जनसंख्या नियंत्रण कानून में प्रोत्साहन हिंदू के लिए घातक

जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर पूरे देश में गहमागहमी का माहौल है। क्योंकि बढ़ती जनसंख्या दर सरकार तथा प्रकृति दोनों के लिए घातक है। इसके अलावा बढते बेरोजगारी भी हमारे सामने एक सबसे बड़ी समस्या है। सरकार जितना साल भर में प्लान कर पाती है उससे ज्यादा आबादी एक सप्ताह में ही बढ जाते है। ऐसे मे उत्तर प्रदेश सरकार ने एक कदम उठाया है, लेकिन यह कानून राज्यव्यापी नही बल्कि देश व्यापी होनी चाहिए।
हालाँकि यह समस्या सिर्फ किसी देश की नही बल्कि पूरे विश्व की है। क्योंकि सरकार भी एक देश की सीमा से बंधी है तो उसे कम से कम देशव्यापी एक सख्त कानून बनाकर इस पर नियंत्रण करने की प्रयास करनी चाहिए। जो कि आज तक नही हुआ है। हालाँकि यहाँ पर राजनीतिक महत्वाकांक्षीवादी नेता ज्यादा मात्रा में है इसलिए एक कठिन काम है किसी भी सरकार के लिए। या यह कहना भी ठिक होगा कि यह कानून लागू करना इतना सरल नही होगा।
अब अगर आकड़े की बात करें तो भारत में पास में दुनिया के 2% जमीन है लेकि इस पह रहने वाले दुनिया के 20% लोग है। पिछले 75 वर्ष में भारत की आबादी 34 करोड़ से 150 करोड़ हो गयी है यानि 5 गुणा वृद्धि दर हासिल किया है। 1951 की जनगणना के अनुसार उस समय में हिंदू की आबादी 30.6 करोड़ जो कि 82.1 % और मुस्लिम की आबादी 3.54 करोड़ ( 11.99) 12% था। अगर इस हिसाब से हम देखे तो मुस्लिम की आबादी तेजी से बढ़ा है, और यह 7 गुणा से ज्यादा है। जबकि हिंदू की आबादी 3 गुणा बढ़ा है।

अब अगर हम थोड़ा सा कारण को जाने तो हम देखेंगे की हिंदुओं के कम होने का कारण धर्मांतरण भी रहा है। कही लालच देकर उसको क्रिश्चन बना दिया गया तो कही जबरदस्ती मुसलमान बना दिया गया। अगर यहाँ पर क्रिश्चन की बात करे तो क्रिश्चन की आबादी कम बढी है। क्योंकि क्रिस्चन ज्यादा आबादी बढ़ाने के बजाय कम आबादी में ही खुश रहना पसंद करता है। हालाँकि बड़े पैमाने पर हिंदुओं का कन्वर्सन क्रिश्चन के द्वारा लोभ लालच देकर किया जा रहा है और काफी हद तक इसमें सफल भी रहे है। फिर भी क्रिश्चन का जनसंख्या जस की तस है।

अब अगर जनसंख्या नियंत्रण की बात हिंदुओं के लिए करे या हिंदुओं के प्रपेक्ष में करे तो आप देखेंगें की हिन्दुओं नें जनसंख्या नियंत्रण कर लिया है। अधिकतर समझदार और पढ़े लिखे हिंदुओं ने पहले ही टु-चाईल्ड पालिसी अपना लिया है। आने वाले समय में जब जनगणना किया जायेगा तो यह बात बिल्कुल साफ हो जायेगा। हिंदू पहले ही जनसंख्या नीति को स्वीकृती दिया हुआ है। बात यहाँ तक हो चली है कि मार्डन और कामकाजी उच्च वर्ग के महिलाएँ बच्चा पैदा ही नही करना चाहती है। अब इससे ज्यादा नियंत्रण क्या होगा। लेकिन भारत में जिसके पास रहने खाने की व्यवस्था नही है उनके पास ज्यादा बच्चे है, लेकिन जो परिवार सुखी संपन्न है वहाँ पर टु-चाइल्ड पाॅलिसी शत प्रतिशत लागू है अगर हम एक विशेष वर्ग या मजहब की बात न करे तो।

