क्या लोकतंत्र में..

सत्ता में बैठी पार्टी का विधायक या सांसद ही विकास कर सकता है

पहले भी विकास होता था विपक्ष में बैठे विधायक भी विकास करते थे लेकिन ये नया चोंचला कहा से आ गया अरे जनता ने तुम्हे विधायक बनाया और तुमने सरकार न रहने पर इस्तीफा देदिया सरकार किसी की भी हो पैसा(विधायक फण्ड ) उतना ही आता है ना जितना सरकार में बैठे विधायको को आता है उसी में विकास कर लो तुमने दूसरी पार्टी जॉइन करि इसमे आपका समय नही खराब होगा जनता एवं छेत्र समय खराब होगा आपका क्या है आप तो वेसर्म हो कर फिर जनता के पास पेर पकड़ने जाओगे भोली भाली जनता फिर आप पर भरोसा कर लेगी ओर आप करोड़ो रूपये खर्च कर सरकार में आ जाओगे फिर आप के पास कार्यकाल के 12 महीने बचे होंगे और आप चुनाव में खर्च हुए पैसे वसूलेंगे।।।। छेत्र का विकाश न करते हुए आप अपना विकाश कर बैठेंगे
जनता फिर से मूर्ख बन जाएगी

जो अपनी पार्टी का नही हुआ वो छेत्र ओर जनता का क्या होगा
बस एक बार (पार्टी से दगा)करने वालो को हारते देखना हे कम से कम ये खेती बाड़ी से लग जाये

आँखे खोले समझने की कोशिश करे और विकास के नाम पर अपना विकास करने बालो पर अब विश्वास न करो

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