके लिए सर्वे किए जा रहे है। निश्चित तौर पर जब फार्म हाउस के लिए सर्वे किए जायेंगे तो हिंडन के तट पर बसे अवैध कालोंनी पर भी अधिकारी औऱ सर्वे करने वालों के नजर पड़ेंगे । यहां बता दे कि हिंडन की हालत यह है कि अगर बसावट को न रोका गया तो कुछ दिनों बाद हिंडन के ऊपर छत डालकर प्लाट काट दिये जायेंगे और भोले भाले जनता को बेच दिए जायेंगे। निश्चित तौर पर प्राधिकरण इसके लिए जिम्मेदार है लेकिन सरकार मजबूर है उनके खिलाफ कोई एक्शन नही ले सकती है। लेकिन अगर सरकारी आदेश आते है औऱ हिंडन किनारे बसे आशियाना पर बुल्डोजर चलते है तो आम जनता भी उतनी ही जिम्मेदार है। जो अपने खून पसीने के कमाई आसानी से देकर चालबाजों के चंगुल में फंस जाते है।

बता दे कि प्राधिकरण के द्वारा समय समय पर शहर के विभिन्न अखबार के माध्यम से नोटिफिकेशन निकाले जाते है। आम जनता को आगाह किए जाते है कि किस क्षेत्र में उनको जमीन खरीदना है और किस क्षेत्र में नही खरीदना है। लेकिन भागती दौड़ती जिंदगी में आम जनता के पास में समय नही है कि वह अखबार के माध्यम से सही तथ्य को समझे। भले ही सोशल मिडिया प्लेटफार्म के लिए उनके पास पूरे दिन का समय हो, राजनीतिक दलों के लिए मरने मारने को तैयार हो। लेकिन समाचार पत्र पढ़ने के लिए उनके पास आधे घंटे का भी समय नही है। यही कारण है कि अकबार लोंगों के टेबल पर होने के बजाय छोले भटूरे वालों के दुकान पर पैक करने के काम आते है।

अखबार क्यों पढ़ना चाहिए ?
अखबार क्यो पढना चाहिए यह सवाल आज के युग में आना लाजमी है लेकिन क्या आपको पता है कि सोशल प्लेटफार्म के मुकाबले में अखबार आज भी 95 प्रतिशत ज्यादा विश्वसनियता के साथ काम करता है क्योंकि उनको उनका जबाबदेही होता है, जबकि सोशल मिडिया एक अफवाह की तरह है कौन क्या लिख रहा है उसको कितना जानकारी है ? यह किसी को नही पता है। सोशल मिडिया पर फर्जी वेवसाइट बनाकर चलाए जा रहे विज्ञापन में आये दिन ठगी के मामले आते रहतेे है। अगर आप अखबार पढते है तो आप इन चीजों से बच सकते है। क्योंकि किसने विज्ञापन दिया है यह पता औऱ ठिकाना अखबार वालों के पास में होते है।

इसके अलावा अखबार एक माध्यम है जिसके जरिये आपको सरकारी योजनाओ का भी पता लगता है। सरकार समय समय पर नोटिफिकेशन निकालकर आम जनता को जागरुक करने की कोशिश करती है कि हमे क्या करना चाहिए और क्या नही।

उदाहरण के तौर पर नोएडा ग्रेटर नोएडा में लाखों के संख्या में प्लाट डूब क्षेत्र मे काटे गए है और उसे भोले भाले लोगों को बेच दिए गए है। जिसने बेचा उसने पैसे लिया सरकार को रजिस्ट्री शुल्क मिला। खरीदार को डूब क्षेत्र में जमीन मिला। बड़ी मेहनत से कमाए पैसे से उन्होने घर भी बना लिया। वर्षों की राजनीतिक धांधलेबाजी और वोट बैंक नें आज तक उनको सुरक्षित भी रखा है। लेकिन अगर एक प्रतिशत भी सरकार उस पर कार्यवाही करती है तो यह कार्यवाही अतिक्रमण के नाम पर किए जायेंगे औऱ लाखों लोगों को बेघर होना पड़ेगा।