अब अगर योगी सरकार जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रलोभन पाॅलिसी लेकर आयी ही तो इससे सिर्फ और सिर्फ हिंदू जनसंख्या ही कम होंगे।
देश के सबसे बड़े राज्य ने इस मामले में दिलचस्पी लेते हुए एक कदम आगे बढाया है। जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी और हिंदू संगठनों नें पुरजोर समर्थन किया है। वहीँ विपक्ष इस पर अपना राजनीतिक रोजी सेक रही है।
राज्य के विधि आयोग के द्वारा तैयार ड्राफ्ट में सख्ती कम और लालच ज्यादा है दिया गया है। प्रलोभन ज्यादा दिया गया है। अगर यही ड्राफ्ट प्रभावी होता है तो इसका असर भी सिर्फ हिंदुओं पर ही पड़ेगा। जिस प्रकार से ड्राफ्ट में सिर्फ और सिर्फ कड़ी प्रावधान का वकालत किया गया है। इससे तो संभव ही नही है कि जनसंख्या नियंत्रण किया जा सके।

ड्राफ्ट के अनुसार

ड्राफ्ट के अनुसार या जो ड्राफ्ट में कहा गया है। अब राशन कार्ड में सिर्फ चार नाम ही लिखे जायेंगे। इससे ज्यादा नाम यानि बच्चे होने पर उसको किसी भी प्रकार के सरकारी सुविधा या सरकारी सब्सीडी का लाभ नही दिया जायेगा।

कानून लागू होने के साल भर के भीतर सभी सरकारी कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा कि नियम का पालन करेंगें। शपथ पत्र देने के बाद अगर इन सरकारी कर्मचारियों के द्वारा नियम का उलंघन किया जाता है तो प्रमोशन नही दिया जायेगा या फिर बर्खास्त करने की कार्यवाही किया जा सकता है। लेकिन क्या यह इतना उपयुक्त होगा ?

इसके अलावा योगी सरकार नें स्वेंच्छिक नसबंदी करवाने वाले यानि पाॅलिसी का पालन करने वाले अभिभावकों को सरकार खास सुविधा देंगी।
जिसमें सरकारी कर्मचारियों को दो एक्सट्रा सैलरी, इंक्रीमैट, प्रमोशन 12 महीने की मातृत्व या फिर पितृत्व अवकाश, जीवन साथी को बीमा कवरेज. सरकारी आवासीय योजना में छूट, पीएफ में एम्पलायर कान्ट्रिब्यून बढ़ाने जैसी कई सुविधाएँ दी जायेगी।

जिसके पास से सरकारी नौकरी नही है, उसे पानी बिजली होम टैक्स में छूट दी जायेगी।

प्रदेश में योगी सरकार का लक्ष्य 2026 तक जन्म दर प्रति हजार आबादी पर 2.1 तक तथा 2030 तक 1.9 तक लाने की लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए समाज में जागरुकता पैदा करने के लिए भी अभियान चलाये जायेंगे।

अब मैं आपको बढते जनसंख्या पर चिंतन के साथ आपको बताना चाहूँगा कि कैसे इस ड्राफ्ट से या इसका असर सिर्फ हिंदू जनसंख्या पर ही पड़ेगा।

योगी सरकार के ड्राफ्ट में कहा गया है कि अब राशन कार्ड में चार नाम से ज्यादा नहो होगा। लेकिन भारत देश लोकतंत्र से ज्यादा जाहिलों के वोट तंत्र पर आधारित है। आप भले ही राशन कार्ड में नही देंगे लेकिन फिर भी सारे सुविधाओं का लाभ उनको राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए मिलेंगे। इस देश में नेता वोट के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है। जिनका कम करना है उनका तो होगा नही और निहायत ही हिंदू वोट बैंक भारतीय जनता पार्टी से नाराज होकर दूसरे को वोट करेंगे। सत्ता बदलने के बाद फिर वही चार बीबी चालिस बच्चे की कहानी शुरू।
उदाहरण के लिए क्या योगी जी मोदी जी के द्वारा दिये जा रहे फ्रि राशन योजना को 2 बच्चों से ज्यादा वाले को नही देंगे। क्या वामपंथी मिडिया भूख से मरने की फर्जी खबर चलायेंगे तो आप योजना को रोक पायेंगे ? इन सबका एक ही जबाब है नही। ऐसे में सिर्फ और सिर्फ हिंदू वोट बैंक और जनसंख्या ही कम होंगे जो पूरे विश्व के लिए खतरा है।

