इनकम टैक्स रिटर्न भर रहे हैं तो पहले अपने फॉर्म 26AS में डिटेल्स देखें

फॉर्म 26AS में हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस और आपके डिडक्ट किए गए और डिपॉजिट हुए टैक्स की जानकारी होती है

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की अंतिम तारीख 30 सितंबर है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नए पोर्टल पर आ रही मुश्किलों के कारण इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। इस पोर्टल को डिवेलप करने वाले सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस को सभी कमियों को दूर करने के लिए 15 सितंबर तक की अवधि दी गई है।

हालांकि, टैक्सपेयर्स को ITR भरने के लिए तैयार रहना चाहिए। आपके लिए फॉर्म 16, बैंक और कैपिटल गेन स्टेटमेंट्स जरूरी होंगी। इसके अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट फॉर्म 26AS है, जिसे टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट भी कहा जाता है।

यह इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करने से मिल सकता है।

फॉर्म 26AS में पिछले असेसमेंट ईयर में बदलाव किया गया था। इसमें हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस और आपके डिडक्ट हुए और डिपॉजिट हुए टैक्स की जानकारी होती है।

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सैलरीड एंप्लॉयी के लिए एंप्लॉयर प्रत्येक महीने टैक्स डिडक्ट करता है। अगर आपने फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया है तो आपका बैंक मैच्योरिटी पर आपके एकाउंट में इंटरेस्ट को क्रेडिट करने से पहले लागू टैक्स को डिडक्ट करेगा।

टैक्स एंड कंसल्टिंग फर्म AKM Global के डायरेक्टर, संदीप सहगल ने बताया, “इसमें टैक्सपेयर के PAN से जुड़ी इनकम और डिडक्ट किए गए टैक्स की डिटेल्स भी होती हैं। टैक्सपेयर को इनका मिलान अपने रिकॉर्ड से करना चाहिए।”

विशेष फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस देखें

इसमें कैश डिपॉजिट, शेयर्स, बॉन्ड्स, डिबेंचर्स और प्रॉपर्टी की खरीद और बिक्री जैसी हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस भी होती हैं। उदाहरण के लिए, आपके सेविंग्स एकाउंट में एक फाइनेंशियल ईयर में 10 लाख रुपये से अधिक का कैश डिपॉजिट। इसी तरह अगर आप 30 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो उसकी जानकारी भी इसमें होगी।

फॉर्म 26AS महत्वपूर्ण क्यों है

ITR भरने से पहले फॉर्म और अपनी बैंक स्टेटमेंट में डिटेल्स की तुलना करा जरूरी है। इससे ITR भरने के दौरान गड़बड़ी होने की आशंका न्यूनतम हो जाती है। इसका मिलान नहीं होने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से पूछताछ की जा सकती है।

फॉर्म 16 और फॉर्म 26AS में डिटेल्स का मिलान नहीं होने से क्या होगा

अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको किसी अंतर और उसके कारण का पता चल सकता है। सहगल ने बताया कि अगर इनकम या TDS में अंतर है तो इसे गलती को सुधारने का एकमात्र तरीका टैक्स डिडक्टर (एंप्लॉयर या बैंक) को इसकी सूचना देकर सही TDS रिटर्न हासिल करना है।

टैक्सपेयर इस तरह की गलती को खुद सुधार नहीं सकता।

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