प्राधिकरण ने कई क्षेत्रों को नोटिफाइड किया हुआ है इसके बावजूद वहाँ पर निर्माणा कार्य किए जा रहे है। निर्माण कार्य करने के लिए जो माप निर्धारित किए गए है उससे कहीं हटकर निर्माण किए जा रहे है। साहबेरी जैसी एरिया में बिल्डर आराम से अवैध निर्माण कार्य करके लोगोंं को बेच रहा है। बडी बात कि सरकार उस पर स्टाम्प लेकर रजिस्ट्री करने में भी कोई कोताही नही बरत रही है।

सरकार के ज्यादा विज्ञापन अखबार के माध्यम से निकाले जाते है, अधिकतर सरकारी योजनाओ को जन जन तक पहुँचाने के लिए सरकार लाखों करोड़ो खर्च करती है लेकिन आम जनता तक यह पहुँच नही पाती है। कारण आम जनता इन सबसे दूरी बनाकर सोशल मिडिया प्लेटफार्म को अपना दोस्त समझती है। जबकि सच यह है कि सोशल मिडिया के माध्यम से सच से कई गुणा ज्यादा भ्रामकता फैलायी जाती है। टीवी न्यूज या दूसरे माध्यम सरकारी विज्ञापन के लिए उतने उपयुक्त नही है जितना की अखबार। अखबार के प्रति जनता के कम होते रूझान के कारण एक तरफ जहाँ उनको जानकारी नही मिल पाती है वही दूसरी तरफ अखबार के विज्ञापन भी फाइल कांपी बनकर ही रह जाते है औऱ सांठ गांठ करके सरकारी योजनाओं का लाभ पदस्थ अधिकारी और उनके करीबी उठा ले जाते है।
इसलिए जरूरी है कि जनता अखबार पढे भी और यह भी देखे कि आपके गली में जो कार्य हो रहा है उसके लिए कितने की टेंडर दिए गए है और उसी मानक के साथ कार्य हो रहा है या नही। अखबार में विस्तृत जानकारी दिए जाते है आप उसके माध्यम से सब पता लगा सकते है साथ मे यह भी पूछ सकते है कि इस कार्य योजना के लिए विज्ञापन किस किस अखबार में दिए गए है वह छपते भी है। यह सब आपको तभी पता लगेगा जब आप अखबार पढ़ते हो।

भारत में 1 लाखे से ज्यादा अखबार सरकारी विज्ञापन के लिए पंजीकृत है। इसमे सें बहुत कम अखबार को नही विज्ञापन मिल पाते है। लेकिन जितने को मिलते है उसमें से भी लगभग 1 प्रतिशत से भी कम अखबार छपकर बाहर आम जनता के बीच पहुँचते है। जबकि ज्यादातर अखबार विज्ञापन छापकर सिर्फ फाइल कापी ही जमा करने के काम करती है। लाखों के विज्ञापन गटक लेती है जबकि प्रकाशित अखबारों को इसके लिए संघर्ष करने होते है। आज सैकड़ों अखबार लाइन में लगे है जिसका ज्यादातर मकसद राजनीतिक और प्रशासनिक लाभ उठाना है या फिर सरकारी विज्ञापनों का गबन करना है। अखबार लोग अगर पढने लगे तो अखबार बिकने लगेंगे। जनता को सरकारी योजनाओं का जानकारी होने लगेंगे औऱ जनता सरकार से जबाब मांगने लगेगी। यही कारण है कि सरकार भी इस मामले मे चुपी साध रखी है।

इसलिए अखबार पढ़ना जरूरी है ना सिर्फ फर्जीवाड़े से बचने के लिए बल्कि सरकारी योजनाओं का सही समय पर पता लगाने के लिए भी। समाचार पत्र कई मायने में सोशल मिडिया से बेहतर है और सामाजिक जानकारियों से भरपूर भी। समाचार पत्र को पढना मन को स्थिर करना भी माना जाता है। कृप्या कोई भी एक अखबार खरीदकर आधे घंटे का समय निकालकर अवश्य पढ़िये।

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