दूसरे बिंदू पर अगर बात करे , जिसमें शपथ पत्र की बाते कही गयी है। भारत में लगभग 98% सरकारी नौकर हिंदू है। जो किसी भी जाति वर्ग या क्षेत्र से हो सकते है। इसका सीधा सा मतलब है कि यह नियम भी 98% हिंदू पर ही लागू होगा। 2 प्रतिशत पर इसका कोई असर नही होगा। जो पुलिस के मैनुअल को भी नही मानते हो उसे आप कैसे समझा सकते है। क्योंकि अल्लाह के देन है और गजबा-ए-हिंद मिशन है जो एक क्या सैकड़ो सरकारी नौकरी को लात मार सकते है।

तीसरा : दो बच्चों के पाॅलिसी (नियम) पालन करने पर सरकार कुछ विशेष सुविधा देगी। निश्चित तौर पर इसमें भी हिंदू ही शामिल होगें। क्योंकि कुछ धर्म गुरुओ नें तो पहले ही कह दिया है कि बच्चे तो भगवान देते है, लेकिन यह नही बताते कि बीमारी भी भगवान देते है जिसका ईलाज करवाना अल्लाह को नाराज करना है।
ईलाज तो सरकारी अस्पताल में करवाते है और डाक्टर से करवाते है, और बच्चे होने की दोष अल्लाह और भगवान पर थोप देते है।
ऐसे में एक विशेष वर्ग पर इसका पड़े यह संभव नही है। क्योंकि इस मानसिकता के साथ पोलियों की दवाई नही पिलायी, कोरोना के इंजेक्शन नही लिया। तर्क दिया इसके लेने से नपुंसकता आते है। जाहिलों के वोट तंत्र में विशेष महत्व का ही परिणाम है। यह संयोग नही है, जो इस मानसिकता के साथ दुनिया में मार-काट मचा रखा हो। क्या आप उसको जागरुक कर पायेंगे। यह सवाल या इस विषय पर भारत ही नही पूरे विश्व को चिंतन करने की आवश्यकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस ड्राफ्ट में दिये गये प्रलोभन में फंसकर हिंदू अपना जनसंख्या कम करेगा वही दूसरी तरफ जनसंख्या का विस्फोट होता रहेगा। परिणाम स्वरूप जैसा कि कुछ धर्म गुरु अनुमान लगा रहे है कि 2029 में भारत में पहला मुस्लिम प्रधानमंत्री बनेगा और पूरे संविधान को पलट देगा। जैसा कि हाल के चुनाव में बिहार और बंगाल माॅडल। शायद किसी को पता हो कि ओवेसी के पास गजबा-ए-हिंद के अलावा कौन सी विकास की माॅडल है। जिस पर बिहार में 5 सीट मिला।

अगर आपको जनसंख्या नियंत्रण करना है तो पहले सिविल युनिफार्म कोड लाना होगा और बहु-विवाह पर रोक लगाना होगा। अन्यथा चार बीबी और 40 बच्चे की माॅडल को ध्वस्त नही किया जा सकता है। इसके बाद जनसंख्या नियंत्रण कानून देशव्यापी हो। इस पाॅलिसी को न मानने वालों का सबसे पहले वोट देने का अधिकार छिन लेना चाहिए। लोकतंत्र में सबका योगदान जरूरी है। भारत में सबके लिए समान कानून होनी चाहिए। हमें चाईना से कुछ सीखना चाहिए। वहाँ पर वोटतंत्र का कोई महत्व नही है और लोकतंत्र है ही नही।

जय श्रीराम
लेखक का यह स्वतंत्र विचार है।

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