*रहमत और बरकत के पाक माह- ए-रमजान में बड़ों के साथ नन्हे बच्चे ने रखा रोजा*

*मुरारी झा*
दरभंगा जिला के बिरौल में चांद निकलने के साथ ही रमजान का महीना भी शुरू हो जाता है। रहमत और बरकत के पाक माह- ए-रमजान में बड़ों के साथ छोटे बच्चे भी रोजा रख रहे हैं। छोटे बच्चे भी मस्जिद में जाकर नमाज अदा कर रहे हैं। छोटे बच्चों में रोजा को लेकर काफी उत्साह है। अकबरपुर बेंक के मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद शमशुल जुहा का कहना है कि रोजा रखना हर मुसलमान का फर्ज है। सभी बालिग मर्द-औरत को रोजा रखना चाहिए। रमजान शांति, अमन, चैन व भाइचारे का महीना है। इस महीने में इबादत करने से बहुत लाभ मिलता है। अल्लाह रहमत के दरवाजे खोल देते हैं और शैतान को कैद कर देते हैं। गांव में कई ऐसे बच्चे है जो पहले दिन से रोजा रख रहे है। रमजान को लेकर बस्तियों में चहल-पहल बढ़ गयी है। मुस्लिम विद्वान बताते हैं, रोजा रखना सिर्फ भूखे- प्यासे रहना ही नहीं है। रोजा से तन-मन की शुद्धि होती है। रोजेदारों को बुरा कहना, बुरा देखना, बुरा सोचना एवं झूठ बोलने की मनाही है। पूरी तरह से शुद्ध होकर रोजा रखना चाहिए। इस्लाम में रोजे को फर्ज कहा गया है। हर एक मुसलमान पर रोजा फर्ज है।रमजान के महीने में रोजेदारों व हर मुसलमान को जकात यानी दान देना चाहिए। रोजा रखने वाले को अपनी सालभर की कमाई का एक हिस्सा गरीबों को दान करना चाहिए। जो मुसलमान रोजा रखते हैं उन्हें निश्चित रूप से जकात करना चाहिए। तभी रोजा रखना सफल होता है। रोजेदारों के लिए जकात धर्म है। वही अकबरपुर बेंक के पांच साल का मोहम्मद जैद, मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद आरिफ, असादुल्लाह, मनतसा प्रवीन, सादिया प्रवीन, सायमा आरजू,नफीसा प्रवीन, सहित कई बच्चे और बच्चियां ने रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की।

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